सेमिकॉन इंडिया 2026, भारत के प्रमुख सेमीकंडक्टर सम्मेलन का पाँचवाँ संस्करण, आज नई दिल्ली के यशोभूमि में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जो भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास में एक और मील का पत्थर है। "सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम" थीम के तहत 17–19 सितंबर 2026 तक आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 300 अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों सहित 600 से अधिक प्रदर्शकों, 52 देशों के प्रतिनिधियों और 150 से अधिक वक्ताओं ने हिस्सा लिया। जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन का प्रतिनिधित्व करने वाले 6 देश पवेलियन, इसके साथ ही 12 राज्य पवेलियन, एक स्टार्टअप पवेलियन, वर्कफोर्स डेवलपमेंट ज़ोन, इनोवेशन शोकेस और स्टूडेंट हैकथॉन ने सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित किया। इस आयोजन में कुल 51,656 पंजीकरण और कुल मिलाकर लगभग 40,000 लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सेमिकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन किया और नीतिगत चर्चाओं और परियोजना योजना से लेकर सेमीकंडक्टर के व्यावसायिक उत्पादन तक भारत की प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवा चिप डिजाइनरों और छात्रों के साथ संवाद किया तथा मोहाली सीडीआईएल सेमीकंडक्टर और सूरत स्थित सुची सेमीकॉन में व्यावसायिक उत्पादन लाइनों का वर्चुअल उद्घाटन किया। इसके साथ ही, 'सेमिकॉन 1.0' के तहत स्वीकृत 12 परियोजनाओं में से चालू व्यावसायिक सेमीकंडक्टर इकाइयों की संख्या बढ़कर पाँच हो गई है। प्रधानमंत्री ने 'सेमिकॉन 2.0' की ओर बदलाव की रूपरेखा भी प्रस्तुत की, जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में क्षमताओं का विकास करना है। सेमिकॉन 2.0 का परिव्यय 1,27,500 करोड़ रुपये है और यह छह स्तंभों—डिजाइन, मशीन और सामग्री, नई फैब्स, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान और प्रतिभा विकास पर आधारित है।
तीन दिनों के दौरान सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, फैब्रिकेशन, उन्नत पैकेजिंग, उपकरण और सामग्री, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (एचपीसी), अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी), लॉजिस्टिक्स, प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण, कौशल विकास और कार्यबल के विकास से जुड़े 56 एमओयू, घोषणाओं और रणनीतिक पहलों को देखा गया। इस आयोजन के दौरान प्रमुख घोषणाओं में सेमीकंडक्टर निर्माताओं, उपकरण और सामग्री कंपनियों, डिज़ाइन फर्मों, शैक्षणिक संस्थानों और कौशल विकास संगठनों से जुड़े सहयोग और निवेश योजनाएँ शामिल थीं।
