
केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने नई दिल्ली में इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2026 में "एआई फॉर गुड लैब वर्कशॉप: फ्रॉम स्ट्रैटेजी टू इम्पैक्ट" का उद्घाटन किया। इस कार्यशाया का आयोजन दूरसंचार विभाग (डीओटी), संचार मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम कृत्रिम बुद्धिमत्ता को वैश्विक रणनीतिक चर्चाओं से लेकर व्यावहारिक तैनाती, स्थानीय समाधानों एवं मानव-केंद्रित पैमाने तक पहुंचाने में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ। इस कार्यशाला में कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए, जिनमें अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) के दूरसंचार मानकीकरण ब्यूरो के उपनिदेशक डॉ. बिलेले जमौसी और दूरसंचार विभाग के सचिव श्री अमित अग्रवाल शामिल हैं। इसके अलावा इसमें प्रतिष्ठित शोधकर्ताओं, अन्वेषकों, उद्योग जगत के नेताओं और नीति विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया।
मुख्य घटनाक्रम
सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री सिंधिया ने कहा, "जेनेवा से नई दिल्ली तक 'एआई फॉर गुड लैब' का सफर उस यात्रा को दर्शाता है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता को खुद तय करनी है जिसमें वैश्विक चर्चाओं से लेकर स्थानीय समाधान तक, तकनीकी संभावना से लेकर इंसानों पर प्रभाव तक, और रणनीति से लेकर बड़े पैमाने पर विस्तार तक शामिल हैं। एआई के लक्ष्य और एआई के प्रभाव के बीच की दूरी को कौशल, कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा, संस्थानों एवं कनेक्टिविटी के माध्यम से ही पाटा जा सकता है। आखिरकार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की असली परख उसके मॉडल के आकार या उसके एल्गोरिदम की जटिलता से नहीं बल्कि इस बात से तय होगी कि उसने कितने लोगों की ज़िंदगी को बेहतर बनाया है।"
केंद्रीय मंत्री ने भारत की मार्गदर्शक सोच "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" को दोहराया। उन्होंने कहा कि विश्व में लगभग 2.2 अरब लोग अभी भी ऑफ़लाइन हैं, इसलिए तकनीकी को मानवीय अवसरों को सीमित करने के बजाय उनका विस्तार करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि डिजिटल विभाजन एआई विभाजन में न बदल जाए।
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केंद्रीय मंत्री ने भारत की मार्गदर्शक सोच "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" को दोहराया। उन्होंने कहा कि विश्व में लगभग 2.2 अरब लोग अभी भी ऑफ़लाइन हैं, इसलिए तकनीकी को मानवीय अवसरों को सीमित करने के बजाय उनका विस्तार करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि डिजिटल विभाजन एआई विभाजन में न बदल जाए।
