आगामी ‘खेत बचाओ अभियान’ की तैयारियों का जायजा लेने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की। यह अभियान 22 अक्टूबर से 30 नवंबर, 2026 तक चलाया जाएगा। बैठक में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, उत्तराखंड, राजस्थान, असम, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, बिहार और महाराष्ट्र के कृषि मंत्री शामिल हुए।
बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री अतिश चंद्रा तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट भी उपस्थित रहे।
बैठक में अभियान के उद्देश्यों, मुख्य गतिविधियों, क्रियान्वयन की रणनीति तथा जनभागीदारी से संबंधित लक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा हुई। अभियान का उद्देश्य किसानों में उन्नत कृषि पद्धतियों, संसाधनों के कुशल उपयोग, टिकाऊ खेती और केंद्र सरकार की विभिन्न किसान-केंद्रित योजनाओं को लेकर व्यापक जागरूकता फैलाना है।
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्यों से आग्रह किया कि वे अभियान की सफलता के लिए सक्रिय भागीदारी, प्रभावी समन्वय और जमीनी स्तर पर व्यापक जनसंपर्क सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अभियान को पूरी गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए, ताकि इसकी गतिविधियों का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंच सके।
श्री चौहान ने कहा कि राज्य अपनी सुविधा और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अभियान की गतिविधियों की तिथियां तय कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि अभियान की शुरुआत प्रभावी ढंग से होनी चाहिए और इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जानी चाहिए।
उन्होंने अभियान के सुचारु आयोजन और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला कलेक्टरों को भी आवश्यक निर्देश जारी करने का आह्वान किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अभियान के बेहतर संचालन, निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाने चाहिए।
श्री चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह अभियान केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे पूरी गंभीरता, प्रतिबद्धता और परिणाम पर केंद्रित दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने अभियान में अधिक से अधिक किसानों और अन्य हितधारकों को शामिल करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग प्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रम में भाग नहीं ले सकते, उन्हें प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए अभियान से जोड़ने का प्रयास किया जाना चाहिए, ताकि इसकी पहुंच अधिक से अधिक किसानों तक हो सके।
अभियान के तहत कृषि उत्पादकता बढ़ाने, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और किसानों को सरकारी योजनाओं व सेवाओं का लाभ लेने के प्रति जागरूक करने से जुड़ी कई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
फसल अवशेष प्रबंधन, एकीकृत कीट प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जलवायु-अनुकूल कृषि और तिलहन व दलहन फसलों को बढ़ावा देना अभियान के प्रमुख विषयों में शामिल हैं। साथ ही प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, कृषि यंत्रीकरण और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
उर्वरकों के संतुलित उपयोग, ग्रीन अमोनिया व जैविक आदानों के इस्तेमाल, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, अंतरफसली खेती और उपयुक्त फसलों व किस्मों को अपनाने को लेकर किसानों में जागरूकता बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा धान कटाई के बाद खाली पड़े खेतों के प्रभावी उपयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि भूमि का बेहतर उपयोग हो और फसल सघनता बढ़ सके।
अभियान के दौरान किसान पहचान पत्र (फार्मर आईडी) बनाने, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई), व्यापार समझौतों के लाभ, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत पात्र किसानों को लाभ दिलाने और बीज वितरण जैसे विषयों पर भी विशेष ध्यान रहेगा।
इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कृषि यंत्रों के वितरण तथा किसानों से जुड़ी अन्य अहम पहलों पर जागरूकता गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि किसानों को उपलब्ध सुविधाओं, आधुनिक तकनीकों और सरकारी सहायता की जानकारी मिल सके।
बैठक में अभियान के अंतर्गत प्रस्तावित जनसंपर्क और जागरूकता कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी विचार-विमर्श किया गया। बैठक में रखी गई योजना के मुताबिक, कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (ATMA) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), दोनों के लिए 50-50 लाख प्रतिभागियों तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया गया है।
अभियान के तहत कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और ATMA को मिलाकर कुल 4,150 टीमों का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, 12,000 से अधिक वैज्ञानिकों तथा एटीएमए के अधिकारियों और कार्यकर्ताओं के अभियान में शामिल होने की उम्मीद है। ये कृषि वैज्ञानिक और विस्तार कार्यकर्ता किसानों से सीधे संवाद, तकनीकी मार्गदर्शन और जागरूकता गतिविधियों के जरिए अभियान को प्रभावी बनाने में अपना योगदान देंगे।
अभियान अवधि में प्रतिदिन औसतन दो कार्यक्रम, आयोजन अथवा बैठकें करने का लक्ष्य तय किया गया है। इस हिसाब से पूरे अभियान के दौरान कुल 1.5 लाख बैठकों का लक्ष्य रखा गया है। इन गतिविधियों के जरिए किसानों से सीधा संवाद स्थापित करने, उन्हें वैज्ञानिक जानकारी देने और उन्नत कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित करने पर जोर रहेगा।
उन्नत कृषि तकनीकों का प्रदर्शन, क्षमता निर्माण कार्यक्रम और कृषि वैज्ञानिकों के साथ संवाद अभियान की प्रमुख गतिविधियां होंगी। आईसीएआर और अन्य कृषि संस्थानों के वैज्ञानिकों को भी अभियान से सक्रिय रूप से जुड़ने और किसानों को उपयुक्त तकनीकों व टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के बारे में व्यावहारिक मार्गदर्शन देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में शामिल राज्यों के कृषि मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी की प्रशंसा की। उन्होंने केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और कृषि संस्थानों के संयुक्त प्रयासों पर भरोसा जताया।
उन्होंने सभी राज्यों से अपील की कि वे राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं और अन्य संबंधित हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर अभियान को सफल बनाएं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अभियान को सफल बनाने में कृषि वैज्ञानिकों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका अहम होगी। उन्होंने अभियान का संदेश किसानों तक पहुंचाने, उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देने और किसान-केंद्रित योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के लिए समन्वित प्रयासों पर बल दिया।
