उपाध्यक्ष श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में उद्घाटन भाषण दिया, जिसका आयोजन ‘फ्लक्स के युग में लचीलापन’ विषय पर आयोजित किया गया। नीति निर्माताओं,अर्थशास्त्रियों, शिक्षाविदों, व्यापार जगत के नेताओं और अन्य विशिष्ट प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, उन्होंने तेजी से वैश्विक परिवर्तनों के बीच लचीला, समावेशी और उत्तरदायी आर्थिक नीतियों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
Vice President Shri C. P. Radhakrishnan delivered the inaugural address at the 5th Kautilya Economic Conclave in New Delhi, organised on the theme “Resilience in an Age of Flux.” He emphasised that economic resilience cannot be separated from social resilience, and that… pic.twitter.com/KWuGXK1apZ
इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ (आईईजी) की विरासत का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि संस्थान 1952 में प्रोफेसर वी. के. आर. वी. राव के नेतृत्व में अपनी स्थापना के बाद से भारत की विकास यात्रा के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ठोस नीति निर्माण को जमीनी वास्तविकताओं की समझ पर आधारित होना चाहिए, जिसमें नीतियां बदलती परिस्थितियों के प्रति लचीली और उत्तरदायी बनी रहें।
श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि परिवर्तन के समय में, निर्णायकता को आम सहमति में अंतर्निहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहस और चर्चा लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं, लेकिन अंततः उन्हें ऐसे निर्णयों की ओर ले जाना चाहिए जिनकी व्यापक स्वीकृति हो। राज्यसभा के सभापति के रूप में, उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और पारदर्शी बहस लोकतंत्र को मजबूत करती है, जबकि अधिकारों और कर्तव्यों को साथ-साथ चलना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने प्रदर्शित किया है कि लोकतंत्र और विकास एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। भारत की आर्थिक वृद्धि और समावेशी प्रगति एक लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर हासिल की गई है, जबकि आम सहमति निर्माण ने आर्थिक सुधारों को अधिक स्थायित्व और स्थिरता प्रदान की है। उन्होंने कहा कि यह अनुभव 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
इस बात पर जोर देते हुए कि आर्थिक लचीलेपन को सामाजिक लचीलेपन से अलग नहीं किया जा सकता है, उपराष्ट्रपति ने वित्तीय समावेशन, पारदर्शिता और औपचारिकता को मजबूत करने में जेएएम ट्रिनिटी, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और जीएसटी की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अगस्त 2026 तक 590 मिलियन से अधिक जन धन खाते खोले जा चुके हैं, जबकि जीएसटी पंजीकरण 2017 में लगभग 6.65 मिलियन से बढ़कर मई 2026 में 16.5 मिलियन हो गया है।
