वाराणसी स्थित आईआईटी बीएचयू में इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के अधीन प्रमुख विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संगठन सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) और आईआईटी बीएचयू के नवाचार, इनक्यूबेशन एवं उद्यमिता केंद्र (सीआईआईई) ने मिलकर “स्वास्थ्य एवं सहायक प्रौद्योगिकियों के लिए एआई” विषय पर एक टेक कॉन्क्लेव आयोजित किया। कार्यक्रम में सरकारी प्रतिनिधि, शिक्षा जगत के विशेषज्ञ, स्वास्थ्य सेवा से जुड़े पेशेवर और स्टार्टअप्स शामिल हुए। कॉन्क्लेव का उद्देश्य इस बात पर मंथन करना था कि व्यावहारिक एवं व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वास्थ्य सेवाओं को उन्नत बनाने, सुगम्यता में सुधार करने तथा समावेशन और नागरिकों के कल्याण को बढ़ावा देने में कैसे भूमिका निभा सकती है।
उद्घाटन सत्र की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। इसके पश्चात आईआईटी बीएचयू के सीआईआईई के संकाय प्रभारी प्रो. मनोज कुमार मेश्राम ने स्वागत संबोधन दिया। इस सत्र में भारत सरकार के एमईआईटीवाई के सचिव श्री एस. कृष्णन ने मुख्य संबोधन दिया। इसके बाद एसटीपीआई के महानिदेशक श्री अरविंद कुमार और आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो.अमित पात्रा ने विशेष संबोधन दिए। उत्तर प्रदेश सरकार के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिकी विभाग के उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन के सीईओ श्री सुमित महाजन तथा बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मल्लिका तिवारी ने भी विशेष संबोधन दिए।
मुख्य संबोधन देते हुए भारत सरकार के एमईआईटीवाई के सचिव श्री एस. कृष्णन ने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने, नैदानिक निर्णय लेने की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने और सेवाओं की उपलब्धता एवं वितरण में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह विशेष रूप से उन समुदायों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित है।” उन्होंने विभिन्न विषयों में एआई शिक्षा को एकीकृत करने और व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रौद्योगिकी, चिकित्सा विज्ञान और अनुसंधान के समन्वय का लाभ उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। रोगों की स्क्रीनिंग, चिकित्सा निदान, दूरस्थ आईसीयू निगरानी और एआई-सहायता प्राप्त सर्जिकल योजना जैसे अनुप्रयोगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता, किफायती उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार लाने की एआई की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने आईआईटी (बीएचयू), एसटीपीआई, उद्योग जगत और स्टार्टअप्स के बीच बेहतर सहयोग पर ज़ोर दिया, ताकि व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले स्वास्थ्य सेवा एवं सहायक प्रौद्योगिकी संबंधी समाधान विकसित किए जा सकें। उन्होंने इंडिया एआई मिशन और एमईआईटीवाई की अन्य पहलों के माध्यम से उपलब्ध सहायता का भी उल्लेख किया। साथ ही, उन्होंने एक टिकाऊ नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए स्टार्टअप्स को निवेशकों, वेंचर कैपिटल नेटवर्क और बाजार के अवसरों से जोड़ने में एसटीपीआई की भूमिका को अहम बताया।
एसटीपीआई के महानिदेशक श्री अरविंद कुमार ने बीते तीन दशकों में भारत के प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में आए बदलावों की चर्चा की। 1991 से भारत के आईटी/आईटीईएस उद्योग के विकास में एसटीपीआई की अहम भूमिका का उल्लेख करते हुए, उन्होंने स्वदेशी नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में इस सफलता को दोहराने के अवसर पर ज़ोर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि पहले छात्र मुख्य रूप से कैंपस प्लेसमेंट की आकांक्षा रखते थे, जबकि आज का स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र युवा नवोन्मेषकों को रोजगार सृजनकर्ता बनने में सक्षम बनाता है। एसटीपीआई के उद्योग संबंधों और 27 उद्यमिता केंद्रों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने व्यावहारिक अनुसंधान, बौद्धिक संपदा निर्माण और बाजार पहुंच के महत्व पर बल दिया। उन्होंने आगे कहा कि स्थापित प्रौद्योगिकी केंद्रों से परे, विशेष रूप से उभरते क्षेत्रों में, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है, जिसके लिए आईआईटी (बीएचयू) जैसे शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग और सरकार के बीच घनिष्ठ सहयोग आवश्यक है।
आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने स्वास्थ्य एवं सहायक प्रौद्योगिकियों के लिए एआई विषय पर आयोजित एसटीपीआई टेक कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए, नवाचार, इनक्यूबेशन एवं उद्यमिता केंद्र (सीआईआईई) की स्थापना के ज़रिए अपने स्टार्टअप और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत बनाने के लिए आईआईटी (बीएचयू) के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और महत्वाकांक्षी नवोन्मेषकों में उद्यमशीलता की सोच को पोषित करने हेतु एक संरचित संस्थागत ढांचा तैयार करने के महत्व पर ज़ोर दिया, जिससे वे नवीन विचारों को सफल स्टार्टअप में बदल सकें। उन्होंने महत्वाकांक्षी उद्यमियों को विभिन्न वित्तपोषण स्रोतों से जोड़ने और स्टार्टअप की एक स्थायी श्रृंखला बनाने की आवश्यकता पर बल दिया तथा नवाचार और प्रौद्योगिकी-संचालित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी (बीएचयू) की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस सम्मेलन में दो पैनल चर्चाएँ भी हुईं — “एआई के माध्यम से नागरिकों का सशक्तिकरण: स्वास्थ्य, समावेशन और कल्याण” और “नवाचार से प्रभाव तक: एआई अनुसंधान को व्यावहारिक स्वास्थ्य सेवा और सहायक समाधानों में बदलना”। इन चर्चाओं में सरकार, शिक्षा जगत, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र और स्टार्टअप्स के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया तथा एआई की संभावनाओं और उसे व्यावहारिक एवं व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों में बदलने के तरीकों पर चर्चा की। एसटीपीआई लखनऊ के अपर निदेशक एवं प्रभारी अधिकारी (ओआईसी) श्री प्रवीण कुमार द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
प्रथम पैनल चर्चा, “एआई के माध्यम से नागरिकों का सशक्तिकरण: स्वास्थ्य, समावेशन और कल्याण,” में प्रो. मनोज कुमार मेश्राम, समन्वयक, सीआईआईई-आईआईटी बीएचयू; डॉ. संजय कुमार सिंह, प्रोफेसर, कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग, आईआईटी बीएचयू; प्रो. अवनीश सिंह परमार, प्रोफेसर, भौतिकी विभाग, आईआईटी बीएचयू; डॉ. शिरू शर्मा, प्रोफेसर, बायोमेडिकल अभियांत्रिकी विभाग, आईआईटी बीएचयू; डॉ. रुचि चावला, एसोसिएट प्रोफेसर, फार्मास्युटिकल अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी विभाग, आईआईटी बीएचयू; श्री शाहबाज अहमद, संस्थापक, आर्किशन एआई प्राइवेट लिमिटेड; और श्री अमित कुमार वर्मा, अतिरिक्त निदेशक, एसटीपीआई ने भाग लिया। चर्चा का फोकस अधिक सुलभ एवं समावेशी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने तथा नागरिकों के कल्याण में सुधार लाने में एआई की संभावनाओं पर रहा। विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों की भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ कि लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाले समाधानों की खोज के लिए तकनीकी विशेषज्ञता, स्वास्थ्य संबंधी अनुसंधान और उद्यमशीलता के दृष्टिकोण को एक साथ लाना कितना महत्वपूर्ण है।
दूसरे पैनल चर्चा सत्र “नवाचार से प्रभाव तक: एआई अनुसंधान को व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले स्वास्थ्य सेवा एवं सहायक समाधानों में रूपांतरित करना” में एमईआईटीवाई के निदेशक श्री राजेश्वर सिंह जेनवार, आईएमएस-बीएचयू के जैव-सांख्यिकी केंद्र के सहायक प्रोफेसर डॉ. आकाश मिश्रा, बायोनेस्ट बीएचयू के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. दुर्गेश नारायण सिंह, लेमिनएआई की संस्थापक सुश्री तृप्ति वर्मा तथा लखनऊ स्थित एसजीपीजीआईएमएस में एसटीपीआई मेडटेक सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के सीओओ श्री श्याम कुमार ने भाग लिया। इस सत्र में अनुसंधान एवं नवाचार से लेकर स्वास्थ्य सेवा और सहायक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यावहारिक तथा व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधान विकसित करने की पूरी प्रक्रिया पर चर्चा हुई। संस्थागत, वैज्ञानिक और स्टार्टअप जगत के विभिन्न दृष्टिकोणों के समावेश से यह रेखांकित हुआ कि आशाजनक विचारों को वास्तविक उपयोग तक पहुँचाने के लिए सहयोग कितना महत्वपूर्ण है।
सम्मेलन ने सुलभ स्वास्थ्य सेवा, सहायक प्रौद्योगिकियों और समावेशी कल्याण के लिए एआई का उपयोग करने हेतु सरकार, शिक्षा जगत, स्वास्थ्य संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग की अहमियत पर ज़ोर दिया। निरंतर सहभागिता, अनुसंधान अनुवाद और उद्यमिता समर्थन के ज़रिए एसटीपीआई और सीआईआईई, आईआईटी बीएचयू, एक ऐसे नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान देना चाहते हैं जो सामाजिक आवश्यकताओं के लिए व्यावहारिक, जिम्मेदार और विस्तार योग्य प्रौद्योगिकी समाधान विकसित करे।
एसटीपीआई के बारे में:
सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के अधीन एक प्रमुख विज्ञान और प्रौद्योगिकी संगठन है, जो उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में आईटी/आईटीईएस उद्योग, नवाचार, अनुसंधान और विकास, स्टार्टअप और उत्पाद एवं बौद्धिक संपदा निर्माण को बढ़ावा देने में लगा हुआ है। इनमें इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ब्लॉकचेन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, कंप्यूटर विजन, रोबोटिक्स, संवर्धित और आभासी वास्तविकता, एनिमेशन और विजुअल इफेक्ट्स तथा डेटा साइंस और एनालिटिक्स शामिल हैं। एसटीपीआई गेमिंग, फिनटेक, एग्रीटेक, मेडटेक, स्वायत्त और कनेक्टेड मोबिलिटी, ईएसडीएम, साइबर सुरक्षा, इंडस्ट्री 4.0 और ड्रोन जैसे क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहित करता है।
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