विशेष अभियान 6.0 की प्रगति की समीक्षा केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने की। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष के विशेष स्वच्छता अभियान 5.0 की तुलना में इस बार स्वच्छता स्थलों की संख्या, स्क्रैप निपटान से मिले राजस्व और खाली किए गए स्थान के संदर्भ में प्रदर्शन में सुधार हुआ है।
19 अक्टूबर, 2026 तक विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 में 8,34,509 स्वच्छता स्थल शामिल किए जा चुके थे, जबकि 2025 में विशेष अभियान 5.0 के दौरान इसी अवधि में यह संख्या 2,75,432 थी। यानी इसमें 3.03 गुना बढ़ोतरी हुई है। स्क्रैप के निपटान से 491.28 करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 304.72 करोड़ रुपये की तुलना में 1.61 गुना अधिक है। अभियान के दौरान 116 लाख वर्ग फुट स्थान भी खाली किया गया, जबकि विशेष अभियान 5.0 की इसी अवधि में 113.12 लाख वर्ग फुट स्थान खाली हुआ था।
कार्मिक मंत्रालय के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने विशेष अभियान 6.0 के तहत अपने कार्यालय परिसर की एक मंजिल पर 1,200 वर्ग फुट स्थान खाली कराया है। यह कदम दर्शाता है कि अभियान का मुख्य उद्देश्य उपलब्ध कार्यालय स्थान का अधिकतम उपयोग और परिसर का उपयोग कार्यात्मक आवश्यकताओं के अनुरूप सुनिश्चित करना है।
केन्द्रीय मंत्री जी के अनुसार यह अभियान पिछले संस्करणों के अनुभवों पर आधारित है और हर साल प्रदर्शन में सुधार करना इसका लक्ष्य है। फाइलों के निपटान से शुरू हुआ यह अभियान अब धीरे-धीरे इलेक्ट्रॉनिक फाइलों, ई-कचरा प्रबंधन और अप्रचलित सामग्रियों के निपटान तक फैल चुका है। स्क्रैप निपटान से राजस्व की वसूली भी अब इस अभियान का एक अहम हिस्सा बन गई है।
मौजूदा कार्यान्वयन चरण में डॉ. जितेंद्र सिंह ने सचिवों से आग्रह किया है कि वे देशभर के क्षेत्रीय कार्यालयों और प्रतिष्ठानों तक गतिविधियां बढ़ाकर विशेष अभियान 6.0 में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कार्यालयों और प्रतिष्ठानों में एक दिवसीय विशेष अभियान चलाने के महत्व पर जोर दिया, साथ ही स्वच्छता में सुधार और अप्रचलित सामग्रियों के प्रभावी निपटान के लिए लगातार प्रयास जारी रखने को कहा।
लंबित मामलों और जन शिकायतों का निपटारा, दस्तावेजी व इलेक्ट्रॉनिक फाइलों की समीक्षा और कार्यालय की जगह को उत्पादक उपयोग के लिए खाली करना भी इस अभियान के मुख्य उद्देश्यों में शामिल है। ये प्रयास स्वच्छता अभियान के पूरक हैं और इसका दायरा सरकारी कार्यालयों के कामकाज तक बढ़ाते हैं।
प्रमुख योगदानकर्ताओं में स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने 4,15,353 स्वच्छता अभियान स्थलों की रिपोर्ट दी, जबकि रेल मंत्रालय ने 19 अक्टूबर, 2026 तक स्क्रैप निपटान से 425.06 करोड़ रुपये जुटाए।
विशेष अभियान 6 का कार्यान्वयन 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 तक किया जा रहा है। प्रगति समीक्षा में चल रहे अभियान की अब तक की उपलब्धियां दर्ज की गई हैं, और इसका कार्यान्वयन 31 अक्टूबर तक जारी रहेगा।
श्री जितेन्द्र सिंह ने स्वच्छता, अपशिष्ट के जिम्मेदार निपटान और पुनर्चक्रण को लेकर आम जनता में जागरूकता और प्रेरणा बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन के तौर-तरीकों की व्यापक समझ को बढ़ावा देने के लिए ई-कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को प्रोत्साहित करना और अपशिष्ट के पुन: उपयोग व पुनर्चक्रण की प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करना जरूरी है। इनमें प्रयुक्त खाना पकाने के तेल और प्लास्टिक से जुड़े अनुप्रयोग भी शामिल हैं।
बैठक में प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) की सचिव सुश्री निवेदिता शुक्ला वर्मा, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की सचिव सुश्री रचना शाह, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रोफेसर उमेश वी. वाघमारे, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के सचिव डॉ. राजेश सुधीर गोखले व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे, और सरकार के अन्य सचिव वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
डीएआरपीजी के सचिव ने मंत्रालयों, विभागों और उनके क्षेत्रीय प्रतिष्ठानों में विशेष अभियान 6 की प्रगति का ब्योरा पेश किया। डीओपीटी ने बैठक में बताया कि उसने विभाग के लिए इलेक्ट्रिक वाहन अपनाए हैं। यह कदम स्वच्छता और विशेष अभियान 6 के उद्देश्यों में योगदान के लिए उठाया गया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव ने कार्यालय स्थान का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए "उपयोगिता बनाम उपलब्धता" के नजरिए से आकलन के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. जितेंद्र सिंह ने सभी सचिवों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने मंत्रालयों और विभागों में स्थान की समीक्षा करते समय यही दृष्टिकोण अपनाएं और उसका उपयोग वास्तविक कार्यात्मक आवश्यकताओं के अनुरूप रखें। केन्द्रीय मंत्री ने सचिवों से यह भी कहा कि वे सफल पहलों और सर्वोत्तम तौर-तरीकों को डीएआरपीजी तथा अन्य मंत्रालयों और विभागों के साथ साझा करें, ताकि सफल मॉडलों का व्यापक प्रसार और अनुकरण हो सके। इससे अन्य मंत्रालय और विभाग इन अनुभवों से सीखकर, जहां भी प्रासंगिक हो, समान तौर-तरीके अपना सकेंगे। इसका उद्देश्य विशेष अभियान 6 के कार्यान्वयन को और मजबूत करना है।
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