भारत के विद्युत क्षेत्र के लिए कोयला देश की ऊर्जा-सुरक्षा श्रृंखला का एक आवश्यक घटक है, जो खनन, निकासी, विद्युत उत्पादन और विद्युत की उपलब्धता को आपस में जोड़ता है। इस श्रृंखला में कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो अपने कुल कोयला आपूर्ति का 80 प्रतिशत हिस्सा विद्युत क्षेत्र को उपलब्ध कराता है।
सीआईएल के हालिया प्रदर्शन से इस आपूर्ति श्रृंखला के स्पष्ट रूप से मजबूत होने का संकेत मिलता हे। वित्त वर्ष 2026-27 में कोयले के उठाव तथा विद्युत क्षेत्र की आपूर्ति में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह सुधार बेहतर निकासी, उत्पादन और प्रेषण के बीच बेहतर समन्वय तथा खदान-मुख (पिटहेड) पर संचित कोयला भंडार के उपयोग से समर्थित रहा है। आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं।
आपूर्ति की गति में मजबूती
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले छह महीनों के दौरान सीआईएल का कुल कोयला उठाव 384.2 मिलियन टन (एमटी) रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह 357.0 एमटी था। इस प्रकार इसमें 27.2 एमटी या 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
दूसरी तिमाही में यह गति और अधिक मजबूत हुई। सीआईएल का दूसरी तिमाही का कोयला उठाव 186.04 मिलियन टन तक पहुंच गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में यह 166.04 मिलियन टन था। इस प्रकार 12.05 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि सुधार किसी एक महीने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तिमाही के दौरान लगातार अधिक स्पष्ट होता गया।
सितंबर में यह स्थिति और अधिक मजबूत हुई। इस महीने सीआईएल की कुल कोयला आपूर्ति बढ़कर 61.20 मिलियन टन हो गई, जबकि सितंबर 2025 में यह 54.40 मिलियन टन थी। इस प्रकार 12.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
वास्तव में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के दौरान सीआईएल ने पिटहेड पर उपलब्ध 63 मिलियन टन कोयला भंडार का निपटान किया। इससे यह प्रदर्शित होता है कि बढ़ी हुई आपूर्ति केवल वर्तमान उत्पादन पर ही आधारित नहीं थी, बल्कि भंडार के बेहतर उपयोग से भी समर्थित थी।
आपूर्ति रणनीति के केंद्र में विद्युत क्षेत्र
जब इन आंकड़ों को विद्युत क्षेत्र के परिप्रेक्ष्य में देखा जाता है, तो इनका महत्व और अधिक स्पष्ट हो जाता है।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के दौरान विद्युत क्षेत्र को सीआईएल का कोयला प्रेषण 302.8 मिलियन टन रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में यह 285.4 मिलियन टन था। इस प्रकार इसमें 17.4 मिलियन टन या 6.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
दूसरे शब्दों में पहली छमाही के दौरान सीआईएल के कुल कोयला उठाव का लगभग 79 प्रतिशत विद्युत क्षेत्र के लिए था। यह सीआईएल की वितरण रणनीति में विद्युत उत्पादन की प्राथमिकता को पुन: रेखांकित करता है।
