17 सितंबर, 2026 से 2 अक्टूबर, 2026 तक चले स्वच्छता ही सेवा अभियान में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) ने अपने प्रशासनिक नियंत्रण वाले केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) और संबद्ध कार्यालयों के साथ मिलकर हिस्सा लिया। अभियान की शुरुआत 17 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-3 में शपथ ग्रहण समारोह से हुई, जिसमें मंत्रालय के सचिव उपस्थित रहे।
मंत्रालय के सचिव ने अभियान की प्रगति की लगातार समीक्षा की और सभी हितधारकों को निर्देश दिया कि वे भागीदारी को अधिकतम करें तथा अभियान को और मजबूत करने के प्रयासों में तेजी लाएं।
अभियान के अंतर्गत प्रमुख उपलब्धियाँ
स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों और सार्वजनिक स्थानों का रूपांतरण
पहले स्तंभ के अंतर्गत मंत्रालय और उससे जुड़े संगठनों ने चिन्हित स्थलों पर सफाई और कायाकल्प से जुड़ी गतिविधियां चलाईं। बाजार, मोहल्ले, शौचालय, कार्यालय और जल निकाय भी इन स्वच्छता प्रयासों के दायरे में रहे।
अभियान की अवधि में 9,845 स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों का रूपांतरण हुआ, जिसमें 99,548 लोगों की भागीदारी रही। साथ ही 937 सार्वजनिक स्थलों को साफ करने में 45,526 प्रतिभागियों ने सहयोग दिया।
जल संसाधनों को स्वच्छ रखने और उनके संरक्षण को प्रोत्साहित करने के मकसद से जल निकायों पर 143 सफाई अभियान चलाए गए, जिनमें 1,264 लोग शामिल हुए। इसके साथ ही 543 मोहल्ला स्वच्छता अभियान भी आयोजित हुए।
स्वच्छ पाठशाला: स्वच्छता के लिए युवा
युवाओं में स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान में छात्रों, शिक्षण संस्थानों और समुदाय से जुड़े हितधारकों को जोड़ा गया।
दर्ज की गई गतिविधियों में कुल 18,700 स्कूली बच्चों ने हिस्सा लिया। इन गतिविधियों में जागरूकता एवं प्रदर्शन कार्यक्रम, हितधारकों की सहभागिता, स्कूल स्तर की स्वच्छता पहल, जल संचय संवाद और ज्ञान यात्रा शामिल रहीं। ज्ञान यात्रा में 3,109 छात्र शामिल हुए।
सफाई मित्र सुरक्षा एवं सम्मान शिविर
स्वच्छता कर्मियों के अहम योगदान को सम्मान देते हुए मंत्रालय के संगठनों ने 234 सफाई मित्र सुरक्षा एवं सम्मान शिविर लगाए, जिनमें 7,098 स्वच्छता कर्मचारी पहुंचे।
4,365 प्रतिभागियों के लिए 276 निवारक स्वास्थ्य जांच आयोजित की गईं, जिनमें 3,518 पीपीई किट बांटी गईं। इन पहलों का जोर स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा, सेहत, सम्मान और कल्याणकारी लाभों तक उनकी पहुंच पर रहा।
जन भागीदारी स्वच्छता के लिए
जागरूकता अभियानों, खाद निर्माण की पहलों, प्लास्टिक का उपयोग घटाने वाली गतिविधियों और सामुदायिक कार्यक्रमों के जरिये नागरिकों को अभियान से जोड़ा गया। इसके तहत 450 खाद निर्माण जागरूकता अभियान, 3,530 प्रतिभागियों वाली 154 खेल स्वच्छता गतिविधियां और 2,662 प्रतिभागियों के साथ 'प्लास्टिक को ना कहें' गतिविधियां हुईं, जिससे टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता प्रयासों में समुदाय की हिस्सेदारी बढ़ी।
स्वच्छता से समृद्धि
पांचवां स्तंभ कचरे से संपदा बनाने और चक्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों पर केंद्रित रहा, जिसमें 'कबाड़ से जुगाड़' और 'कबाड़ से कला' जैसी पहलें शामिल थीं। इसके अंतर्गत 191 कला महाविद्यालयों व संस्थानों से जुड़ाव हुआ, 175 प्लास्टिक पुनर्चक्रण मेले लगे, 135 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों (पीडब्लूएमयू) का मूल्यांकन किया गया, तथा 'कबाड़ से जुगाड़' में 687 और 'कबाड़ से कला' में 607 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं।
इन प्रयासों से कचरे के रचनात्मक दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा मिला और संसाधनों की पुनर्प्राप्ति तथा टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर जागरूकता फैली।
स्वच्छता की भावना को बनाए रखना
ये उपलब्धियां मंत्रालय, उसके सीपीएसई व संबद्ध संगठनों, कर्मचारियों, छात्रों, स्वच्छता कर्मियों और आम नागरिकों की साझा मेहनत का परिणाम हैं। सफाई अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों, कल्याण शिविरों और अपशिष्ट प्रबंधन पहलों के माध्यम से इस अभियान का लक्ष्य जनभागीदारी को मजबूत बनाना और स्वच्छता को स्थायी आदत के रूप में अपनाने की प्रेरणा देना था।
स्वच्छ और विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य में योगदान देते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय स्वच्छता, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और सामुदायिक भागीदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
केपी/केसी/आरटी/जेके/एमयू
