पोरबंदर से सांसद और केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने युवाओं से कहा कि वे राष्ट्र-निर्माण में आगे बढ़कर नेतृत्व करें और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पाने में सक्रिय योगदान दें। वे आज गुजरात के पोरबंदर जिले के कुतियाना में स्थित एस. एम. जडेजा आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज में आयोजित 'विकसित भारत युवा संवाद' कार्यक्रम में बोल रहे थे। डॉ. मांडविया ने कहा कि विकसित और नशा मुक्त भारत के निर्माण में युवा नेतृत्व, देशभक्ति, नागरिक दायित्वों और सामूहिक प्रयासों की अहम भूमिका है।
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डॉ. मंडाविया ने वर्ष 2047 में भारत की आजादी के सौ वर्ष पूरे होने तक के 25 वर्षों के 'अमृत काल' की अहमियत बताते हुए कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार करने के लिए नागरिकों की साझा प्रतिबद्धता आवश्यक है। लाल किले से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा रखे गए 'पंच प्रण' का जिक्र करते हुए उन्होंने विकसित भारत के संकल्प, औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति, अपनी विरासत पर गर्व, एकता-एकजुटता और नागरिक कर्तव्यों के पालन की अहमियत समझाई। डॉ. मंडाविया ने युवाओं से अपील की कि वे देश और दुनिया की घटनाओं से अवगत रहें और राष्ट्र की प्रगति में सार्थक भूमिका निभाएं।
भारत की विकास यात्रा में युवाओं की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने उन्हें चरित्र, अनुशासन, सेवा, समर्पण, बड़ों के प्रति आदर, आत्मनिर्भरता और कड़ी मेहनत जैसे गुण अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्र-निर्माण के लिए किसी का आधिकारिक पद पर होना जरूरी नहीं है; हर विद्यार्थी, शिक्षक, कर्मचारी और नागरिक अपने दायित्वों को ईमानदारी से निभाकर और राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखकर इसमें योगदान दे सकता है।
डॉ. मांडविया ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में एक लाख युवा नेता तैयार करने की दिशा में प्रयास चल रहे हैं। उन्होंने युवाओं की भागीदारी, करियर मार्गदर्शन और नेतृत्व विकास के अवसर देने में 'माई भारत' (मेरा युवा भारत) पोर्टल की भूमिका को भी अहम बताया। डॉ. मांडविया ने कहा कि सीमावर्ती गांवों की यात्रा और सियाचिन ग्लेशियर जैसे कठिन स्थानों पर तैनात जवानों से संवाद जैसी पहलें युवाओं में साहस, जिम्मेदारी, देशभक्ति और राष्ट्र-सेवा की भावना जगाने का मौका देती हैं।
डिजिटल युग की चुनौतियों पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने युवाओं से सोशल मीडिया पर कोई भी जानकारी देखते या साझा करते समय सावधानी बरतने को कहा। उन्होंने अफवाहों से दूर रहने, भरोसेमंद समाचार स्रोतों पर विश्वास करने तथा गलत सूचनाओं और राष्ट्रीय एकता व स्थिरता को कमजोर करने के प्रयासों से सतर्क रहने पर जोर दिया।
डॉ. मांडविया ने 'नशा मुक्त भारत' की अहमियत दोहराते हुए युवाओं से नशा मुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश के विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए स्वस्थ और दायित्वपूर्ण युवा पीढ़ी का होना जरूरी है। 'राष्ट्र प्रथम' (नेशन फर्स्ट) के सिद्धांत को अपनाने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने युवाओं से नशा मुक्त समाज बनाने में योगदान देने और वर्ष 2047 तक एक पूर्ण विकसित भारत के लक्ष्य की ओर मिल-जुलकर काम करने का आग्रह किया। इसके लिए उन्होंने 'हम यह करके दिखाएंगे' (वी विल डू इट) का संकल्प लेने का आह्वान किया।
'विकसित भारत युवा संवाद' कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि 'वर्ष 2047 तक विकसित भारत' की यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं को नेतृत्व कौशल, नागरिक मूल्यों और राष्ट्रीय दायित्व की भावना से सशक्त बनाना महत्वपूर्ण है।
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