राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस और राष्ट्रपिता श्री महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर, केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) राजस्थान इकाई ने अफीम की खेती वाले क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की, इसका उद्देश्य किसानों और स्थानीय समुदायों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा नशा मुक्त भारत का संदेश प्रसारित करना था।
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, कोटा द्वारा 'ऑपरेशन युवा रक्षा' के तहत कोटा विश्वविद्यालय में नशीले पदार्थों के सेवन और उसके दुष्प्रभावों पर एक जागरूकता सत्र आयोजित किया गया।
इस सत्र में कोटा विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री मुरलीधर प्रतिहार, एनएसएस प्रमुख सुश्री श्वेता सहित विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य और छात्र उपस्थित रहे। सत्र के दौरान मुख्य अतिथि एवं कोटा के उप-नारकोटिक्स आयुक्त श्री नरेश बुंदेल ने छात्रों के साथ संवाद किया और बताया कि किस प्रकार बुद्धिमान एवं जागरूक व्यक्ति भी हेरफेर, साथियों के दबाव और सामाजिक परिवेश के प्रभाव में आ सकते हैं। व्यावहारिक उदाहरणों, प्रस्तुतियों और वीडियो के माध्यम से उन्होंने ‘फास्ट माइंड’ और ‘स्लो माइंड’ की अवधारणाओं को बखूबी समझाया। उन्होंने यह भी बताया कि नशीले पदार्थों का पहला सेवन धीरे-धीरे से बार-बार सेवन, आदत और निर्भरता की ओर ले जा सकता है।
छात्रों को पहली ही बार में "ना" कहने, सहकर्मियों के दबाव का विरोध करने और समझदारी भरा एवं जिम्मेदारीपूर्ण विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह सत्र काफी संवादात्मक रहा, जिसमें छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और कई विचारणीय प्रश्न पूछे।
सत्र के समापन पर प्रतिभागियों ने नशा मुक्ति की शपथ ली और नशीली दवाओं से दूर रहने तथा एक स्वस्थ एवं नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
कोटा के जिला नारकोटिक्स कार्यालय (डीओओ) ने कोटा संभाग के अफीम किसानों के लिए अफीम, गांजा और अन्य अवैध मादक पदार्थों के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। अभियान का संदेश देने वाले बैनर प्रदर्शित किए गए और कार्यक्रम का समापन “नशा मुक्त भारत की शपथ” के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने अपने-अपने समुदायों में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
झालावाड़ के डीओओ ने झालरापाटन तहसील के बाबरीखड़ा के पास स्थित अफीम की खेती वाले एक गांव में कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में मादक पदार्थों के सेवन के दुष्प्रभावों तथा नशे की रोकथाम में समुदाय की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया।
