सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव श्री सुधांश पंत कल कर्नाटक के मैसूर में आयोजित नौ दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 में पहुंचेंगे। इस मेले का आयोजन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय कर रहा है।
मैसूर में स्थल भ्रमण के साथ सचिव मंत्रालय की उन योजनाओं, कार्यक्रमों और पहलों की व्यापक समीक्षा भी करेंगे, जो कार्यान्वयन के अधीन हैं।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यह मेला 11 अक्टूबर से मैसूर के मैसूर दशहरा प्रदर्शनी मैदान में चल रहा है। मेले का समापन 19 अक्टूबर, सोमवार को होगा।
उन्होंने बताया कि यह मेला अनुसूचित जाति (SCs), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBCs) और सफाई कर्मचारियों के कारीगरों व लाभार्थियों को विपणन मंच देता है, जिससे वे अपने पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद और अन्य वस्तुएं अधिक लोगों तक पहुंचा सकते हैं।
अधिकारी ने बताया कि मेले का आयोजन मंत्रालय के अधीन तीन राष्ट्रीय निगमों — राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (NSFDC), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC) — ने मिलकर किया है, जो कारीगरों और पात्र लाभार्थियों को वित्तीय सहायता देते हैं।
मेले में कुल 83 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें से 80 स्टॉल कारीगरों को आवंटित हैं और इनमें 37 महिला कारीगर भी शामिल हैं। प्रदर्शनी में आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, पुडुचेरी, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश समेत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कारीगर हिस्सा ले रहे हैं।
स्टॉलों पर हस्तशिल्प, हथकरघा साड़ियाँ, मसाले, अचार, अगरबत्ती, शहद से बने उत्पाद, ब्लॉक प्रिंटेड वस्तुएँ, चमड़े का सामान, लकड़ी के खिलौने, बैग, पर्स, टेराकोटा उत्पाद, कृत्रिम आभूषण, रोज़वुड की दीवार पर टांगने वाली वस्तुएँ तथा बिस्तर और तकिये के कवर जैसे कई तरह के उत्पाद मिल रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक व्यंजन परोसने वाले फूड स्टॉलों का भी दौरा किया, जो आगंतुकों के अनुभव को और खास बनाते हैं।
मेले का लक्ष्य कारीगरों के लिए बाज़ार से जुड़ाव मज़बूत करना, पारंपरिक शिल्प कौशल को प्रोत्साहन देना और स्थायी आजीविका के अवसर तैयार करना है। आगंतुकों और संभावित खरीदारों से सीधे संवाद के माध्यम से भाग लेने वाले कारीगर अपने उत्पाद प्रदर्शित कर सकते हैं, ग्राहक आधार बढ़ा सकते हैं और अपने उद्यमों की बाज़ार पहुँच सुधार सकते हैं। यह पहल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी आगे बढ़ाती है और पारंपरिक कला रूपों व कौशलों को सहेजने में मदद करती है।
शिल्प समागम मेला 2026 मैसूर दशहरा प्रदर्शनी मैदान में 19 अक्टूबर, सोमवार तक चलेगा। यह मेला आगंतुकों को भारत की पारंपरिक शिल्पकला और हथकरघा उत्पादों को नज़दीक से देखने का मौका देगा और साथ ही कारीगरों की आजीविका को भी सहारा देगा। ऐसी पहलों के माध्यम से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय बाज़ार तक पहुंच मजबूत करने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और वंचित समुदायों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में लगातार काम कर रहा है।
यह मेला मंत्रालय और उसके तीन राष्ट्रीय निगमों की योजनाओं व कार्यक्रमों की जानकारी फैलाने का भी एक अहम मंच है, जिससे पात्र लाभार्थी उपलब्ध वित्तीय सहायता और उद्यमिता के अवसरों के बारे में जान पाते हैं।
लागू व्यवस्थाओं के अनुसार मंत्रालय मुफ्त स्टॉल देकर तथा यात्रा व्यय, दैनिक भत्ता, माल परिवहन और भोजन के लिए सहायता देकर कारीगरों की भागीदारी आसान बनाता है।
मेले के अलावा मंत्रालय भारत ट्यूलिप (पारंपरिक कारीगरों के उत्थान और आजीविका कार्यक्रम) पहल को भी बढ़ावा दे रहा है, जिसका उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लक्षित कारीगरों के उत्पादों की बाजार पहुंच भारत और विदेशों में बढ़ाना है। भारत ट्यूलिप के तहत उत्पादों की ब्रांडिंग से उनकी पहचान बढ़ाने, ऑनलाइन बिक्री को आसान बनाने और पारंपरिक कारीगरों को व्यापक ग्राहक वर्ग से जोड़ने का लक्ष्य है।
मंत्रालय 2022 से शिल्प समागम मेले आयोजित कर रहा है और अब तक हुए 13 मेलों से 975 कारीगर लाभान्वित हुए हैं।
मैसूर में चल रहा यह शिल्प समागम मेला वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला मेला है।
चालू वित्त वर्ष में मंत्रालय ने गुवाहाटी (21 से 28 अक्टूबर, 2026) में भी मेला लगाने का प्रस्ताव रखा है; इसके अलावा नई दिल्ली के दिल्ली हाट, जोधपुर और लखनऊ में भी मेले आयोजित होंगे। इसके साथ ही भारत मंडपम, नई दिल्ली में 14 से 27 नवंबर, 2026 तक होने वाले भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले 2026 और फरवरी 2027 में सूरजकुंड मेले जैसी बड़ी प्रदर्शनियों में भी भागीदारी की जाएगी।
पीके/केसी/आरटी/जेएस /डीए
