प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 'पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन का भविष्य' का उद्घाटन किया। उद्घाटन सत्र में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, भारत के महान्यायवादी श्री आर. वेंकटरामानी, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रकृति के साथ राष्ट्र के गहरे ऐतिहासिक जुड़ाव के बारे में बताते हुए इस बात पर बल दिया कि किस प्रकार प्राचीन सांस्कृतिक ज्ञान आधुनिक जलवायु समाधानों में सहायक है और वैश्विक सामूहिक कार्रवाई को प्रेरित कर रहा है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण मिशन को दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण की सराहना की और आयोजकों को बधाई दी।
(लिंक: https://www.pib.gov.in/PressReleaseDetail.aspx?PRID=2312353®=48&lang=1 )
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने उद्घाटन भाषण में भारत के दीर्घकालिक पर्यावरण न्यायशास्त्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने दशकों से प्रदूषण मुक्त पर्यावरण के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी है और एहतियाती सिद्धांत, प्रदूषक भुगतान सिद्धांत, पूर्ण दायित्व और सार्वजनिक विश्वास सिद्धांत जैसे सिद्धांत विकसित किए है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारतीय जलवायु न्यायशास्त्र ने जलवायु संबंधी अधिकारों को संवैधानिक रूप से अधिक स्पष्ट किया है, यह मानते हुए कि जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव समानता, आजीविका और स्वास्थ्य से संबंधित मौलिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने वैश्विक पर्यावरण प्रबंधन को मजबूत करने के लिए सामूहिक न्यायिक बुद्धिमत्ता, वैज्ञानिक ज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया।
श्री भूपेंद्र यादव ने उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के बारे में बताया कि गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोत अब स्थापित विद्युत क्षमता का 54.18 प्रतिशत हिस्सा हैं। यह 2030 के 50 प्रतिशत के लक्ष्य को निर्धारित समय से नौ वर्ष पहले ही पार कर चुका है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है और सौर ऊर्जा के विकास के मामले में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है जो दर्शाता है कि आर्थिक विकास और जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
