राष्ट्रीय कौशल विकास निगम ने मुंबई में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के सोशल स्टॉक एक्सचेंज मंच पर अपनी शुरुआत की है। इस अवसर पर कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने घंटी बजाने के समारोह में भाग लिया। पहल का उद्देश्य कौशल प्रशिक्षण और विदेश में रोजगार की तैयारी के लिए सरकारी सहायता, सामाजिक निवेश और प्रशिक्षण संस्थाओं को एक साथ लाना है।
एनएसडीसी के पहले जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल निर्गम में नाबार्ड ने 4 करोड़ रुपये का निवेश किया। इससे जुड़ा कार्यक्रम मध्य प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी परिवारों के 600 युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार के लिए तैयार करेगा। यह कौशल और नियुक्ति परिणामों से जुड़ी एक लक्षित पहल है, जिसके तहत प्रतिभागियों की तैयारी और प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाएगा।
समारोह में मध्य प्रदेश की मंत्री कृष्णा गौर, महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा और अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा वर्मा उपस्थित रहे। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव मनीषा सेनशर्मा, एनएसई के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ आशीषकुमार चौहान, एनएसडीसी के सीईओ अरुणकुमार पिल्लई, नाबार्ड अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी. और डीसीएम श्रीराम इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक आलोक श्रीराम भी शामिल हुए। सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम में प्रशिक्षण, आजीविका और वैश्विक रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए विभिन्न संस्थाओं के सहयोग की भूमिका सामने रखी गई।
जयंत चौधरी ने कहा कि आर्थिक विकास के साथ लोगों की क्षमताओं में निवेश आवश्यक है। उनके अनुसार, सरकार अनुकूल व्यवस्था बना सकती है, लेकिन बड़े स्तर पर विकास का वित्तपोषण करने के लिए सार्वजनिक संस्थाओं, निजी वित्तपोषकों और दानदाताओं का सहयोग चाहिए। उन्होंने सोशल स्टॉक एक्सचेंज को विश्वसनीय परियोजनाओं, पारदर्शिता और सत्यापित परिणामों से सहयोगकर्ताओं को जोड़ने वाला मंच बताया। उन्होंने एनएसडीसी, नाबार्ड, एनएसई, मध्य प्रदेश सरकार और अन्य साझेदारों के योगदान की सराहना की।
कृष्णा गौर ने कहा कि आर्थिक और सामाजिक बाधाओं का सामना करने वाले पिछड़ा वर्ग के युवाओं तक गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण तथा रोजगार के अवसर पहुंचाना राज्य की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि साझेदारी से मध्य प्रदेश के 600 युवा जापान और जर्मनी में काम करने के लिए उपयोगी कौशल सीख सकेंगे। उन्होंने सफल नियुक्ति से सरकारी वित्तपोषण को जोड़ने वाले मॉडल का समर्थन किया और इसे भागीदार परिवारों की आर्थिक स्वतंत्रता तथा आजीविका बेहतर करने का संभावित माध्यम बताया।
लागत और परिणाम आधारित वित्तपोषण
कार्यक्रम का अनुमानित परिव्यय 11.25 करोड़ रुपये है। इसकी मिश्रित वित्तीय व्यवस्था में 15 प्रतिशत लागत लाभार्थियों की भागीदारी से आएगी। 35 प्रतिशत राशि सोशल स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से जुटाई जाएगी। शेष 50 प्रतिशत योगदान मध्य प्रदेश सरकार उम्मीदवारों के सफल अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट के बाद देगी। इस प्रकार राज्य का हिस्सा रोजगार के मापने योग्य परिणाम से जुड़ा है।
परिणाम से जुड़े इस हिस्से के लिए एनएसडीसी और मध्य प्रदेश सरकार के बीच द्विपक्षीय सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड व्यवस्था बनाई गई है। इसका लक्ष्य सार्वजनिक खर्च को रोजगार उपलब्ध कराने के परिणामों से जोड़ना है। राज्य सरकार उम्मीदवारों को कार्यक्रम से जोड़ने, आवासीय प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने और भाषा प्रयोगशालाओं के लिए भी सहायता देगी।
जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल व्यवस्था पात्र सामाजिक उद्देश्य वाली संस्थाओं को सामान्य ब्याज भुगतान या मूलधन लौटाने की बाध्यता के बिना संसाधन जुटाने देती है। घोषित मॉडल में राशि के पारदर्शी उपयोग और सामाजिक परिणामों की रिपोर्टिंग को महत्व दिया गया है।
मनीषा सेनशर्मा ने पहल की वित्तीय संरचना और जवाबदेही व्यवस्था को सार्वजनिक नीति के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्पष्ट विकास परिणामों के लिए सरकारी संसाधनों को संस्थागत और सामाजिक निवेश के साथ जोड़ा जा सकता है। मंत्रालय ने मजबूत संचालन, पारदर्शी रिपोर्टिंग और मापने योग्य परिणामों के साथ नए वित्तीय साधन अपनाने के एनएसडीसी के प्रयास का स्वागत किया। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम से मिले अनुभव भविष्य की रोजगार केंद्रित कौशल पहलों को तैयार करने और विस्तार देने में उपयोगी हो सकते हैं।
साझेदार संस्थाओं और प्रशिक्षण की भूमिका
नाबार्ड की भागीदारी ग्रामीण विकास वित्त को विदेशी रोजगार की तैयारी से जोड़ती है। पहल का लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवारों के लिए बेहतर आय क्षमता, घरेलू बचत और लंबे समय तक उपयोगी आजीविका के अवसर बढ़ाना है। ये कार्यक्रम के उद्देश्य हैं; वास्तविक परिणाम प्रशिक्षण, नियुक्ति और रोजगार की शर्तों पर निर्भर करेंगे।
नाबार्ड अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने कहा कि निवेश विकास वित्त के नए मॉडल आजमाने की संस्था की प्रतिबद्धता दिखाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे दूसरे संस्थागत और निजी सहयोगकर्ता भी आगे आएंगे। उनके अनुसार, वित्तपोषण की सफलता का आकलन केवल जुटाई गई पूंजी से नहीं, बल्कि उससे बने अवसरों, स्थायी आजीविका और लोगों के जीवन में आए सुधार से होना चाहिए।
अरुणकुमार पिल्लई ने सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर शुरुआत को कौशल विकास और रोजगार से जुड़े कार्यक्रमों के लिए वित्त के स्रोत बढ़ाने की दिशा में कदम बताया। उन्होंने नाबार्ड, एनएसई, मध्य प्रदेश सरकार और अन्य साझेदारों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि आगे ध्यान प्रभावी क्रियान्वयन, सत्यापित परिणामों और ऐसे कार्यक्रमों का समूह बनाने पर होगा, जिससे सामाजिक वित्तपोषण में व्यापक भागीदारी आकर्षित की जा सके।
योजना में 300 उम्मीदवारों को जापान और 300 को जर्मनी के रोजगार अवसरों के लिए तैयार करने का प्रावधान है। प्रशिक्षण एनएसडीसी की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी एनएसडीसी इंटरनेशनल लिमिटेड देगी। आवासीय कार्यक्रम में विदेशी भाषा और रोजगार संबंधी तैयारी शामिल होगी। देखभाल सेवाओं, आतिथ्य, निर्माण और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों के लिए गंतव्य देश की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित किए जाएंगे।
सफल नियुक्ति पाने वाले उम्मीदवारों के लिए जापान में लगभग 1-1.2 लाख और जर्मनी में 1.1-3.2 लाख रुपये मासिक आय के संकेतात्मक अनुमान दिए गए हैं। भूमिका और रोजगार की शर्तों के अनुसार आय बदल सकती है। इसलिए इन आंकड़ों को हर प्रतिभागी के लिए निश्चित वेतन का आश्वासन नहीं माना जाना चाहिए।
एनएसडीसी इस पहल को कौशल विकास में सरकारी निवेश के साथ सामाजिक निवेश जोड़ने की अपनी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानता है। रोजगार के परिणाम से जुड़े सार्वजनिक वित्तपोषण और सामाजिक निवेश का मेल ऐसा ढांचा बनाने के लिए किया जा रहा है, जिसे आगे दूसरे कार्यक्रमों में भी अपनाया जा सके। इसका उद्देश्य रोजगार क्षमता, वैश्विक कार्य अवसरों तक पहुंच और आजीविका में सुधार को साथ लेकर चलना है।
एनएसडीसी के बारे में
राष्ट्रीय कौशल विकास निगम भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के तत्वावधान में काम करता है। उद्योगों के साथ साझेदारी, व्यावसायिक प्रशिक्षण और वित्तपोषण की पहल के माध्यम से संस्था युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने तथा टिकाऊ आजीविका के अवसर विकसित करने का प्रयास करती है।
स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय।
