एनसीआर और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने 16.10.2026 को हुई अपनी 'प्रवर्तन कार्यबल/एनफोर्समेंट टास्क फोर्स' (ईटीएफ) की 141वीं बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में हुई प्रवर्तन कार्रवाइयों, निरीक्षणों के परिणामों और नियमों के अनुपालन की स्थिति का जायजा लिया।
25.09.2026 से 09.10.2026 तक, यानी 15 दिनों की रिपोर्टिंग अवधि में कुल 124 निरीक्षण किए गए। इनमें से 6 निरीक्षण निर्माण और विध्वंस (सीएंडडी) स्थलों पर, 54 औद्योगिक क्षेत्र में और 64 डीजल जनरेटर (डीजी) सेट से संबंधित थे। निरीक्षणों के दौरान नियम उल्लंघन के 55 मामले पाए गए, जिनमें से 5 सीएंडडी स्थलों पर, 35 औद्योगिक क्षेत्र में और 15 डीजी सेट से जुड़े थे।
पाए गए उल्लंघनों को देखते हुए अलग-अलग प्रवर्तन कार्रवाइयों का प्रस्ताव किया गया है। इनमें दो सीएंडडी परियोजनाओं और तीन औद्योगिक इकाइयों को बंद करना, औद्योगिक और डीजी क्षेत्रों की 12 इकाइयों को सील करना, तथा एक सीएंडडी मामले, पांच औद्योगिक मामलों और डीजी से संबंधित एक मामले में अनुपालन के लिए आदेश या निर्देश जारी करना शामिल है। इसके अलावा पर्यावरण मुआवजा (ईसी) लगाने, दोबारा निरीक्षण करने, मामलों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) को भेजने तथा परियोजना प्रस्तावक और संबंधित प्राधिकरणों को सलाह व पत्र जारी करने जैसे कदम भी प्रस्तावित हैं।
ईटीएफ ने अपनी 140वीं बैठक में लिए गए मामलों पर हुई कार्रवाई का भी आकलन किया। इस दौरान काम बंद कराने, डीजी सेट सील करने, ईसी पत्र व परामर्श जारी करने, मामलों को सीपीसीबी/एसपीसीबी को भेजने और दोबारा निरीक्षण जैसे विभिन्न प्रवर्तन उपायों की प्रगति देखी गई। कार्यबल ने पिछली बैठक के बाद जारी काम दोबारा शुरू करने के आदेशों की भी समीक्षा की। 15.10.2026 तक काम फिर शुरू करने के तीन आदेश जारी हुए थे और ये सभी सीएंडडी मामलों से जुड़े थे। इनमें दो आदेश हरियाणा और एक उत्तर प्रदेश से संबंधित था। साथ ही, तीन मामलों को अंतिम फैसले के लिए संबंधित एसपीसीबी या प्राधिकरणों के पास भेजा गया। इनमें एक औद्योगिक और दो सीएंडडी मामले थे; एक मामला दिल्ली का और दो हरियाणा के थे।
ईटीएफ ने आयोग के 'फ्लाइंग स्क्वॉड' (उड़न दस्तों) द्वारा की गई प्रवर्तन कार्रवाई की ताजा स्थिति की समीक्षा की। 16.10.2026 तक उड़न दस्तों ने पूरे एनसीआर में 28,868 इकाइयों, परियोजनाओं और संस्थाओं का निरीक्षण किया था। इन निरीक्षणों के आधार पर 1,837 'बंद करने के निर्देश' जारी हुए थे। इनमें से अनुपालन की पुष्टि के बाद 1,491 मामलों में 'काम फिर से शुरू करने के आदेश' दिए गए। इसके अतिरिक्त 130 मामले अंतिम निर्णय के लिए संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) या दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को सौंपे गए, जबकि 216 संस्थाओं के लिए काम दोबारा शुरू करने के आदेश अभी जारी होने थे।
ईटीएफ ने संबंधित क्षेत्रों में जारी प्रवर्तन आदेशों की स्थिति पर भी विचार किया। 15.10.2026 तक औद्योगिक क्षेत्र में कुल 34, सीएंडडी क्षेत्र में 29 और डीजी सेट के मामले में 27 आदेश जारी हो चुके थे। कार्यबल ने इन मामलों के निपटारे और प्रक्रिया की प्रगति को संज्ञान में लिया, जिनमें वे मामले भी थे जिनके लिए अतिरिक्त जानकारी, व्यक्तिगत सुनवाई और दोबारा निरीक्षण जरूरी था।
आयोग ने फिर कहा कि निरीक्षण का मुख्य फोकस रेड (लाल) और ऑरेंज (नारंगी) श्रेणी के उद्योगों पर होना चाहिए, खासकर उन पर जिनमें भट्टियां और बॉयलर हैं। बंद करने के निर्देश और पत्र वापस लौट आने की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए उड़न दस्तों से कहा गया कि वे निरीक्षण रिपोर्ट सौंपने से पहले पूरे और सही पते के सत्यापन से जुड़े निर्धारित निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।
आयोग ने प्रवर्तन को और सशक्त बनाने, अनुपालन का समय पर सत्यापन करने और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। एनसीआर में वायु प्रदूषण को प्रभावी तरीके से घटाने के लिए आयोग ने औद्योगिक इकाइयों, निर्माण एवं विकास गतिविधियों और डीजी सेट जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में तेज प्रवर्तन कार्रवाई, कड़ी अनुपालन निगरानी और लगातार निरीक्षण की आवश्यकता भी रेखांकित की।
पीके/केसी/आरटी/एमपी
