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भाषिनी और आईआईएससी बेंगलुरु: सौराष्ट्र भाषा के लिए टेक्स्ट-टू-स्पीच मॉडल

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DetailInformation
Date17 October 2026 (Saturday)
Time2:13 PM
Topic / Ministryइलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
Languageहिन्दी · Read in English
Reading time4 min (767 words)

कम संसाधन वाली भारतीय भाषाओं के लिए भाषा प्रौद्योगिकी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) में डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (डीआईसी) के अंतर्गत डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (डीआईबीडी) ने भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएसी), बेंगलुरु के सहयोग से तमिलनाडु में मुख्य रूप से सौराष्ट्र समुदाय द्वारा बोली जाने वाली अल्पसंख्यक हिंद-आर्यन भाषा सौराष्ट्र के लिए टेक्स्ट-टू-स्पीच (टीटीएस) मॉडल विकसित किए हैं।

इस पहल का उद्देश्य उन भाषाओं के लिए वाक् प्रौद्योगिकी की उपलब्धता का विस्तार करना है जिनके पास सीमित डिजिटल संसाधन हैं और डिजिटल अनुप्रयोगों, भाषा सीखने, अभिगम्यता समाधान, प्रलेखन और अनुसंधान में उनके उपयोग को बढ़ावा देना है।

नए विकसित मॉडल वीआईटीएस (वेरिएशनल इंटरफेरेंस विद एडवरसरियल लर्निंग फॉर एंड टू एंड टेक्स्ट-टू-स्पीच) आर्किटेक्चर का उपयोग करते हैं और सीधे टेक्स्ट से सौराष्ट्र स्पीच उत्पन्न करने में सक्षम हैं। इन मॉडलों में पुरुष और महिला दोनों की आवाज़ें शामिल हैं, और प्रत्येक आवाज़ तमिल और सौराष्ट्र दोनों लिपियों में लिखे टेक्स्ट के लिए उपलब्ध है। इससे उपयोगकर्ता सौराष्ट्र भाषा के लिए उपयोग की जाने वाली लिपियों में ही उसके साथ काम कर सकते हैं।

इन मॉडलों को बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान की स्पायर लैब में विकसित किए गए एक विशेष सौराष्ट्र वाक् संग्रह का उपयोग करके प्रशिक्षित किया गया है। इस संग्रह में 28 घंटे से अधिक की लिंग-संतुलित वाक् रिकॉर्डिंग शामिल हैं, जिनमें एक पुरुष और एक महिला वॉयस आर्टिस्ट की रिकॉर्डिंग भी शामिल है। इस संग्रह में रचित वाक्यों के साथ-साथ साहित्य से लिए गए वाक्य भी शामिल हैं, जिनके प्रतिलेख सौराष्ट्र और तमिल दोनों लिपियों में उपलब्ध हैं।

एआईकोष: भाषिनी का एआईकोष प्लेटफॉर्म भारतीय भाषा प्रौद्योगिकियों के विकास में सहायक भाषा डेटासेट और संसाधनों तक पहुंच प्रदान करता है। एसपीआईसीओआर टीटीएस 3.0 सौराष्ट्र कॉर्पस अब एआईकोष पर उपलब्ध है, जिसमें आईआईएससी बेंगलुरु में विकसित 28+ घंटे का लिंग-संतुलित सौराष्ट्र वाक् डेटा शामिल है। इस कॉर्पस में सौराष्ट्र और तमिल दोनों लिपियों में विविध और साहित्यिक सामग्री शामिल है, जो सौराष्ट्र भाषा प्रौद्योगिकियों के विकास में सहायक है।

पुरुष आवाज मॉडल को लगभग 10,000 वाक्यों पर प्रशिक्षित किया गया था, जबकि महिला आवाज मॉडल को लगभग 11,400 वाक्यों पर प्रशिक्षित किया गया था। टीटीएस मॉडल के विकास में सहायता के लिए स्पीच कॉर्पस और संबंधित टेक्स्ट डेटा को सावधानीपूर्वक तैयार और स्पष्ट किया गया था।

ये मॉडल 22,050 हर्ट्ज़ पर ऑडियो उत्पन्न करते हैं और सीधे अक्षर-स्तर के टेक्स्ट पर काम करते हैं, जिससे अलग से फोनेमाइज़र की आवश्यकता समाप्त हो गई है। चारों मॉडलों में दो वक्ता आवाजें शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक तमिल लिपि और सौराष्ट्र लिपि संस्करणों में उपलब्ध है।

2011 की जनगणना के अनुसार, लगभग 2.48 लाख लोगों द्वारा बोली जाने वाली सौराष्ट्र भाषा की डिजिटल उपस्थिति अपेक्षाकृत सीमित है और उपलब्ध वाक् प्रौद्योगिकी संसाधन भी कम हैं। इन मॉडलों का विकास भाषा संरक्षण से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सौराष्ट्र को डिजिटल परिवेश में लाने में सहायक है। यह प्रौद्योगिकी सौराष्ट्र भाषी समुदाय को उनकी भाषा में डिजिटल सामग्री तक पहुंच प्रदान करके, वाक्-आधारित शिक्षण उपकरणों के माध्यम से छात्रों और भाषा सीखने वालों को सहायता देकर और मौखिक डिजिटल सामग्री पर निर्भर उपयोगकर्ताओं के लिए सुगमता में सुधार करके लाभ पहुंचा सकती है। साथ ही, मॉडलों और अंतर्निहित वाक् संसाधनों की उपलब्धता शोधकर्ताओं, विकासकर्ताओं और संस्थानों को शिक्षा, सुगमता और अन्य सार्वजनिक डिजिटल सेवाओं में सौराष्ट्र भाषा की प्रौद्योगिकियों और अनुप्रयोगों को विकसित करने के लिए एक आधार प्रदान करती है।

ये मॉडल सौराष्ट्र टेक्स्ट को जोर से पढ़ने, भाषा सीखने, अभिगम्यता समाधान और कम संसाधन वाले वाक् संश्लेषण में अनुसंधान सहित अनुप्रयोगों का समर्थन कर सकते हैं, साथ ही सौराष्ट्र और अन्य अल्पप्रस्तुत भारतीय भाषाओं के लिए डिजिटल संसाधनों के व्यापक विकास में योगदान कर सकते हैं।

शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग के माध्यम से, भाषिनी भारतीय भाषा डेटासेट, वाक् प्रौद्योगिकियों और एआई-आधारित भाषा समाधानों के लिए परितंत्र को मजबूत करना जारी रखता है, विशेष रूप से उन भाषाओं के लिए जो डिजिटल क्षेत्र में कम प्रतिनिधित्व वाली बनी हुई हैं।

डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (डीआईबीडी) के बारे में

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) में डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (डीआईसी) का डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (डीआईबीडी) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) द्वारा संचालित बहुभाषी डिजिटल समावेशन के लिए एक राष्ट्रीय परितंत्र का निर्माण कर रहा है। भाषिनी 36 भारतीय टेक्स्ट भाषाओं, 23 भारतीय ध्वनि भाषाओं और 35 अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में सहयोग करता है और सरकारी एवं सार्वजनिक डिजिटल सेवाओं में भाषा एआई क्षमताओं के एकीकरण को संभव बनाता है। इसके परितंत्र में अनुवाद, वाक् पहचान, वाक् संश्लेषण, लिप्यंतरण और अन्य भाषा सेवाओं के लिए प्रौद्योगिकियां शामिल हैं, जो भारत की भाषाई विविधता में डिजिटल सूचना और सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने में मदद करती हैं।

पीके/केसी/आरटी/एके/केके

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यह पेज 17 October 2026 को प्रकाशित हुआ था। यह पेज की प्रकाशन तारीख है; लेख में बताई गई घटना की तारीख अलग हो सकती है।

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