पंजाब के मोगा जिले के दौरे के बाद, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सदस्य (तकनीकी) डॉ. टी.एस. पंवार की अगुवाई में एक उच्चस्तरीय दल आज फिरोजपुर और फरीदकोट जिलों के दौरे पर पहुंचा। दौरे का मकसद मौजूदा फसल कटाई सीजन में धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों के जमीनी क्रियान्वयन की समीक्षा करना था।
फिरोजपुर के उपायुक्त (डीसी) कार्यालय में दल ने फिरोजपुर और फरीदकोट के उपायुक्तों व संबंधित जिला अधिकारियों के साथ संयुक्त समीक्षा बैठक की। बैठक में दल ने पराली के इन-सीटू (खेत में) और एक्स-सीटू (खेत से बाहर) प्रबंधन एवं उपयोग को प्रभावी ढंग से सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन की तैयारियों तथा विभागों के बीच तालमेल का जायजा लिया। फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनरी की उपलब्धता व तैनाती, खेत स्तर पर निगरानी, हॉटस्पॉट क्षेत्रों की निगरानी और प्रवर्तन के उपायों की भी समीक्षा हुई।
दल ने पराली के इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन को मजबूत करने, सीआरएम मशीनरी की समय पर उपलब्धता व उसका बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने तथा किसानों, संग्रहकर्ताओं, उद्योगों और अन्य हितधारकों के बीच तालमेल बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। तकनीक आधारित निगरानी और रुझानों के विश्लेषण के लिए ड्रोन और कम लागत वाले सेंसरों की तैनाती की भी समीक्षा की गई। साथ ही, किसानों को पराली जलाने और पीएम 2.5 के नुकसानदेह प्रभावों के बारे में जागरूक करने के प्रयासों का भी जायजा लिया गया।
आयोग ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनों और खेत में ही पराली प्रबंधन की अन्य मशीनरी तक पहुंच दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही धान की पराली के प्रभावी एक्स-सीटू (खेत से बाहर) प्रबंधन के लिए संग्रहकर्ताओं के साथ बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। जिला प्रशासनों को सलाह दी गई कि पराली जलाने की घटनाएं रोकने के लिए वे मशीनरी की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करें और सभी हितधारकों के बीच करीबी तालमेल बनाए रखें।
समीक्षा बैठक के बाद सीएक्यूएम दल ने जमीनी हालात का आकलन करने और पराली जलाने की घटनाएं रोकने से जुड़े उपायों के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए फिरोजपुर और फरीदकोट के चुनिंदा हॉटस्पॉट गांवों का दौरा किया। यह दौरा पंजाब के हॉटस्पॉट जिलों में पराली प्रबंधन से जुड़े उपायों की सीएक्यूएम द्वारा की जा रही लगातार निगरानी और समीक्षा का हिस्सा है। इसका लक्ष्य धान की पराली के इन-सीटू (खेत में ही) और एक्स-सीटू (खेत से बाहर) प्रबंधन को सुदृढ़ करना और क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाना है।
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