संचार मंत्रालय के डाक विभाग ने देशभर के डाक प्रतिष्ठानों में 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चल रहे 'विशेष अभियान 6' (स्पेशल अभियान 6) के क्रियान्वयन चरण में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। अभियान का मकसद स्वच्छता को संस्थागत स्वरूप देना, लंबित मामलों में कमी लाना, रिकॉर्ड प्रबंधन को कुशल बनाना और ई-कचरे का जिम्मेदारी से निपटान सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही डाक प्रतिष्ठानों में कामकाज के माहौल और नागरिकों के अनुभव को बेहतर बनाना भी इसका लक्ष्य है।
'विशेष अभियान 6' के अंतर्गत विभाग ने 1,50,000 जन शिकायतों के समाधान, 1,500 अपीलों के निपटान और देशभर में 1,35,000 स्थानों पर स्वच्छता अभियान चलाने जैसे बड़े लक्ष्य तय किए हैं। यह अभियान कुशल जन सेवा, जवाबदेह प्रशासन और टिकाऊ कार्यालय प्रबंधन की दिशा में विभाग के लगातार प्रयासों को आगे ले जाता है।
16 अक्टूबर 2026 तक उल्लेखनीय प्रगति
क्रियान्वयन चरण में विभाग ने ये उपलब्धियां हासिल की हैं:
स्वच्छता अभियान: डाकघरों समेत 73,814 स्थानों पर स्वच्छता गतिविधियां की गईं, जो कुल 1,35,000 स्थानों के लक्ष्य का करीब 55% है।
जन शिकायतों का निवारण: अभियान के 1,50,000 के लक्ष्य की तुलना में कुल 1,00,214 जन शिकायतें सुलझाई गईं, यानी लक्ष्य का करीब 67%।
अपीलों का निपटारा: 1,500 के लक्ष्य की तुलना में 764 अपीलों का निपटारा हुआ, जो लक्ष्य का करीब 51% है।
स्क्रैप (कबाड़) का निपटारा और राजस्व सृजन: 2 अक्टूबर 2026 से अब तक कुल 3,06,026 किलोग्राम स्क्रैप निपटाया गया है, जिससे ₹67.56 लाख का राजस्व मिला है।
ई-कचरा (ई-अपशिष्ट) प्रबंधन: ई-कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर अभियान के फोकस के अनुरूप 17,980 किलोग्राम ई-कचरे का निपटारा किया गया, जिससे ₹27.64 लाख का राजस्व मिला। ये कदम पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जिम्मेदार प्रबंधन और निपटान को लेकर विभाग की प्रतिबद्धता को दिखाते हैं।
नवोन्मेषी पहल: कचरे को संपदा में बदलना
डाक मंडलों (पोस्टल सर्किलों) ने भी रीसाइक्लिंग (पुनर्चक्रण), पुन: उपयोग और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कई नई और रचनात्मक पहलें की हैं।
पश्चिम बंगाल सर्कल में विभागीय बढ़इयों और मल्टी-टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) ने कोलकाता की मेल मोटर सर्विस (एमएमएस) में वरिष्ठ प्रबंधक के कक्ष का नवीनीकरण किया। इस काम में उन्होंने बेकार पड़े लकड़ी के टुकड़ों को दोबारा इस्तेमाल किया। यह पहल "वेस्ट टू वेल्थ" (कचरे से संपदा) की सोच का अच्छा उदाहरण है, जिससे पता चलता है कि बेकार सामग्री का रचनात्मक पुन: उपयोग करके कार्यालय के बुनियादी ढांचे को कैसे सुधारा जा सकता है।
नागरिक-केंद्रित शासन और सेवा वितरण
नागरिक-केंद्रित पहलों के तहत विभाग ने 'डिजीपोस्ट' नाम से एक 'फिजिकल-डिजिटल' (phygital) मेल सेवा शुरू की है। इस सेवा में गुजरात पुलिस द्वारा जारी ट्रैफिक ई-चालान डिजिटल रूप से भेजे जाते हैं और फिर कागजी प्रति के रूप में नागरिकों तक भौतिक रूप से पहुंचाए जाते हैं। यह पहल बताती है कि डाक नेटवर्क अपनी व्यापक भौतिक पहुंच के बल पर डिजिटल रूप से तैयार नागरिक सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
'विशेष अभियान 6' की बाकी अवधि में डाक विभाग अपने प्रयास और तेज करेगा। इसका लक्ष्य तय लक्ष्यों को पूरा करना, स्वच्छता बनाए रखना, ई-कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन करना और जिम्मेदार, कुशल तथा नागरिक-केंद्रित शासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करना है।
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