जम्मू-कश्मीर का दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र धीरे-धीरे कनेक्टिविटी के एक नए युग की ओर अग्रसर हो रहा है। उधमपुर–श्रीनगर–बारामूला रेल लिंक ने घाटी को भारत के रेल नेटवर्क से जोड़ दिया है। इस परियोजना का प्रमुख आकर्षण चिनाब पुल है, जो दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे आर्च पुल है। वंदे भारत रेल सेवाओं के विस्तार से यात्रियों की आवाजाही अधिक सुगम हो रही है। नए माल ढुलाई टर्मिनलों के माध्यम से कश्मीरी सेब, केसर और हस्तशिल्प को राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाया जा रहा है, जिससे किसानों और व्यापारियों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। सड़क परिवहन के क्षेत्र में, सोनमर्ग और ज़ोजिला सुरंगें लद्दाख तक साल भर निर्बाध आवागमन का मार्ग प्रशस्त करने का वादा करती हैं। हवाई संपर्क के क्षेत्र में, श्रीनगर के विस्तारित हवाई अड्डे के साथ ही साथ उधमपुर और किश्तवाड़ में नए हवाई संपर्क केंद्र विकसित करने की पहल की जा रही है।। ये सभी विकास कार्य मिलकर कश्मीर के उत्पादों, व्यापार और पर्यटन को देश की मुख्यधारा से मजबूती से जोड़ रहे हैं।
पुन: जुड़ता हुआ क्षेत्र
जम्मू-कश्मीर का पर्वतीय भूभाग लंबे अर्से से कनेक्टिविटी से संबंधित बुनियादी ढाँचे के विकास की दिशा में एक बड़ी चुनौती रहा है। हालाँकि, बीते कुछ वर्षों में स्थिति में लगातार बदलाव आया है। बुनियादी ढाँचे में निवेश की एक नई लहर ने इस क्षेत्र को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने के तरीकों को नया स्वरूप दिया है। उधमपुर–श्रीनगर–बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना इस विस्तार का प्रमुख हिस्सा है। यह स्वतंत्रता के बाद देश में शुरू की गई सबसे चुनौतीपूर्ण रेलवे परियोजनाओं में से एक है। आज यह भारत की इंजीनियरिंग की उत्कृष्ट उपलब्धियों में से एक के रूप में स्थापित है, जिसने कश्मीर घाटी को रेल मार्ग के माध्यम से देश के बाकी हिस्सों से जोड़ दिया है।
यूएसबीआरएल परियोजना के साथ-साथ सड़कों, सुरंगों और हवाई अड्डों के बुनियादी ढाँचे का भी लगातार विस्तार किया गया है। इस नेटवर्क में अब वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी नई रेल सेवाओं के अतिरिक्त, प्रमुख सड़क गलियारे और सुरंगे भी इसमें शामिल हैं। श्रीनगर में हवाई अड्डे की क्षमता का विस्तार किया जा रहा है, उड़ान योजना के तहत क्षेत्रीय हवाई अड्डों के विकास की योजना है, जिससे यात्रियों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। मल्टीमॉडल कार्गो टर्मिनल और बेहतर माल ढुलाई सेवाएँ पूरे क्षेत्र में वस्तुओं की आवाजाही को सुगम बना रही हैं। इन विकास कार्यों ने जम्मू-कश्मीर में हर मौसम में निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने वाले बुनियादी ढाँचे का लगातार विस्तार किया है।
रेलवे: कश्मीर को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ना
उधमपुर–श्रीनगर–बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) राष्ट्रीय परियोजना
यूएसबीआरएल परियोजना का उद्घाटन जून 2025 में किया गया, जिससे हिमालयी क्षेत्र में कनेक्टिविटी से संबंधित बुनियादी ढाँचे में सुधार हुआ। 43,780 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस परियोजना का विस्तार जम्मू-कश्मीर के उधमपुर, रियासी, रामबन, श्रीनगर, अनंतनाग, पुलवामा, बडगाम और बारामूला जिलों तक है।
यह परियोजना दुर्गम हिमालयी क्षेत्र से होकर 272 किलोमीटर तक फैली है; इसमें कुल 36 सुरंगें शामिल हैं, जिनकी कुल लंबाई 119 किलोमीटर है, और 943 पुल हैं। क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई यह परियोजना दूर-दराज के इलाकों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ती है। इससे आवागमन, व्यापार और पर्यटन के क्षेत्र में नए अवसर खुल रहे हैं। यूएसबीआरएल परियोजना के अंतर्गत 215 किलोमीटर से अधिक सड़कों (एक सुरंग और 320 पुलों सहित) का निर्माण किया गया है, जो स्थानीय समुदायों के लिए उपयोगी हैं। इसके अतिरिक्त, यूएसबीआरएल परियोजना सुरंगों के भीतर और खुले रेल खंडों में भी पूर्ण विद्युतीकृत है।
यूएसबीआरएल परियोजना ने क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके प्रभाव का एक प्रमुख पहलू रोजगार सृजन रहा है। इस परियोजना के माध्यम से रोजगार के 5 करोड़ से अधिक मानव-दिवसों का सृजन हुआ है।
वंदे भारत एक्सप्रेस
चित्र 1 : वंदे भारत एक्सप्रेस, जम्मू और कश्मीर
जम्मू-कश्मीर में वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन पहली बार जून 2025 में कटरा और श्रीनगर के बीच शुरू हुआ। रेल संपर्क को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से, अप्रैल 2026 में श्रीनगर–कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस सेवा का विस्तार जम्मू तवी रेलवे स्टेशन तक किया गया।
अब जम्मू से श्रीनगर तक की यात्रा पाँच घंटे से भी कम समय में पूरी की जा सकती है। ट्रेन में डिब्बों की संख्या 8 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है। इन ट्रेनों को विषम मौसमी परिस्थितियों में संचालन के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इनमें उन्नत परिचालन प्रणालियाँ और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाए गए हैं, जो अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों की परिस्थितियों के अनुकूल हैं।
इस रेल मार्ग पर बर्फ हटाने वाली एक ट्रेन भी उपलब्ध कराई गई है, जो आगे चलकर पटरियों से बर्फ हटाती है और साल भर रेल सेवाओं का संचालन सुनिश्चित करने में मदद करती है। इसके अतिरिक्त, भूकंपीय झटकों को अवशोषित करने के लिए विशेष डैम्पर लगाए गए हैं, जो इस उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में यात्रा को सुरक्षित और आरामदायक बनाने में सहायक हैं।
यूएसबीआरएल परियोजना के अंतर्गत इंजीनियरिंग के अद्भुत नमूने
यूएसबीआरएल परियोजना में कई प्रमुख इंजीनियरिंग उपलब्धियाँ शामिल हैं, जिनमें चिनाब रेल पुल, अंजी खड्ड पुल और T50 सुरंग प्रमुख हैं।
यूएसबीआरएल परियोजना के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे आर्च पुल बनाया गया है। जून 2025 में उद्घाटित चिनाब पुल की लंबाई 1,315 मीटर है। इसके आर्च की लंबाई 467 मीटर है और यह नदी तल से 359 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जो इसे एफिल टॉवर से भी ऊँचा बनाती है। इस पुल को तेज़ भूकंपीय झटकों और शक्तिशाली हवाओं का सामना करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस पुल से होकर वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन शुरू होने से जम्मू – कश्मीर के बीच रेल संपर्क में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
चित्र 2: जम्मू -कश्मीर में चिनाब रेल पुल
चित्र 3: जम्मू -कश्मीर में अंजी खड्ड पुल
अंजी खड्ड पुल भारत का पहला केबल-आधारित रेलवे पुल है, जिसका निर्माण चिनाब नदी की सहायक नदी अंजी नदी की गहरी घाटी के ऊपर किया गया है। अंजी खड्ड पुल यूएसबीआरएल परियोजना का हिस्सा है और इसका उद्घाटन जून 2025 में किया गया था।
यह पुल जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित है। इसे उल्टे ‘Y’ के आकार के 193 मीटर ऊँचे एकल टावर का सहारा दिया गया है, जिससे जुड़े केबल पुल को मजबूती प्रदान करते हैं। इस मुख्य पुल की कुल लंबाई 473.25 मीटर है। इसका डिज़ाइन क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और भूकंपीय चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
चित्र 4: जम्मू-कश्मीर में सुरंग T50
2024 में उद्घाटित T50 सुरंग जम्मू-कश्मीर में खड़ी और सुंबर को जोड़ने वाली 12.77 किलोमीटर लंबी रेल सुरंग है। यूएसबीआरएल परियोजना के अंतर्गत निर्मित यह भारत की सबसे लंबी परिवहन सुरंग है। यह सुरंग कश्मीर घाटी और देश के बाकी हिस्सों के बीच एक महत्वपूर्ण रेल संपर्क प्रदान करती है।
हिमालय की जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस सुरंग का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से किया गया है। सुरंग के निर्माण के दौरान अत्यधिक जल रिसाव, भूस्खलन, भ्रंश क्षेत्रों और दरारयुक्त ज्वालामुखीय चट्टानों जैसी चुनौतियों का सामना किया गया। इस सुरंग में एक मुख्य सुरंग के साथ-साथ एक समानांतर आपातकालीन निकास सुरंग भी बनाई गई है। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन दोनों सुरंगों को प्रत्येक 375 मीटर की दूरी पर आपस में जोड़ा गया है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक 50 मीटर पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी सहायता से केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से सुरंग की निगरानी की जाती है ।
रेलवे के लिए सहायक बुनियादी ढाँचा
जम्मू-कश्मीर में रेल संपर्क को मजबूत बनाने के लिए सहायक बुनियादी ढाँचे और रेल नेटवर्क के विकास में निवेश बढ़ाया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के लिए रेलवे का औसत वार्षिक बजट वर्ष 2009–14 के दौरान 1,044 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2026–27 में 1,086 करोड़ रुपये हो गया है।
भारतीय रेलवे ने रेल विद्युतीकरण का कार्य मिशन मोड में आगे बढ़ाया है, जिसके तहत अब देश के लगभग 99.6% ब्रॉड गेज (बीजी) रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण किया जा चुका है। जम्मू-कश्मीर में मौजूदा संपूर्ण ब्रॉड गेज रेल नेटवर्क विद्युतीकृत है। सभी नई रेल लाइनों और मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स से जुड़ी परियोजनाओं को शुरुआत से ही विद्युतीकरण की व्यवस्था के साथ मंजूरी दी जा रही है और उनका निर्माण भी इसी प्रावधान के तहत किया जा रहा है।
रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास
अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत भारतीय रेलवे के 1,340 स्टेशनों को पुनर्विकास के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें चार स्टेशन जम्मू-कश्मीर में हैं। ये स्टेशन हैं—बडगाम, जम्मू तवी, शहीद कैप्टन तुषार महाजन (उधमपुर) और श्री माता वैष्णो देवी कटरा रेलवे स्टेशन।
अन्य क्षेत्रीय रेलवे पहलें
जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रेलवे संपर्क को मजबूत बनाने के लिए कई परियोजनाएँ प्रस्तावित हैं। इनमें निम्नलिखित परियोजनाएँ शामिल हैं:
जालंधर कैंट–जम्मू तवी के बीच तीसरी रेल लाइन — 216 किलोमीटर
जम्मू और श्री माता वैष्णो देवी कटरा के बीच अतिरिक्त रेल लाइन — 78 किलोमीटर
जम्मू/रियासी और पुंछ के बीच नई रेलवे लाइन — 190 किलोमीटर
सड़कें: सड़क संपर्क को सुदृढ़ बनाना
रेल संपर्क के पूरक के रूप में सड़कें
जम्मू-कश्मीर में रेलवे बुनियादी ढाँचे के साथ-साथ सड़क नेटवर्क का भी विस्तार किया जा रहा है। रेलवे नेटवर्क से बाहर के क्षेत्रों तक अंतिम छोर तक संपर्क सुनिश्चित करने में सड़कें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई-IV) के अंतर्गत अगस्त 2026 में 598.455 किलोमीटर लंबाई की 110 सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई। 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली इन परियोजनाओं से उधमपुर–कठुआ–डोडा–किश्तवाड़ क्षेत्र में 46,972 लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं के अंतर्गत सड़क निर्माण के कई पैकेजों में अपशिष्ट प्लास्टिक के उपयोग का भी प्रावधान किया गया है, जिससे अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल सड़क निर्माण में सहायता मिलती है।
हिमालयी क्षेत्र में सुरंगों का निर्माण भी विकास का एक प्रमुख घटक बन गया है, ताकि हर मौसम में निर्बाध आवागमन सुनिश्चित हो सके, सड़क सुरक्षा में सुधार हो सके और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक आवागमन की क्षमता बढ़ सके।
सोनमर्ग (ज़ेड-मोड़) सुरंग
चित्र 5: सोनमर्ग सुरंग, जम्मू-कश्मीर
सोनमर्ग सुरंग परियोजना, जिसे ज़ेड-मोड़ सुरंग के नाम से भी जाना जाता है, का उद्घाटन जनवरी 2025 में किया गया था। यह 6.4 किलोमीटर लंबी द्विदिशीय सुरंग है, जिसके साथ 6.4 किलोमीटर लंबी समानांतर आपातकालीन निकास सुरंग और 5.5 किलोमीटर लंबी पहुँच सड़क भी है। 2,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित यह सुरंग समुद्र तल से 2,634 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह श्रीनगर से सोनमर्ग होते हुए लेह तक हर मौसम में निर्बाध सड़क संपर्क उपलब्ध कराती है। इसके निर्माण से सड़क के उन हिस्सों को बाईपास करना संभव हुआ है, जो बड़े हिमस्खलनों और भूस्खलनों से प्रभावित होते हैं। यह सुरंग सोनमर्ग को साल भर पर्यटकों के लिए सुलभ बनाकर शीतकालीन पर्यटन, साहसिक खेलों और स्थानीय लोगों की आजीविका को बढ़ावा देती है। ज़ोजिला सुरंग के साथ मिलकर यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-1 के संबंधित खंड की लंबाई 13 किलोमीटर से घटाकर 11.98 किलोमीटर करने में सहायक होगी।
ज़ोजिला सुरंग राष्ट्रीय राजमार्ग-1 पर बालटाल और मीनामर्ग के बीच निर्मित की जा रही 13.153 किलोमीटर लंबी द्विदिशीय सुरंग है। इसका एनएचआईडीसीएल द्वारा किया जा रहा है। समुद्र तल से 2,900 से 3,310 मीटर की ऊँचाई पर स्थित 6,808 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच साल भर हर मौसम में निर्बाध सड़क संपर्क सुनिश्चित करना है। इस परियोजना का निर्माण अक्टूबर 2020 में शुरू हुआ था और जून 2026 में मुख्य सुरंग की खुदाई दोनों छोरों से आगे बढ़ते हुए आपस में जुड़ने के चरण तक पहुँच गई।
चित्र 6: ज़ोजिला सुरंग, जम्मू-कश्मीर
इस सुरंग में आधुनिक वेंटिलेशन प्रणाली, ऑटोमेटिक फायर डिटेक्शन सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी, वेरिएबल मैसेज साइन (वीएमएस) सिस्टम, एससीएडीए सिस्टम तथा अन्य उन्नत सुरक्षा और यातायात प्रबंधन प्रणालियाँ स्थापित की जाएँगी। इस परियोजना में 4.8 किलोमीटर लंबाई वाली दो जुड़वाँ एकदिशीय नीलग्रार सुरंगें, कुल 2.350 किलोमीटर लंबाई वाले आठ कट-एंड-कवर खंड, कुल 810 मीटर लंबाई के चार पुल और 40 पुलियाएँ भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 16.964 किलोमीटर लंबी पहुँच सड़क के किनारे हिमस्खलन से सुरक्षा के लिए हिम सुरंगें, कैच डैम, डिफ्लेक्टर डैम, एयर-ब्लास्ट वॉल्स तथा अन्य सुरक्षात्मक संरचनाएँ बनाई जा रही हैं।
