वंदे मातरम् के 150 गौरवशाली वर्ष पूरे होने के अवसर पर शनिवार को आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भोपाल के स्मार्ट सिटी पार्क में सात राज्यों से पहुंचे युवाओं के साथ पौधे लगाए और उनसे सीधी बातचीत की। युवाओं ने विभिन्न मुद्दों पर केंद्रीय मंत्री से सीधे प्रश्न किए, जिनके उत्तर उन्होंने विस्तारपूर्वक दिए। युवाओं से संवाद करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सात राज्यों से आए माई भारत के वालंटियर्स से मिलकर मेरा मन प्रसन्न हो गया। मेरे लिए सबसे खुशी का अवसर युवाओं और बच्चों के बीच रहना है। उनके अनुसार, विकसित भारत के निर्माण हेतु रचनात्मक युवा शक्ति तैयार करने के लिए माई भारत एक बड़ा मंच है। इसका लक्ष्य युवाओं को ऐसा अच्छा नागरिक बनाना है जो केवल अपने लिए नहीं, बल्कि देश और समाज के लिए भी काम करे। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ हुई यह चर्चा और संवाद राष्ट्र निर्माण, युवाओं के चरित्र निर्माण और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिहाज से बेहद उपयोगी है।
MY BHARAT- युवाओं को देश और समाज के प्रति जिम्मेदार बनाने का माध्यम
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, माई भारत जैसे मंच युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का एक अहम जरिया हैं। युवाओं के भीतर रचनात्मक ऊर्जा, सेवा का भाव और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं की सक्रिय भागीदारी से बनेगा। युवा जब अपने निजी हितों के साथ-साथ देश और समाज के हितों के लिए भी काम करेंगे, तभी राष्ट्र मजबूत बनेगा। युवाओं के साथ हुए संवाद को सार्थक बताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम उनके व्यक्तित्व, चरित्र और नागरिक कर्तव्यों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
महिलाओं-बच्चियों के विरुद्ध अपराधों पर कठोरतम दंड जरूरी
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि महिलाओं और बच्चियों के साथ होने वाली दुष्कर्म और छेड़छाड़ की घटनाओं पर रोक लगाने, अपराधियों को जल्द सजा दिलाने और सुरक्षित माहौल बनाने के लिए सरकार और समाज, दोनों स्तरों पर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारे परिवार और संस्कृति में महिलाओं, बहनों और बेटियों का एक विशेष स्थान है। इसीलिए उनके खिलाफ अपराध करने वालों को कठोरतम दंड मिलना चाहिए, ताकि अपराधियों के मन में कानून का डर पैदा हो। उन्होंने कहा कि जब मैं मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री था, तब मासूम बेटियों के साथ दुष्कर्म करने वालों को मृत्युदंड देने के प्रावधान के लिए कानून बनाया गया था। ऐसे जघन्य अपराध करने वाले दरिंदों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भी बेटियों के विरुद्ध जघन्य अपराधों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है। अपराधियों के मन में यह डर होना चाहिए कि यदि उन्होंने ऐसा अपराध किया तो वो कानून से बच नहीं पाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि जघन्य अपराधों में सजा मिलने की प्रक्रिया लंबी होने पर भी विचार करने की जरूरत है। कई मामलों में निचली अदालत से सजा होने के बाद आरोपी उच्च न्यायालय और फिर सर्वोच्च न्यायालय का रुख करते हुए अपील करते हैं। मृत्युदंड के मामलों में इसके बाद दया याचिका का विकल्प भी उपलब्ध होता है। उन्होंने कहा कि इस पर विचार होना चाहिए कि ऐसे जघन्य अपराधों में न्याय की प्रक्रिया को किस तरह तेज किया जा सकता है, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिले।
सोशल मीडिया का उपयोग सोच-समझकर करें तो ये हमारी ताकत है
सोशल मीडिया के उपयोग पर केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सोशल मीडिया जितना उपयोगी है, गलत इस्तेमाल होने पर उतना ही नुकसानदायक भी हो सकता है। सोशल मीडिया के जरिए सही जानकारी, ज्ञान और उपयोगी सूचनाएं कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच सकती हैं, लेकिन झूठी खबरों, अफवाहों और भ्रामक अभियानों से समाज में अशांति और अराजकता भी फैल सकती है। उन्होंने कहा कि इन दिनों सोशल मीडिया पर कुछ अभियान गलत सूचनाएं फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने की इच्छा रखने वालों को जनता के बीच मेहनत करके लोगों का विश्वास जीतना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि फेसबुक, इंस्टाग्राम या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई भी खबर या सूचना साझा करने से पहले उसके तथ्यों की जांच जरूर करें। बिना सोचे-समझे किसी संदेश को आगे भेजने से कई बार विवाद, झगड़े और अशांति की स्थिति बन सकती है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया से दूरी बनाने की बजाय इसका उपयोग ज्ञान, जानकारी और सकारात्मक विचार फैलाने के लिए किया जाना चाहिए। हर सूचना को विवेक और समझदारी से परखना चाहिए और सही-गलत का निर्णय तथ्यों के आधार पर लेना चाहिए। यदि सोशल मीडिया का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाए तो यह हमारी ताकत बनेगा, लेकिन बिना विचार किए इसका उपयोग करने से गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
आदिवासी परिवारों की पीड़ा मुख्यमंत्री के सामने रखी गई
कोसमी के आदिवासी परिवारों की समस्याओं और मांगों को लेकर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आदिवासी भाई-बहनों ने अपनी पीड़ा, तकलीफ, व्यथा और परेशानियां मुख्यमंत्री के समक्ष रखी हैं। उनकी प्रमुख मांग यही थी कि उनकी बात उचित ढंग से सुनी जाए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें न्याय दिलाने का वचन दिया है। आदिवासी परिवारों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनना और उनकी बात पर उचित कार्रवाई करना आवश्यक है।
