भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से मिलने वाले फायदों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और निर्यातकों को इनका बेहतर उपयोग करने में सहायता देने के उद्देश्य से वाणिज्य विभाग ने राजस्थान के जयपुर में ‘मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाना-जागरूकता कार्यक्रम’ का आयोजन किया। वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव श्री मोहित यादव ने इस कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों के निर्यातकों के अलावा राजस्थान सरकार, विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी), जयपुर विशेष आर्थिक क्षेत्र तथा रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
कार्यक्रम का लक्ष्य था कि लक्षित जानकारी, क्षमता निर्माण, व्यावहारिक मार्गदर्शन और वाणिज्य विभाग, राज्य सरकारों, उद्योग संघों व निर्यातकों के आपसी समन्वय के जरिए भारतीय उद्यम मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाली तरजीही बाजार पहुंच को निर्यात के अवसरों में बदल सकें। वैश्विक अर्थव्यवस्था से भारत के लगातार बढ़ते जुड़ाव को देखते हुए इस कार्यक्रम का विशेष महत्व रहा।
नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, “हमारा निरंतर प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि भारत की क्षमताएं दूसरे देशों के लिए भी अवसरों के नए द्वार खोलें।” 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के भाषण और कई अन्य मौकों पर प्रधानमंत्री ने बताया है कि मुक्त व्यापार समझौते भारतीय उत्पादकों, किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए नए अवसर पैदा करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक बाजारों में पहुंच के लिए अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरने की अहमियत पर भी बल दिया है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भी भारत के मुक्त व्यापार समझौतों से उपलब्ध होने वाले कारोबारी अवसरों की ओर ध्यान दिलाया है। उनके अनुसार तरजीही बाजार पहुंच किसानों, महिला उद्यमियों, युवाओं, एमएसएमई, कारीगरों और उद्योग जगत के लिए नए अवसर खोल सकती है। उन्होंने व्यवसायों से अपील की है कि वे गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता पर ध्यान देते हुए कम या शून्य शुल्क वाली बाजार पहुंच का फायदा उठाएं।
भारत से वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-सितंबर के दौरान कुल निर्यात 476.20 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो वित्त वर्ष 2025-26 की समान अवधि में 418.31 अरब अमेरिकी डॉलर था। यानी निर्यात में लगभग 13.84 प्रतिशत की अनुमानित बढ़ोतरी हुई है। सितंबर 2026 में वस्तु निर्यात की वृद्धि में मुख्य योगदान इलेक्ट्रॉनिक सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, कार्बनिक व अकार्बनिक रसायन, इंजीनियरिंग सामान, सूती धागे, कपड़े, तैयार वस्त्र और हथकरघा उत्पादों का रहा।
कार्यक्रम के माध्यम से राजस्थान के निर्यातकों को भारत के मुक्त व्यापार समझौतों में मौजूद अवसरों और तरजीही बाजार पहुंच का लाभ लेने में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों पर बातचीत करने का मंच मिला। संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के देशों और ब्रिटेन समेत कई भागीदारों के साथ भारत के व्यापार समझौते व व्यवस्थाएं भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए विदेशी उपभोक्ताओं, खरीदारों, निवेशकों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पहुंच के रास्ते खोलती हैं। फिर भी, ये अवसर संबंधित समझौतों के प्रावधानों और उनके क्रियान्वयन की स्थिति पर आधारित हैं।
चर्चा में निर्यात योग्य उत्पादों की पहचान, शुल्क संबंधी रियायतों और मूल स्थान के नियमों की समझ, गुणवत्ता व प्रमाणन की शर्तों को पूरा करने और विदेशी खरीदारों से संपर्क मजबूत करने जैसे विषयों पर जोर रहा। भारत के व्यापार समझौतों के तहत मिलने वाली बाजार पहुंच का सही लाभ लेने के लिए ये सभी बिंदु अहम हैं। विदेश व्यापार महानिदेशालय, जयपुर के संयुक्त महानिदेशक श्री एमडी मोइन अफाक ने भारत के हाल में संपन्न मुक्त व्यापार समझौतों के अंतर्गत रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के निर्यात अवसरों पर एक क्षेत्र-विशेष प्रस्तुति दी।
प्रस्तुति के अनुसार, दुनिया के रत्न एवं आभूषण निर्यातकों में भारत का स्थान आठवां है और एक लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के वैश्विक बाजार में उसकी हिस्सेदारी 2.9 प्रतिशत है। इसमें यह भी बताया गया कि भारत के नए मुक्त व्यापार समझौतों के तहत आयात बाजारों में कौन से अवसर उपलब्ध हैं। प्रस्तुति में उल्लेख किया गया कि इनमें हर समझौते के तहत सभी शुल्क श्रेणियों में तुरंत शुल्क-मुक्त पहुंच भी शामिल है। प्रस्तुति में प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों के मुकाबले भारत की प्रतिस्पर्धी स्थिति का आकलन किया गया। इसके अलावा उन उत्पादों और मुक्त व्यापार समझौते वाले बाजारों को चिह्नित किया गया, जहां भारतीय निर्यातकों को शुल्क से जुड़ा फायदा मिल सकता है।
उभरते अवसरों में प्रयोगशाला में बने हीरों के आभूषण, रंगीन रत्न, कुंदन-मीनाकारी के पारंपरिक आभूषण, स्मार्ट व पहनने योग्य आभूषण, पुनर्चक्रित और नैतिक तरीके से प्राप्त सोने के आभूषण तथा मोती और संवर्धित मोतियों के आभूषण शामिल हैं। रत्न एवं आभूषण क्षेत्र में राजस्थान की मजबूत पहचान के कारण ये अवसर राज्य के लिए खास तौर पर अहम हैं। वस्त्र एवं परिधान, हस्तशिल्प, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, पत्थर एवं खनिज तथा कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के जरिए राजस्थान भारत के निर्यात को आगे बढ़ाने की भरपूर क्षमता रखता है।
‘राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2024-25’ में राज्य को वर्ष 2029 तक 350 अरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने तथा राजस्थान निर्यात संवर्धन नीति (आरईपीपी) 2024 के अंतर्गत 2029 तक 1.5 लाख करोड़ रुपये का निर्यात हासिल करने का लक्ष्य बताया गया है। राजस्थान के बजट 2026-27 में भी ‘विकसित राजस्थान @ 2047’ की परिकल्पना रखी गई है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2047 तक राज्य को 4.3 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। ये लक्ष्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण से मेल खाते हैं।
मुक्त व्यापार समझौतों से राजस्थान के किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को पात्र कृषि उपज, मोटे अनाज, मसालों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के लिए नए बाजारों में पहुंचने का मौका मिल सकता है। लेकिन इसके लिए खाद्य सुरक्षा, उत्पादों की पहचान व आपूर्ति श्रृंखला की ट्रेसबिलिटी और आयात करने वाले देशों की अन्य शर्तों का पालन करना आवश्यक होगा। वस्त्र, हस्तशिल्प, आभूषण और इंजीनियरिंग क्षेत्र के एमएसएमई व कारीगरों के लिए शुल्क संबंधी रियायतें उत्पादों को कीमत के लिहाज से अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकती हैं और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में उनकी हिस्सेदारी बढ़ा सकती हैं। महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों और स्वयं सहायता समूहों को निर्यात प्रशिक्षण, ई-कॉमर्स और खरीदारों से जुड़ाव में सहायता मिल सकती है। दूसरी ओर, बड़े व्यवसाय निवेश, प्रौद्योगिकी साझेदारी और नए बाजारों में विस्तार की संभावनाएं तलाश सकते हैं। ये लाभ किस हद तक मिलेंगे, यह संबंधित उत्पाद, भागीदार देश और लागू मुक्त व्यापार समझौते के प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
यह जागरूकता कार्यक्रम जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा और अन्य जिलों के उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों व आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़कर वैश्विक व्यापार में राजस्थान की भूमिका को मजबूत करने की कोशिश करता है। व्यापार रियायतों, निर्यात दस्तावेजों, उत्पाद मानकों, लॉजिस्टिक्स और बाजार से जुड़ी जानकारी के प्रति जागरूकता बढ़ने से पहली बार निर्यात करने वाले व्यवसायी घरेलू बाजार से आगे बढ़ सकते हैं।
राज्य सरकार का सहयोग, औद्योगिक क्षेत्रों और पार्कों के विकास की पहल, निर्यात पर केंद्रित क्षेत्र-विशेष कार्यबल तथा ऋण सुविधा, वित्तीय प्रोत्साहन, बाजार संपर्क, कौशल विकास, गुणवत्ता प्रमाणन, प्रौद्योगिकी उन्नयन और ई-कॉमर्स को प्रोत्साहित करने वाली नीतियां व योजनाएं मिलकर उद्यमिता, रोजगार और आजीविका को और मजबूती दे सकती हैं। ये कोशिशें ‘विकसित राजस्थान 2047’ की विकास आकांक्षाओं और ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को साकार करने में मददगार हो सकती हैं।
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