भारत-पोलैंड साझेदारी पर प्रधानमंत्री के वक्तव्य के प्रमुख बिंदु
संयुक्त प्रेस संबोधन में व्यापार, तकनीक और सांस्कृतिक संबंधों पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पोलैंड के प्रधानमंत्री का भारत में स्वागत करते हुए द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की बात कही।
उन्होंने अपनी 2024 की पोलैंड यात्रा और वहां मिले स्वागत का उल्लेख किया। उसी यात्रा में दोनों देशों ने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया था।
मोदी के अनुसार इस आधार पर पिछले दो वर्षों में सहयोग बढ़ा है। ताजा बैठक में साझेदारी को और गहरा करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
उन्होंने कहा कि संबंधों की जड़ें कूटनीति से आगे बढ़कर मानवता और एक-दूसरे के प्रति संवेदना की साझा परंपरा में हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जामनगर और कोल्हापुर के राजपरिवारों ने पोलैंड के बच्चों और परिवारों को आश्रय दिया था। मोदी ने बताया कि पोलैंड में जाम साहब को आज भी दोब्री महाराजा, अर्थात गुड महाराजा, के रूप में सम्मान मिलता है।
2022 में यूक्रेन से भारतीय विद्यार्थियों की सुरक्षित वापसी में पोलैंड की सहायता को उन्होंने इसी भावना का उदाहरण बताया। जाम साहब यूथ एक्सचेंज कार्यक्रम के जरिए भारत आने वाले पोलिश युवा इस ऐतिहासिक संबंध से परिचित हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत और पोलैंड विकास, तकनीक तथा नवाचार के महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहे हैं।
उन्होंने पिछले वर्ष पोलैंड की अर्थव्यवस्था के एक ट्रिलियन डॉलर का स्तर पार करने पर बधाई दी। भारत की पिछली तिमाही की 7.8% वृद्धि का भी उल्लेख किया।
मोदी ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से आर्थिक अवसर बढ़ने की बात कही। समझौता लागू होने पर मशीनरी, रसायन, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात को लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई। रेलवे, मोबिलिटी, उन्नत विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण और जैव प्रौद्योगिकी में पोलिश निवेश आमंत्रित करने की बात भी रखी गई।
पोलैंड के प्रधानमंत्री के साथ आए व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का उल्लेख करते हुए मोदी ने कंपनियों के बीच भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाने पर जोर दिया। दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करना है।
बैठक में रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा संबंधों को मजबूत करने पर सहमति बनी। मोदी ने इन क्षेत्रों में संयुक्त विकास तथा उत्पादन के लिए पोलैंड की कंपनियों को आमंत्रित किया।
उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों और कोयला गैसीकरण में पोलैंड की विशेषज्ञता के साथ नई साझेदारियां विकसित करने का प्रस्ताव रखा।
सूचना प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा में मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए भारत-पोलैंड स्टार्टअप ब्रिज स्थापित करने पर सहमति हुई। उन्होंने पोलैंड में काम कर रही भारतीय आईटी कंपनियों का भी उल्लेख किया।
दोनों देशों के युवाओं के लिए तकनीकी हैकाथॉन आयोजित किए जाएंगे। इनसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर तकनीक, फिनटेक और अन्य उभरते क्षेत्रों में सहयोग तथा नए अवसर बढ़ाने का उद्देश्य है।
मोदी ने सांस्कृतिक संपर्क और लोगों के बीच संबंधों को साझेदारी की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने पोलैंड में संस्कृत और भारतविद्या के अध्ययन की परंपरा की सराहना की।
क्राकोव में स्थापित इंडियन स्टडीज चेयर का उल्लेख करते हुए उन्होंने संस्कृति, शिक्षा, खेल और पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के निर्णय की जानकारी दी।
क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा में लोकतांत्रिक मूल्यों तथा कानून के शासन के प्रति साझा विश्वास रेखांकित हुआ। मोदी ने वैश्विक शासन संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुधार आवश्यक बताया।
यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारत शांति के लिए होने वाले सार्थक प्रयासों का समर्थन करता रहेगा।
प्रधानमंत्री ने साझा इतिहास की मानवीय विरासत और भविष्य में तकनीक तथा नवाचार पर आधारित सहयोग की संभावनाओं को साथ जोड़कर देखा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि पोलैंड के प्रधानमंत्री की यात्रा से रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा मिलेगी और प्रतिनिधिमंडल का दोबारा स्वागत किया।
संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने अतिथियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।
