केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में 31वें सीआईआई पार्टनरशिप समिट के पूर्वावलोकन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि “जब दुनिया दीवारें खड़ी कर रही थी, तब भारत ने पुलों का निर्माण आरंभ कर दिया था।” उन्होंने बताया कि भारत ने पिछले वर्ष 863 बिलियन डॉलर का निर्यात दर्ज किया और चालू वर्ष में 1 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। यह लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जबकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में केवल 2.5 से 3 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है। वैश्विक अर्थव्यवस्था आघातों के प्रति संवेदनशील बनी हुई है और वैश्विक विकास दर 3 प्रतिशत से नीचे जाने का अनुमान है।
श्री गोयल ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत 1 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य को अर्जित कर लेगा। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल सरकार द्वारा ही नहीं, बल्कि भारत की जनता और कंपनियों द्वारा निर्धारित किया गया है। इसमें 63 मिलियन लघु एवं मध्यम उद्यम, बड़े और छोटे उद्योग, वैश्विक क्षमता केंद्र और लगभग 250,000 स्टार्टअप्स शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वर्ष के लिए अपने विकास अनुमानों को एक बार फिर बढ़ाया है और विश्वास व्यक्त किया है कि भारत 7 प्रतिशत से अधिक की दर से विकास करना जारी रखेगा और सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
श्री गोयल ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चंद्रबाबू नायडू के साथ पूर्वावलोकन समारोह में भाग लिया। साझेदारी शिखर सम्मेलन 12 और 13 नवंबर को विशाखापत्तनम में आयोजित किया जाएगा।
श्री गोयल ने शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए देशों से आग्रह करते हुए कहा कि यह आयोजन विकास, अवसर और साझेदारी के परिप्रेक्ष्य से भारत के इतिहास को देखने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने विशिष्ट अतिथियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने देशों से विशाखापत्तनम में सशक्त प्रतिनिधिमंडल भेजें और साझेदारी शिखर सम्मेलन द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों, पैनलों, चर्चाओं और औपचारिक एवं अनौपचारिक नेटवर्किंग अवसरों में भाग लें।
उन्होंने सीआईआई से आग्रह किया कि वह प्रत्येक राज्य परिषद में एफटीए उपयोगिता डेस्क स्थापित करे ताकि एमएसएमई को मुक्त व्यापार समझौतों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने, नए बाजार पहुंच के अवसरों और उत्पत्ति के नियमों को समझने, प्रतिनिधिमंडलों में शामिल होने, प्रदर्शनियों और सम्मेलनों में भाग लेने और वैश्विक बाजारों में अपने उत्पादों, प्रौद्योगिकियों और प्रस्तुतियों को प्रदर्शित करने में मदद मिल सके।
