प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों के ईपीएफओ कवरेज के दायरे में आने की उम्मीद है, जिससे कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा के दायरे में काफी वृद्धि होगी।
ईपीएफओ वेतन सीमा 2004 से 2014 तक के दशक में अपरिवर्तित रही, सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया। वेतन सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का मौजूदा निर्णय इसी विजन को आगे बढ़ाता है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि पिछले कुछ सालों में वेतन में लगातार बढ़ोतरी, आय में वृद्धि और औपचारिक रोजगार के लगातार विस्तार को ध्यान में रखा जा सके।
वर्तमान में, 15,000 रुपये प्रति माह से अधिक वेतन पर रोजगार में शामिल होने वाला एक नया कर्मचारी स्वत: ईपीएफ संरचना के तहत कवर नहीं होता है और अनिवार्य भविष्य निधि, पेंशन और संबंधित बीमा सुरक्षा से बाहर रह सकता है। 25,000 रुपये की सीमा बढ़ाने से 15,000 रुपये से 25,000 रुपये के वेतन बैंड में कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा वैधानिक सामाजिक सुरक्षा संरचना के दायरे में आ जाएगा।
इस मंजूरी से प्रभावी योजना के प्रावधानों के अनुसार भविष्य निधि बचत, कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के तहत पेंशन सुरक्षा और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (ईडीएलआई) के तहत बीमा सुरक्षा तक पहुंच का विस्तार होगा। यह वैधानिक योगदान और पेंशनयोग्य-वेतन संरचना को मौजूदा वेतन स्तरों को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने में भी सक्षम करेगा।
चूंकि वेतन सीमा को अंतिम बार सितंबर 2014 में संशोधित किया गया था, इसलिए भारत ने निरंतर वेतन वृद्धि, आय में वृद्धि और औपचारिक रोजगार का निरंतर विस्तार देखा है। कई राज्यों और व्यवसायों में, न्यूनतम मजदूरी भी मौजूदा सीमा के करीब पहुंच गई है। इसलिए 25,000 रुपये तक की वृद्धि बढ़ते वेतन स्तर के अनुरूप ईपीएफओ संरचनाओं को अपडेट करती है और कार्यबल के एक व्यापक वर्ग तक औपचारिक सामाजिक सुरक्षा के लाभों का विस्तार करती है।
