स्वच्छता सेवाओं में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक मशीनों के लिए वित्तीय सहयोग मिलने से सफाई कर्मियों के सामने रोजगार और नियमित आय के नए रास्ते खुल सकते हैं।
आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में टी. रवि कुमार, पी. शेखर, टी. निखिल और ई. ऐलैया ने मिलकर मशीन आधारित स्वच्छता सेवा का काम शुरू किया। उनका अनुभव बताता है कि सामूहिक पहल से उपकरणों पर लगने वाला भारी खर्च साझा किया जा सकता है और कार्य स्थितियां बेहतर बनाई जा सकती हैं।
ये चारों पहले से सफाई कार्य से जुड़े थे और अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारना चाहते थे। सीवर तथा सेप्टिक टैंक की मशीनीकृत सफाई उनके लिए संभावित व्यवसाय था, लेकिन मशीन खरीदने के लिए पर्याप्त धन नहीं था। व्यक्तिगत स्तर पर ऋण और महंगे उपकरण जुटाने की कठिनाई के कारण वे इस दिशा में आगे नहीं बढ़ पा रहे थे।
नेल्लोर नगर निगम के जागरूकता शिविर में उन्हें नमस्ते योजना के अंतर्गत स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई) की जानकारी मिली। इसके बाद चारों ने एक समूह के तौर पर सेवा शुरू करने की योजना बनाई। बैंक से ऋण और पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध होने पर वे सीवर एवं सेप्टिक टैंक की मशीन से सफाई के लिए मिनी जेटिंग मशीन खरीद सके।
इस समूह की परियोजना पर कुल 35.85 लाख रुपये का खर्च आया। राशि जुटाने में 21.89 लाख रुपये के बैंक ऋण और 13.96 लाख रुपये की पूंजी सब्सिडी की भूमिका रही। इसी वित्तीय व्यवस्था ने ऐसे उपकरण की खरीद संभव बनाई जिसे चारों सदस्य अलग-अलग नहीं खरीद सकते थे।
मशीन उपलब्ध होने के बाद नेल्लोर नगर निगम ने इसे लंबे समय के लिए किराये पर लेने की व्यवस्था की। इससे समूह को प्रति माह लगभग 78,500 रुपये का किराया मिलने लगा। परिचालन खर्च घटाने के बाद प्रत्येक सदस्य की मासिक आय करीब 37,000 रुपये बताई गई है। नियमित कमाई से उनकी घरेलू जरूरतें पूरी करने की क्षमता मजबूत हुई।
चारों कर्मियों के लिए यह बदलाव केवल आय तक सीमित नहीं रहा। अब वे मशीन आधारित सफाई उपकरण के मालिक और संचालक के रूप में काम कर रहे हैं। मशीनीकरण से सेवाओं को अधिक सुरक्षित और कुशल बनाने का अवसर मिला, जबकि सामूहिक कारोबार से शुरुआती आर्थिक बाधाओं को पार करना संभव हुआ।
2021-22 के दौरान मिले सहयोग के बाद टी. रवि कुमार, पी. शेखर, टी. निखिल और ई. ऐलैया ने नमस्ते की स्वच्छता उद्यमी योजना के जरिए स्थायी रोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया। यह पहल दर्शाती है कि पूंजी, मशीनें और नियमित काम मिलने पर स्वच्छता कर्मी उद्यमिता अपना सकते हैं तथा परिवार की आर्थिक सुरक्षा और पेशेवर सम्मान बढ़ा सकते हैं।
पीके/केसी/आरटी/एनकेएस
