केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के माध्यम से किश्तवाड़ के उच्च भूकंपीय क्षेत्र में नई भूकंपीय वेधशाला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने वर्ष 2014 के बाद जम्मू-कश्मीर में, विशेष रूप से पूर्ववर्ती डोडा जिले में, मौसम विज्ञान और मौसम निगरानी संबंधी अवसंरचना के उल्लेखनीय विस्तार को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पिछले साल चसोती में बादल फटने की घटना से उत्पन्न आपदा के बाद इस क्षेत्र में अतिरिक्त उपकरण और सुविधाएं स्थापित की गई हैं।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इस क्षेत्र में मौसम निगरानी नेटवर्क को मजबूत किया है, जो वर्ष 2014 में यहां एक भी डॉपलर मौसम रडार नहीं था, जबकि पिछले 12 वर्षों में चार रडार स्थापित किए गए है और चार स्थापित किए जा रहे हैं। इनसे इनकी कुल संख्या 8 हो जाएगी। इसी प्रकार स्वचालित मौसम संबंधी केन्द्रों की संख्या 3 से बढ़कर 12 हो गई है। इनमें किश्तवाड़ में 4 तथा डोडा और रामबन में 2-2 केन्द्र शामिल हैं।
केन्द्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला, वरिष्ठ वैज्ञानिक सुरेश और अन्य इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विशेष रूप से दिल्ली से आए थे।
पद्दर-नागसेनी विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता श्री सुनील शर्मा और किश्तवाड़ विधानसभा क्षेत्र की विधायक सुश्री शगुन परिहार ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज शर्मा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सनी गुप्ता सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
श्री सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक एवं मौसम निगरानी बुनियादी ढांचे के विस्तार से इस क्षेत्र की अपदा संबंधी तैयारियों को भी मजबूती मिली है। ये क्षेत्र भूकंप, भूस्खलन और मौसम से जुड़ी अन्य चुनौतियों के प्रति संवेदनशील है।
किश्तवाड़ में नई वेधशाला अत्याधुनिक डिजिटल भूकंपीय उपकरणों से सुसज्जित है। ये वास्तविक समय में आंकड़े नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के चौबीस घंटे सक्रिय भूकंप निगरानी केंद्र को भेजेगी। इस नई सुविधा की स्थापना के साथ जम्मू-कश्मीर में अब चार भूकंप वेधशालाएं हो गई हैं। इनमें जम्मू, श्रीनगर, उधमपुर और किश्तवाड़ की वेधाशालाएं शामिल हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ये वेधशाला क्षेत्र में भूकंप संबंधी गतिविधियों की निरंतर निगरानी करेगी और यहां मौजूद भूकंपीय खतरों को बेहतर ढंग से समझने में योगदान देगी। इससे प्राप्त जानकारी जिला प्रशासन और बचाव दलों को अधिक प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने में सहायता करेगी। साथ ही यह अधिक सुरक्षित अवसंरचना की योजना बनाने में भी उपयोगी होगी।
वर्ष 2014 के बाद से मौसम संबंधी अवसंरचना में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पहले इस क्षेत्र में कोई डॉपलर मौसम रडार की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। वर्ष 2014 के बाद बनिहाल, जोत, जम्मू और श्रीनगर में चार डॉपलर मौसम रडार स्थापित किए गए हैं। इससे मौसम की निगरानी करने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने आगे बताया कि वर्ष 2027 में डोडा, किश्तवाड़, अनंतनाग और बारामूला में चार और डॉपलर मौसम रडार चालू किए जाने हैं। इससे मौसम की निगरानी और सुदृढ़ होगी तथा पूरे क्षेत्र में इसकी पहुंच का विस्तार होगा।
मंत्री महोदय ने स्वचालित मौसम केन्द्रों के नेटवर्क में हुए उल्लेखनीय विस्तार को भी रेखांकित किया। पहले उधमपुर, कठुआ और रामबन में तीन स्वचालित मौसम केन्द्र थे। इनके अतिरिक्त नौ और केन्द्र स्थापित किए गए है, जिससे इनकी कुल संख्या बढ़कर 12 हो गई है। इनमें किश्तवाड़ में चार, डोडा और रामबन में दो-दो और कठुआ में एक केन्द्र शामिल है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक अवसंरचना के विस्तार का मार्गदर्शन इस क्षेत्र की आवश्यकताओं और भौगोलिक संवदेनशीलताओं को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सीमाएं बदल सकती हैं, लेकिन भौगोलिक चुनौतियां बनी रहती हैं। इससे संवेदनशील क्षेत्रों में मौसम निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना आवश्यक है।
वर्षा निगरानी नेटवर्क का भी विस्तार किया गया है, संसदीय निवार्चन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पांच जिलों में वर्षामापी केन्द्रों की संख्या नौ से बढ़ाकर 15 कर दी गई है। ये केन्द्र नियमित रूप से वर्षा संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराते है और स्थानीय स्तर पर मौसम की निगरानी को सुदृढ़ बनाते हैं।
मौसम संबंधी सेवाओं और कृषि-मौसम विज्ञान सेवाओं की पहुंच का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि अब पांच जिलों की सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत स्तर पर मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराए जा रहे है। मौसम पूर्वानुमान और कृषि मौसम विज्ञान संबंधी परामर्श सेवाओं का लाभ 5,467 लाभार्थियों तक पहुंचा हैं, जिससे मौसम संबंधी जानकारी तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित हुई है।
मंत्री महोदय ने क्षेत्र में विशेषीकृत मौसम विज्ञान संबंधी सुविधाओं को मजबूत किए जाने का भी उल्लेख किया। इनमें जम्मू-कश्मीर के पटनीटॉप स्थित हाई-एल्टीट्यूड क्लाउड भौतिकी प्रयोगशाला शामिल है। जम्मू में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना के माध्यम से भी मौसम संबंधी अवसंरचना को भी सुदृढ़ किया गया है, ताकि मौसम संबंधी सेवाएं और पूर्व चेतावनियां उपलब्ध कराई जा सकें।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मौसम संबंधी जानकारी समय पर उपलब्ध होने से स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की तैयारियों में ठोस सुधार हुआ है। हाल के अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मौसम की अग्रिम जानकारी से जिला प्रशासन को गतिविधियों की योजना बनाने और उनका प्रबंधन अधिक सुगमता से करने में सहायता मिली है।
जनता के सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि मौसम संबंधी वैज्ञानिक चेतावनियां तभी जीवन बचा सकती हैं, जब उन्हें गंभीरता से लिया जाए और उनके अनुरूप कार्रवाई की जाए। उन्होंने एक अवसर का उल्लेख किया, जब मौसम संबंधी चेतावनी के बाद यातायात पर प्रतिबंध लगाए गए थे। इसके बाद राजमार्ग को हुए नुकसान ने समय पर जारी चेतावनियों का पालन करने के महत्व को स्पष्ट किया।
उन्होंने जोर देकर कहा, "जानकारी महत्वपूर्ण है, लेकिन उस जानकारी के अनुसार कार्रवाई करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।" उन्होंने नागरिकों से मौसम संबंधी चेतावनियों और परामर्शों के दौरान प्रशासन के साथ सहयोग करने का आह्वान किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपुष्ट और भय फैलाने वाली सूचनाओं का मुकाबला वैज्ञानिक तथा साक्ष्य-आधारित संचार के माध्यम से करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि मौसम संबंधी जानकारी और पूर्वानुमानों को वैज्ञानिक मूल्यांकन तथा विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समझा जाना चाहिए।
प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया की सकारात्मक संभावनाओं को रेखांकित करते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि डिजिटल जानकारी और नए प्लेटफार्मों तक पहुंच ने युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। इनमें दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले युवा भी शामिल हैं। उन्होंने युवाओं से उपलब्ध अवसरों और सुविधाओं का रचनात्मक उपयोग करने का आग्रह किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस क्षेत्र में व्यापक स्तर पर हो रहे बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बेहतर सम्पर्क सुविधाओं और किश्तवाड़ के एक प्रमुख विद्युत केन्द्र के रूप में विकसित होने की चर्चा करते हुए कहा कि यहां के लोगों की सुरक्षा और कल्याण में सुधार के प्रयासों के साथ-साथ क्षेत्र की वैज्ञानिक क्षमताओं और अवसंरचनाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
पीके/केसी/आरटी/आईएम/जीआरएस
