केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव ने आज गुजरात के कच्छ जिले के नलिया में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण या सोहन चिडिया) के प्राकृतिक वास केन्द्र का दौरा किया। उन्होंने इस अत्यंत दुर्लभ और विलुप्ति की कगार पर पहुंच गए संकटग्रस्त पक्षी को अधिकतम सुरक्षा प्रदान करने के प्रयासों की समीक्षा की। इन प्रयासों में कच्छ के ग्रेट इंडियन बस्टर्ड क्षेत्र में किए जा रहे व्यापक संरक्षण और पर्यावास प्रबंधन उपायों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
श्री यादव के साथ गुजरात के वन एवं पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अर्जुन मोधवाडिया भी दौरे में उनके साथ थे। इस अवसर पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, गुजरात वन विभाग, भारतीय वन्यजीव संस्थान और सीमा सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय समुदाय के लोग और कच्छ क्षेत्र में वनीकरण, वृक्षारोपण और तटीय आजीविका पहल के लाभार्थी उपस्थित थे।
Visited the Great Indian Bustard Habitat in Naliya, Kutch today. Reviewed the ongoing efforts for providing maximum protection to the Great Indian Bustard (GIB) with special focus on comprehensive conservation and habitat-management measures in the GIB landscape of Kutch. Apart from playing an indispensable role in maintaining a healthy ecosystem, GIB serves as a unique cultural symbol of India's arid heritage. To ensure GIB is protected, India is laying great emphasis on its conservation. Towards that end, today inaugurated the Soft Release Centre for GIB in the facility. The Soft Release Centre is equipped with infrastructure designed to support the conservation, monitoring and gradual adaptation of GIBs to the natural environment.
इस दौरान श्री यादव ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए सॉफ्ट रिलीज़ सेंटर का उद्घाटन किया और वन्यजीव संस्थान, गुजरात वन विभाग तथा प्रजाति के संरक्षण में लगे अन्य हितधारकों के अधिकारियों से बातचीत की। सॉफ्ट रिलीज सेंटर अत्यंत संकटग्रस्त ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) पक्षी के संरक्षण और उन्हें वापस जंगलों में सुरक्षित रूप से छोड़ने के लिए बनाई गई एक विशेष सुविधा है। श्री यादव ने इसके बाद 'खटाला सभा' (सामाजिक संवाद का एक पारंपरिक तरीका) में जन प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड प्रजातियों के संरक्षण पहल आगे बढ़ाने में उनसे निरंतर सहयोग का आग्रह किया।
