जनहित में रसायन और उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने 137 चिन्हित गैर-अनुसूचित एंटी-कैंसर दवाओं का ट्रेड मार्जिन युक्तसंगतीकरण (टीएमआर) किया है, ताकि अत्यधिक ट्रेड मार्जिन पर अंकुश लगे, कैंसर का इलाज अधिक किफायती हो और एंटी-कैंसर दवाओं तक पहुंच बेहतर हो। उम्मीद है कि इस कदम से चिन्हित गैर-अनुसूचित एंटी-कैंसर दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य एमआरपी में, उनकी मौजूदा मूल्य संरचना के आधार पर, 70% तक की कमी आएगी।
यह पहल एनपीपीए के 2019 के पायलट टीएमआर अभ्यास की सफलता पर आधारित है, जिसमें 42 कैंसर रोधी दवाओं का व्यापार मार्जिन 30% तक सीमित किया गया था। उस अभ्यास के बाद गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं के 526 ब्रांडों का एमआरपी 90% तक घटाया गया था। मौजूदा अभ्यास में इसी दृष्टिकोण को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के तहत विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुशंसित सूची के आधार पर कैंसर रोधी दवाओं के एक बड़े समूह तक बढ़ाया गया है।
विशेषज्ञ समिति में देश भर के अस्पतालों के प्रमुख कैंसर विशेषज्ञ, चिकित्सा विशेषज्ञ तथा सरकारी अधिकारी शामिल थे। समिति ने विचार-विमर्श के बाद टीएमआर (अधिकतम खुदरा मूल्य) के अंतर्गत शामिल करने के लिए 137 दवाओं की सिफारिश की। इस सूची को समय-समय पर अद्यतन किया जाएगा। समिति द्वारा अनुशंसित दवाओं को ध्यान में रखते हुए, एनपीपीए ने औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (डीपीसीओ), 2013 के अनुच्छेद 19 के अनुसार, व्यापार मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के 30% पर सीमित कर दिया है। 17 अक्टूबर, 2026 की राजपत्र अधिसूचना एनपीपीए की आधिकारिक वेबसाइट https://nppa.gov.in/en पर देखी जा सकती है । इस उपाय से कैंसर से प्रभावित उन कई रोगियों और परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें इलाज की ऊंची लागत के कारण अक्सर भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है।
सभी निर्माताओं के लिए राजपत्र अधिसूचना के प्रकाशन के 7 दिनों के भीतर एनपीपीए को अपने संशोधित मूल्यों की सूचना देना अनिवार्य होगा। संशोधित मूल्य 9 नवंबर, 2026 से लागू होंगे। निर्माताओं के लिए अपनी वेबसाइट पर मूल्य सूची दिखाना और इसे सभी खुदरा विक्रेताओं व अस्पतालों तक व्यापक रूप से पहुंचाना अनिवार्य होगा। सभी खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को 9 नवंबर, 2026 से घटी हुई कीमतों पर दवाएं बेचनी होंगी और अपनी फार्मेसियों में संशोधित मूल्य प्रदर्शित करने होंगे। अस्पतालों को अपनी वेबसाइट पर भी संशोधित मूल्य प्रमुखता से प्रदर्शित करने होंगे। दवाओं के संशोधित मूल्य जानने के लिए उपभोक्ता फार्मा सही दाम ऐप और एनपीपीए वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं।
चूंकि एंटी-कैंसर दवाओं की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा सीधे अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को जाता है, इसलिए कार्यान्वयन की तारीख से ऐसी दवाओं की संशोधित कीमतें सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उन्हीं की होगी; वे इसके लिए जिम्मेदार होंगे। राज्य औषधि नियंत्रक (स्टेट ड्रग कंट्रोलर्स) निर्माताओं, खुदरा विक्रेताओं सहित डीलरों, अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों द्वारा अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।
कैंसर रोधी दवाओं पर टीएमआर का उद्देश्य वितरण और खुदरा चैनलों में अत्यधिक व्यापार मार्जिन पर नियंत्रण करना, निर्माताओं के वैध राजस्व की रक्षा करना और बाजार में कृत्रिम कमी को रोकना है। रोगियों को समय पर और बिना रुकावट दवाएं मिल सकें, इसके लिए दवा कंपनियों को अधिसूचित फॉर्मूलेशन का मौजूदा उत्पादन और आपूर्ति स्तर बनाए रखना होगा।
कैंसर रोधी दवाओं को अधिक किफायती और सुलभ बनाकर यह पहल रोगियों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करने में मदद करेगी तथा कैंसर उपचार तक समान पहुंच के व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्य को भी मजबूती देगी।
पीके/केसी/आरटी/पीएस
