नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 2026: लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने आज इस बात पर जोर दिया कि पुस्तकें केवल जानकारी का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन को बदलने, दृष्टिकोण को व्यापक बनाने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी ने जानकारी को सहज सुलभ बना दिया है, लेकिन वास्तविक ज्ञान और विवेक पुस्तकों तथा जीवन के अनुभवों से प्राप्त होते हैं। पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं होने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि पढ़ने से न केवल व्यक्ति समृद्ध होता है, बल्कि उसमें जिज्ञासा, संवेदनशीलता और जीवन को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने की क्षमता भी विकसित होती है।
कोच्चि में 29वें कोच्चि अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए श्री बिरला ने पढ़ने की आदत विकसित करने और दूसरों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुस्तकें पीढ़ियों के ज्ञान और अनुभवों को संजोती हैं, व्यक्तियों को प्रेरणा और मार्गदर्शन देती हैं तथा उनमें अनुशासन, दृढ़ संकल्प और उद्देश्य की भावना विकसित करती हैं।
जानकारी और ज्ञान के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए श्री बिरला ने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी ने जानकारी तक पहुँच बढ़ाई है, लेकिन गहरी समझ और संवेदनशीलता विकसित करने के लिए पुस्तकें तथा मानवीय अनुभव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जीवनपर्यंत सीखने पर जोर देते हुए उन्होंने ज्ञान अर्जित करने के लिए जिज्ञासा को आवश्यक बताया और कहा कि पुस्तकें आशा, कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति तथा रचनात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति की प्रेरणा देती हैं।
भारत की असाधारण विविधता का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि देश की विभिन्न भाषाएँ, धर्म, परंपराएँ, विचार और जीवनशैलियाँ उसकी विशिष्ट शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि इन भिन्नताओं के बावजूद भारत एकजुट है और लोकतंत्र देश को एक सूत्र में बाँधने वाली सबसे बड़ी ताकत है। श्री बिरला ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र हमें अलग-अलग मतों और विचारधाराओं का सम्मान करना तथा सौहार्दपूर्वक साथ रहना सिखाता है। उन्होंने यह भी कहा कि विचारों में भिन्नता हो सकती है, लेकिन जब राष्ट्रहित का प्रश्न हो, तो सभी नागरिकों को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।
राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में भाषा और साहित्य की भूमिका पर बोलते हुए श्री बिरला ने कहा कि भाषाएँ लोगों को बाँटती नहीं, बल्कि जोड़ती हैं। उन्होंने देश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक विरासत के संरक्षण तथा संवर्धन में मलयालम, कन्नड़ और तेलुगु सहित भारत की समृद्ध भाषायी परंपराओं के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि लेखकों ने भारत के इतिहास, मूल्यों और लोकतांत्रिक आदर्शों को विश्व तक पहुँचाया है, जबकि डिजिटल माध्यमों से अनुवाद ने भाषायी सीमाओं के पार साहित्य की पहुँच को और व्यापक बनाया है।
शिक्षा, साहित्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में केरलम के योगदान की सराहना करते हुए श्री बिरला ने भारत के प्रथम पूर्ण साक्षर राज्य के रूप में उसकी विशिष्ट उपलब्धि का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ने केरलम के लोगों को देश और विदेश में उत्कृष्ट कार्य करने में सक्षम बनाया है। उन्होंने राज्य की सेवा और त्याग की परंपराओं, विशेषकर विश्वभर में नर्सिंग तथा स्वास्थ्य सेवाओं में यहाँ की महिलाओं के योगदान की प्रशंसा की। केरलम के पुस्तकालय आंदोलन में श्री पी. एन. पणिक्कर के अग्रणी योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि पुस्तकालयों और पढ़ने की आदत ने साक्षरता के प्रसार तथा सामाजिक-आर्थिक विकास में परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। उन्होंने ज्ञान के प्रसार में केरल ग्रंथशाला आंदोलन की भूमिका को रेखांकित किया और 19 जून को मनाए जाने वाले ‘वायना दिनम’ अर्थात् पठन दिवस के माध्यम से पढ़ने को प्रोत्साहित करने के केरलम के निरंतर प्रयासों की सराहना की।
श्री बिरला ने साहित्य से जुड़े विभिन्न पक्षों को एक मंच पर लाने और साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए कोच्चि अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव के आयोजकों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे महोत्सव बौद्धिक संवाद को प्रोत्साहित करते हैं, पढ़ने की आदत विकसित करते हैं और विविध विचारों तक पहुँच प्रदान करते हैं। उन्होंने पुस्तकों और अनुवादों के माध्यम से केरल की समृद्ध साहित्यिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को देश तथा दुनिया तक पहुँचाने के लिए और अधिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने आयोजकों को बधाई दी और आशा व्यक्त की कि कोच्चि अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव अपनी पहुँच का निरंतर विस्तार करेगा, पाठकों की नई पीढ़ियों को प्रेरित करेगा तथा अधिक ज्ञानवान, संवेदनशील और प्रबुद्ध समाज के निर्माण में योगदान देगा।
इस अवसर पर इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ, अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव के अध्यक्ष श्री मधु एस. नायर, श्री प्रकाश बाबू, साहित्य अकादेमी के सचिव डॉ. वरुण गुलाटी सहित अनेक विशिष्ट अतिथि, साहित्यकार और पुस्तक प्रेमी उपस्थित थे।
Technology से जानकारी मिल सकती है, लेकिन ज्ञान और अनुभव का सबसे समृद्ध स्रोत आज भी पुस्तकें हैं। https://t.co/MWG0aLyNRL
पुस्तकें केवल ज्ञान ही नहीं देतीं, बल्कि जीवन में नई सोच, नई ऊर्जा और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती हैं। https://t.co/oomLepQAOR
केरलम की समृद्ध सांस्कृतिक एवं बौद्धिक परंपरा की साक्षी नगरी कोच्चि में 29वें कोच्चि अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव के उद्घाटन समारोह में सम्मिलित होकर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया। पुस्तकें किसी सभ्यता की स्मृति, समाज की चेतना और मानवता के अनुभवों की अमूल्य धरोहर हैं। वे ज्ञान के प्रकाश से व्यक्ति का परिष्कार करती हैं और राष्ट्र की वैचारिक नींव को सुदृढ़ बनाती हैं। विगत 28 वर्षों से यह महोत्सव साहित्य, विचारों के मुक्त आदान-प्रदान तथा भारतीय भाषाओं और नवोदित लेखकों को प्रोत्साहन देने का महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है। साहित्य लोकतंत्र की आत्मा को संवेदना, विवेक और स्वतंत्र चिंतन से समृद्ध करता है। Artificial Intelligence एवं Digital Technology के इस युग में हमें प्रौद्योगिकी को साहित्य का सहयोगी बनाकर ज्ञान और अपनी भाषायी विरासत को नई पीढ़ियों तक पहुँचाना होगा। युवाओं से आग्रह है कि त्वरित सूचनाओं के दौर में पुस्तकों के गहन अध्ययन की परंपरा को जीवंत रखें, क्योंकि पुस्तकें ही विचारों को गहराई और जीवन को व्यापक दृष्टि प्रदान करती हैं। विश्वास है कि ऐसे आयोजन ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को साकार करते हुए विकसित भारत की बौद्धिक एवं सांस्कृतिक चेतना को नई ऊँचाइयाँ प्रदान करेंगे।
