गुवाहाटी में शिल्प समागम मेला 2026 शुरू हुआ है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का आठ दिवसीय आयोजन 28 अक्टूबर तक चलेगा और पारंपरिक उत्पाद बनाने वालों को प्रदर्शन तथा बिक्री का अवसर देगा।
मंत्रालय के अनुसार खानापारा के फार्म गेट पर दर्शक सुबह 11 से रात 9 बजे तक आ सकते हैं। यहां उत्पाद देखकर सीधे खरीदारी करने और कारीगरों के काम को समर्थन देने का अवसर है।
पूर्वोत्तर के साथ देश के विभिन्न हिस्सों के शिल्पकार मेले में शामिल हैं। उनके हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पाद क्षेत्रीय परंपराओं, स्थानीय कौशल और सांस्कृतिक विविधता को एक जगह प्रस्तुत करते हैं।
भागीदारी में 75 कारीगर हैं, जिनमें 31 महिलाएं हैं। करीब 40 प्रकार के हथकरघा तथा हस्तशिल्प उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
सीधे ग्राहक संपर्क इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है। कारीगर बिक्री के अलावा संभावित खरीदारों से संबंध बना सकते हैं और बाजार विस्तार के अवसर तलाश सकते हैं। मंत्रालय का प्रयास है कि यह संपर्क उद्यमिता तथा आजीविका को समर्थन दे और निर्माता अपने उत्पादों के लिए व्यापक ग्राहक आधार तक पहुंच सकें।
गुवाहाटी संस्करण में पूर्वोत्तर की शिल्प परंपराएं राष्ट्रीय स्तर की विविध कलाओं के साथ दिखाई गई हैं। आगंतुकों को अलग क्षेत्रों की रचनात्मकता और उनके पीछे के हुनर को समझने का अवसर मिलता है। आयोजक चाहते हैं कि पारंपरिक ज्ञान तथा कला को जीवित रखने वाले कारीगरों के काम के प्रति लोगों की सराहना बढ़े।
भारत-तुलिप कार्यक्रम को भी मेले में प्रमुखता दी गई है। यह लक्षित समुदायों के उत्पादों के लिए भौतिक बिक्री केंद्रों और ई-कॉमर्स माध्यमों तक पहुंच में मदद करता है। डिजिटल तथा अन्य बाजार संपर्क से ग्राहक आधार बढ़ाने और बेहतर कमाई के अवसर बनाने का उद्देश्य है। बदलते उपभोक्ता बाजार से पारंपरिक उत्पादों का जुड़ाव कला के संरक्षण और प्रचार को भी समर्थन दे सकता है।
शिल्प समागम 2026 मंत्रालय के तीन राष्ट्रीय निगमों से जुड़े कारीगरों के विपणन सहयोग की पहल है। इनमें अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम, सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम और पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के लाभार्थी शामिल हैं।
वर्ष 2026 का पहला आयोजन मैसूरु में 19 अक्टूबर को समाप्त हुआ था। दशहरा प्रदर्शनी मैदान के उस नौ दिवसीय मेले में हजारों लोग पहुंचे।
अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सफाई मित्र और विमुक्त जनजातियों के कारीगर इस सशक्तिकरण प्रयास के केंद्र में हैं। सबका साथ, सबका विकास के दृष्टिकोण से जुड़ा मंच उन्हें कौशल दिखाने और उत्पाद बेचने का स्थान देता है। लक्ष्य टिकाऊ आजीविका से आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत करना है।
मेले में मंत्रालय और राष्ट्रीय निगमों की कल्याणकारी, वित्तीय तथा विकास योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी। बाजार तक पहुंच को ऐसी सहायता के साथ जोड़कर कारीगरों के लिए व्यावहारिक आय अवसर बनाने का प्रयास है। इससे पारंपरिक हुनर का उपयोग आगे बढ़ते उद्यमों में हो सकेगा।
मंत्रालय इन गतिविधियों को आर्थिक कठिनाइयों वाले समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास का हिस्सा बताता है। उद्यमिता, बाजार संपर्क और टिकाऊ आजीविका इसके परस्पर जुड़े उद्देश्य हैं।
आयोजकों को उम्मीद है कि मेला कारीगरों की पहचान और उनके उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा। सीधे संवाद से हथकरघा तथा हस्तशिल्प परंपराओं में जनता की रुचि मजबूत करने का लक्ष्य है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की आयोजन संबंधी जानकारी।
