भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (डीआईसी) के डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (डीआईबीडी) ने महाराष्ट्र मंत्रालय में महाराष्ट्र सरकार के भाषा विभाग के सहयोग से एक कार्यशाला का आयोजन किया। इसका उद्देश्य डिजिटल सेवाओं, सरकारी सूचनाओं और नागरिकों के लिए उपयोगी अनुप्रयोगों तक पसंदीदा भाषाओं में पहुंच को मजबूत करने में बहुभाषी और ध्वनि-आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की क्षमता का पता लगाना था।
इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य समावेशी, सुलभ और नागरिक-केंद्रित डिजिटल शासन को सक्षम बनाने में भाषा एआई की भूमिका, विशेष रूप से मराठी और अन्य भारतीय भाषाओं में भाषा प्रौद्योगिकियों को नागरिकों के निकट लाने पर प्रकाश डालना था। इसमें उन डिजिटल प्रणालियों के निर्माण के महत्व पर बल दिया गया जो लोगों द्वारा अपने दैनिक जीवन में उपयोग की जाने वाली भाषाओं को समझ सकें, संसाधित कर सकें और उनमें संवाद कर सकें।
भाषिनी टीम ने वाक् पहचान, वाक्-से-पाठ, पाठ-से-भाषण, अनुवाद और ध्वनि-आधारित अंतःक्रिया के लाइव प्रदर्शनों के माध्यम से अपनी बहुभाषी एआई क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनों से यह स्पष्ट हुआ कि इन प्रौद्योगिकीयों को सार्वजनिक सेवाओं में कैसे एकीकृत किया जा सकता है ताकि नागरिकों और डिजिटल प्रणालियों के बीच अधिक सहज और समावेशी अंतःक्रिया संभव हो सके।
कार्यशाला का मुख्य केंद्र बिंदु स्थानीय प्रासंगिक एआई प्रणालियों के विकास में उच्च गुणवत्ता वाले और प्रतिनिधि भाषा डेटा के महत्व पर था। चर्चाओं में भाषा विशेषज्ञों, सरकारी संस्थानों, शिक्षाविदों और समुदायों की अधिक भागीदारी के अवसरों पर प्रकाश डाला गया ताकि भाषा डेटासेट को मजबूत किया जा सके और मराठी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के लिए भाषा एआई को आगे बढ़ाया जा सके। इस संदर्भ में, भाषिनी की क्राउडसोर्सिंग पहल, भाषादान, नागरिकों को भाषा डेटा का योगदान करने और मजबूत भाषा संसाधन बनाने में मदद करने के लिए एक मंच प्रदान करती है।
इस संवाद में विभाग-विशिष्ट भाषा एआई की संभावनाओं का भी पता लगाया गया, जिसमें सरकारी विभागों में प्रयुक्त विशेष शब्दावली को शामिल करना भी शामिल था। ऐसी क्षमताएं सरकारी कंटेंट की समझ और प्रसंस्करण को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं, साथ ही सार्वजनिक सेवाओं में अधिक प्रभावी बहुभाषी संचार को सक्षम बना सकती हैं।
