कॉर्पोरेट कार्य और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के 10वें स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम 1 अक्टूबर 2016 को आईबीबीआई की स्थापना के बाद से इसके दस वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।
मुख्य अतिथि श्री हर्ष मल्होत्रा ने उद्घाटन भाषण में कहा कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (आईबीसी) ने क्रेडिट अनुशासन को मजबूत किया है, वसूली के माहौल को बेहतर बनाया है और देश में व्यापार करने में आसानी (ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस) में योगदान दिया है। उन्होंने उभरती जरूरतों के अनुसार इस संहिता को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का ज़िक्र किया, जिसमें हाल के विधायी संशोधन भी शामिल हैं। इसके साथ ही, उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से आगामी दशक में तेजी से और मूल्य-अधिकतम करने वाले समाधानों की दिशा में काम करने का आग्रह किया।
राज्य मंत्री श्री मल्होत्रा ने आईबीसी इकोसिस्टम में एआई सहित उभरती प्रौद्योगिकियों को बेहतर ढंग से अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आगे बढ़ने के लिए तेजी से समाधान और मूल्य को अधिकतम करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण के माननीय अध्यक्ष, जस्टिस श्री अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल ने आईबीसी ढांचे में निर्णायक प्राधिकरण की भूमिका की जानकारी दी। उन्होंने मामलों के निपटारे में देरी को कम करने के लिए उठाए जा रहे कदमों और समाधान योजनाओं के तेजी से निपटारे में हाल के सुधारों का जिक्र किया। उन्होंने प्रवेश सीमा में संशोधन, मध्यस्थता का उपयोग, क्षेत्र-विशिष्ट छूट आदि जैसे सुधार के उन विभिन्न क्षेत्रों पर भी बात की जिन पर आने वाले समय में विचार किया जा सकता है।
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील न्यायाधिकरण के माननीय सदस्य, श्री इंदेवर पांडे ने पिछले दशक में दिवाला (इनसॉल्वेंसी) से जुड़े कानूनों के विकास और आने वाले समय में जिन मुद्दों पर विचार किया जा सकता है, उन पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों में आईबीसी कोड में सात बार संशोधन किए गए हैं। कानूनों में बदलाव से जुड़ी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने इस बात की सराहना की कि संहिता और नियमों में बदलाव समय पर और उभरती ज़रूरतों के अनुसार किए जा रहे हैं। आईबीसी के सकारात्मक परिणामों का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सभी संबंधित पक्षों को तय समय-सीमा का पालन करना चाहिए।
