केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज समुद्रतटीय पारिस्थितिकी, सुरक्षा और स्थिरता (सीसेस) 2026 पर राष्ट्रीय सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि भारत की तटरेखा को पारिस्थितिकी, अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और मानव विकास के परस्पर जुड़े स्थान के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की 11,000-12,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा समुद्री संसाधनों और "नीली अर्थव्यवस्था" के लिए महत्वपूर्ण संभावना है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश की लंबी तटरेखा और व्यापक समुद्री इकोसिस्टम महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं, साथ ही वैज्ञानिक ज्ञान, पर्यावरणीय स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक विकास के संयोजन के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण की भी आवश्यकता होती है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के पास 11,000-12,000 किलोमीटर लंबा तटीय क्षेत्र है, जो दुनिया में सबसे लंबा है। उन्होंने देश के भविष्य के विकास में महासागर और तटीय क्षेत्रों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महासागर के साथ भारत का ऐतिहासिक जुड़ाव भी अपने पूर्वजों के समुद्री पर्यावरण के ज्ञान और समझ को दर्शाता है।
डीप ओशन मिशन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत स्वदेशी क्षमताओं का निर्माण करने के साथ-साथ गहरे समुद्र के बड़े पैमाने पर अज्ञात संसाधनों की खोज की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में एक पूरी तरह से स्वदेशी अनुसंधान पोत, ओआरवी सागर मंथन लॉन्च किया गया था, जो गहरे समुद्र के संदर्भ में अनुसंधान और अन्वेषण को लेकर आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयासों को दर्शाता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि समुद्र की गहराई का पता लगाने के लिए रोबोट और सबमर्सिबल विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने गहरे समुद्र में अन्वेषण के लिए भारत की क्षमता बढ़ाने के प्रयासों के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में देश की प्रगति समुद्री संसाधनों को समझने और उपयोग करने के लिए नई संभावनाएं खोलेगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने गहरे समुद्र में खोज को भारत के उभरते आर्थिक अवसरों से जोड़ते हुए कहा कि अगर देश को अपनी अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है, तो उसे उन संसाधनों की ओर देखना होगा जिनका अभी तक पूरी तरह से पता नहीं लगाया गया है। उन्होंने धातु, खनिज और मत्स्य पालन सहित समुद्री और तटीय संसाधनों को महत्वपूर्ण संभावना वाले क्षेत्र बताए।
