कर्नाटक के मैसूरु के दशहरा प्रदर्शनी मैदान में आयोजित नौ दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 हजारों आगंतुकों की भागीदारी के साथ समाप्त हुआ। इसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने आयोजित किया था।
इस आयोजन में अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और सफाई कर्मचारी समुदायों के कारीगरों को हस्तशिल्प तथा हथकरघा सामान बेचने का मंच मिला। मंत्रालय के तीन निगमों—एनएसएफडीसी, एनबीसीएफडीसी और एनएसकेएफडीसी—से जुड़े लाभार्थियों ने भी इसमें भाग लिया।
एनबीसीएफडीसी के उप महाप्रबंधक रजनीश बैंकर ने बताया कि मेले से पारंपरिक कला को नए खरीदारों तक पहुंचाने और कारीगरों के टिकाऊ रोजगार के अवसर बढ़ाने का प्रयास किया गया।
मंत्रालय 2022 से इस शृंखला का आयोजन करता आ रहा है। अधिकारी के अनुसार, अभी तक 13 मेलों से 975 कारीगरों को लाभ मिला है।
मैसूरु का आयोजन वित्त वर्ष 2026–27 का पहला शिल्प समागम मेला था।
परिसर में 83 स्टॉल बनाए गए, जिनमें 80 कारीगरों के लिए निर्धारित थे। भाग लेने वालों में 37 महिला कारीगर भी थीं। आगंतुकों के लिए पारंपरिक खाद्य पदार्थों के स्टॉल लगाए गए।
इस प्रदर्शनी में 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के कलाकार आए। इनमें राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, पुडुचेरी, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश शामिल थे।
दर्शकों को हथकरघा और कांजीवरम साड़ियों से लेकर लकड़ी के खिलौनों, टेराकोटा, मसालों, अचार, शहद, अगरबत्ती, ब्लॉक प्रिंट वस्तुओं, चमड़े के सामान, कृत्रिम आभूषणों तथा घर सजावट के उत्पादों तक कई प्रकार के सामान देखने को मिले।
कारीगरों को सीधे ग्राहकों से बातचीत और बिक्री का अवसर मिला। इस तरह का मंच उनके उत्पादों की पहचान बढ़ाने के साथ भारतीय हस्तकला परंपराओं को भी प्रोत्साहित कर सकता है।
मेले में सामाजिक न्याय मंत्रालय तथा एनएसएफडीसी, एनबीसीएफडीसी और एनएसकेएफडीसी की योजनाओं और लाभार्थियों को मिलने वाली सहायता की जानकारी भी दी गई। उद्देश्य पात्र व्यक्तियों को व्यावसायिक तथा विकास संबंधी अवसरों के बारे में जागरूक करना था।
मंत्रालय का भारत ट्यूलिप कार्यक्रम लक्षित समुदायों के शिल्प उत्पादों को भारतीय और विदेशी डिजिटल बाजारों तक पहुंचाने की पहल है। इसके तहत उत्पादों को 'भारत ट्यूलिप' नाम से प्रस्तुत कर उनकी ऑनलाइन बिक्री को बढ़ावा देने का प्रयास है।
भागीदारी आसान बनाने के लिए मंत्रालय निःशुल्क स्टॉल और यात्रा, दैनिक भत्ता, सामान ढुलाई तथा भोजन समेत आवश्यक सहायता देता है। इससे कारीगरों को आयोजन से जुड़े कुछ प्रमुख खर्च स्वयं नहीं उठाने पड़ते।
केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने मेले का दौरा कर सामाजिक रूप से कमजोर समुदायों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर केंद्र सरकार के जोर का उल्लेख किया।
उन्होंने विभिन्न हस्तशिल्प, कपड़ा, खाद्य एवं सजावटी सामान के स्टॉलों के साथ पारंपरिक भोजन विक्रेताओं का भी निरीक्षण किया और कारीगरों के उत्पाद देखे।
मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत भी शिल्प समागम मेले में पहुंचे।
मैसूरु के दशहरा प्रदर्शनी मैदान में सचिव ने स्टॉल प्रबंधकों और आगंतुकों से बातचीत की तथा प्रदर्शित उत्पादों का अवलोकन किया।
सुधांश पंत मैसूरु के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर थे। इस दौरान उन्हें राज्य समाज कल्याण विभाग के साथ मंत्रालय की योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करनी थी।
उन्होंने कहा कि मेले जैसे प्रयास कारीगरों को बाजार से जोड़ने, उद्यमिता बढ़ाने और वंचित समुदायों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायक हैं।
दर्शकों को अलग-अलग क्षेत्रों के पारंपरिक उत्पाद देखने के साथ सीधे कारीगरों से खरीदारी करने का भी अवसर मिला।
वित्त वर्ष 2026–27 में मंत्रालय गुवाहाटी, दिल्ली हाट, जोधपुर तथा लखनऊ में भी शिल्प समागम आयोजित करने की योजना रखता है।
आगामी कार्यक्रमों में नई दिल्ली के भारत मंडपम में 14 से 27 नवंबर 2026 तक भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला 2026 और फरवरी 2027 में फरीदाबाद का सूरजकुंड मेला शामिल हैं।
मंत्रालय के अनुसार, शिल्प समागम और भारत ट्यूलिप जैसी योजनाएं छोटे कारीगरों के लिए बाजार पहुंच, आजीविका और पारंपरिक कला के संरक्षण को साथ लेकर चलती हैं।
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