कर्नाटक के मैसुरु में चल रहे नौ दिवसीय 'शिल्प समागम मेला 2026' का केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सचिव श्री सुधांश पंत ने आज शाम दौरा किया।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय इस मेले का आयोजन अपने तीन राष्ट्रीय निगमों के साथ मिलकर कर रहा है। ये तीन निगम हैं— राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी)। कारीगरों और पात्र लाभार्थियों को वित्तीय सहायता देने का काम यही निगम करते हैं।
मैसूरु दशहरा प्रदर्शनी मैदान में घूमते हुए सचिव ने विभिन्न स्टॉलों को देखा और वहां मौजूद स्टॉल प्रबंधकों व आगंतुकों से बात की।
केंद्रीय सचिव इन दिनों मैसूरु के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं। इस यात्रा में वे प्रशासन के साथ बैठकर मंत्रालय की वर्तमान में लागू योजनाओं, कार्यक्रमों और पहलों की विस्तृत समीक्षा कर रहे हैं। इसके साथ ही वे मैसूरु के अलग-अलग स्थलों पर भी जा रहे हैं।
श्री पंत के अनुसार, ऐसी योजनाओं के जरिए मंत्रालय बाजार तक पहुंच मजबूत करने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और वंचित समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण को आगे ले जाने की दिशा में काम कर रहा है।
'शिल्प समागम मेला' सोमवार, 19 अक्टूबर तक खुला रहेगा। यहां आने वाले लोग भारत की पारंपरिक शिल्प कलाओं और हथकरघा उत्पादों को करीब से देख-समझ सकेंगे और साथ ही कारीगरों की आजीविका में भी योगदान दे सकेंगे।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, यह मेला 11 अक्टूबर से चल रहा है। अनुसूचित जातियों (एससी), अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) और सफाई कर्मचारियों से जुड़े कारीगरों और लाभार्थियों के लिए यह एक मार्केटिंग प्लेटफॉर्म है, जहां वे अपनी पारंपरिक हस्तशिल्प कलाएं, हथकरघा उत्पाद और अन्य सामान बड़ी संख्या में लोगों के सामने रख पाते हैं।
अधिकारी ने जानकारी दी कि मेले में कुल 83 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें से 80 स्टॉल कारीगरों को आवंटित हैं; इन कारीगरों में 37 महिलाएं भी हैं। प्रदर्शनी में आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरलम, राजस्थान, पुडुचेरी, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश समेत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कारीगर भाग ले रहे हैं।
उनके अनुसार, इन स्टॉलों पर तरह-तरह के उत्पाद मिल रहे हैं, जैसे हस्तशिल्प, हथकरघा साड़ियाँ, मसाले, अचार, अगरबत्ती, शहद से बने उत्पाद, ब्लॉक-प्रिंट वाले सामान, चमड़े की वस्तुएं, लकड़ी के खिलौने, बैग, पर्स, टेराकोटा (मिट्टी के) उत्पाद, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, रोज़वुड (शीशम की लकड़ी) की वॉल हैंगिंग, और बेड व कुशन कवर। उन्होंने पारंपरिक व्यंजन परोसने वाले फूड स्टॉलों का भी दौरा किया, जो आगंतुकों के अनुभव को और खास बनाते हैं।
अधिकारी ने यह भी कहा कि मेले का लक्ष्य कारीगरों की बाजार तक पहुंच मजबूत करना, पारंपरिक शिल्प कौशल को प्रोत्साहन देना और आजीविका के टिकाऊ अवसर देना है। आगंतुकों और संभावित खरीदारों से सीधे संवाद के जरिए कारीगर अपने उत्पाद दिखा सकते हैं, ग्राहकों का दायरा बढ़ा सकते हैं और अपने कारोबार को बाजार से बेहतर ढंग से जोड़ सकते हैं। उनके मुताबिक, यह पहल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाती है और पारंपरिक कलाओं व कौशलों के संरक्षण में भी मददगार है।
उन्होंने कहा कि मंत्रालय और उसके तीन राष्ट्रीय निगमों की योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने में यह मेला एक अहम मंच है। इससे पात्र लाभार्थी उपलब्ध वित्तीय सहायता और उद्यमिता के अवसरों के बारे में जान पाते हैं।
अधिकारी के अनुसार, कारीगरों की भागीदारी आसान बनाने के लिए मंत्रालय उन्हें निःशुल्क स्टॉल देता है। साथ ही लागू नियमों के तहत यात्रा खर्च, दैनिक भत्ता, सामान की ढुलाई और भोजन के लिए भी सहायता दी जाती है।
उल्लेखनीय है कि इस मेले के साथ-साथ मंत्रालय 'भारत ट्यूलिप' (पारंपरिक कारीगरों के उत्थान और आजीविका कार्यक्रम – BHARAT TULIP) पहल को भी आगे बढ़ा रहा है। इसका लक्ष्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लक्षित कारीगरों के बनाए उत्पादों का बाजार भारत और विदेशों में फैलाना है। 'भारत ट्यूलिप' के तहत उत्पादों की ब्रांडिंग का मकसद उनकी पहुंच बढ़ाना, ऑनलाइन बिक्री को सरल बनाना और पारंपरिक कारीगरों को अधिक ग्राहकों से जोड़ना है।
'शिल्प समागम मेले' का आयोजन मंत्रालय 2022 से कर रहा है। अब तक हुए 13 मेलों से 975 कारीगर लाभान्वित हुए हैं।
मैसूरु का यह मेला वित्तीय वर्ष 2026-27 में आयोजित होने वाला पहला 'शिल्प समागम मेला' है।
इस वित्तीय वर्ष में मंत्रालय की योजना गुवाहाटी (21 से 28 अक्टूबर, 2026), नई दिल्ली के दिल्ली हाट, जोधपुर और लखनऊ में भी मेले लगाने की है। इसके अलावा मंत्रालय बड़ी प्रदर्शनियों में भी भाग लेगा, जिनमें 14 से 27 नवंबर, 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाला ' भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला 2026' और फरवरी 2027 में आयोजित होने वाला 'सूरजकुंड मेला' शामिल हैं।
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