1. हम, ब्रिक्स के सदस्य देशों—ब्राज़ील संघीय गणराज्य, चीन जनवादी गणराज्य, मिस्र अरब गणराज्य, इथियोपिया संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य, भारत गणराज्य, इंडोनेशिया गणराज्य, ईरान इस्लामी गणराज्य, रूसी संघ, दक्षिण अफ्रीका गणराज्य और संयुक्त अरब अमीरात की संसदों के पीठासीन अधिकारी और प्रतिनिधि 26-27 अक्टूबर 2026 को भारत के नई दिल्ली में “जन-केंद्रित विकास हेतु संसदों का सुदृढ़ीकरण” विषय के अंतर्गत आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच (12वाँ ब्रिक्स पीएफ) में एकत्र हुए।
2. हम 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में भागीदार देशों का हार्दिक स्वागत करते हैं और अंतर-संसदीय सहयोग में उनके अमूल्य योगदान की सराहना करते हैं। हम भागीदार देशों के साथ समावेशी, परस्पर लाभकारी और विकासोन्मुखी साझेदारी को प्रगाढ़ बनाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करते हैं तथा साझा हित के क्षेत्रों में ब्रिक्स की गतिविधियों और व्यावहारिक सहयोग में उनकी बढ़ती सहभागिता को प्रोत्साहित करते हैं।
3. हम वर्ष 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए अपना समर्थन व्यक्त करते हैं, जिसका विषय है – “रेजिलिएंस, नवोन्मेष, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी का सुनिश्चय”। यह विषय साझा चुनौतियों का संतुलित, समावेशी और दूरदर्शी दृष्टिकोण से समाधान करने के उद्देश्य से ब्रिक्स सहयोग को सुदृढ़ बनाने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है।
4. हम 12-13 सितम्बर 2026 को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन करने के लिए भारत को बधाई देते हैं और नई दिल्ली नेताओं की घोषणा को अंगीकार किए जाने का स्वागत करते हैं। इसके अलावा, हम वर्ष 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की शेष अवधि के दौरान उसके प्रयासों को अपना पूर्ण समर्थन देने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हैं।
5. हम सहयोग के तीन स्तंभों—राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय तथा सांस्कृतिक एवं जन-जन के बीच आदान-प्रदान—के अंतर्गत सदस्य देशों की संसदों के संबंधित संवैधानिक अधिदेशों और दक्षताओं के अनुरूप ब्रिक्स रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ बनाने के लिए अपने विधायी समर्थन की पुष्टि करते हैं। हम पारस्परिक सम्मान और समझ, समानता, एकजुटता, खुलेपन, समावेशिता और सर्वसम्मति पर आधारित ब्रिक्स भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करते हैं।
6. हम अपने देशों और जनसमुदायों के बीच पारस्परिक समझ, मैत्री और सहयोग को बढ़ावा देने में ब्रिक्स के सांस्कृतिक तथा जन-जन के बीच आदान-प्रदान और पहलों के महत्त्व को दोहराते हैं। इस संदर्भ में, हम भारत की अध्यक्षता के अंतर्गत संस्कृति, खेल, कला, शिक्षा, महिला और युवा मामलों सहित विभिन्न क्षेत्रों में जन-जन के बीच प्रमुख संपर्क कार्यक्रमों के आयोजन का स्वागत करते हैं। हम संस्कृतियों की विविधता के प्रति सम्मान, विरासत तथा नवाचार एवं सृजनात्मकता को समुचित महत्व देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जन-जन के बीच सुदृढ़ आदान-प्रदान एवं सहयोग को संयुक्त रूप से बढ़ावा देने के लिए और अधिक प्रयास किए जाने का आह्वान करते हैं। हम संयुक्त राष्ट्र महासभा के संकल्प ए/आरईएस/78/286 को अंगीकृत किए जाने का भी स्मरण करते हैं, जिसका शीर्षक है – “सभ्यताओं के बीच संवाद का अंतरराष्ट्रीय दिवस”।
7. हम संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित संप्रभु समानता, परस्पर सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करते हैं। ये सिद्धांत वैश्विक स्थिरता, शांति और विकास के लिए आवश्यक आधार हैं।
8. हम स्वीकार करते हैं कि अंतर-संसदीय सहयोग, ब्रिक्स सहयोग ढाँचे का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। यह पारस्परिक समझ को बढ़ावा देने, राष्ट्रों के बीच विश्वास कायम करने, अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान में सहायता करने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने तथा समावेशिता, एकजुटता और सतत विकास के मूल्यों को प्रोत्साहित करने का एक विशिष्ट माध्यम है। इस संबंध में, हम ब्रिक्स संसदीय मंच की भूमिका की पुनः पुष्टि करते हैं और ब्रिक्स संसदीय मंच की पूर्ववर्ती ग्यारह बैठकों द्वारा ब्रिक्स सदस्य देशों की संसदों के बीच अंतर-संसदीय संवाद और सहयोग को सुदृढ़ बनाने में दिए गए महत्त्वपूर्ण योगदान की सराहना करते हैं।
9. हम ग्लोबल साउथ की आवाज़ को सशक्त बनाने के उद्देश्य से अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) सहित अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंचों पर ब्रिक्स के परस्पर सहयोग को सुदृढ़ बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं। इस संबंध में, हम आईपीयू के अंतर्गत ब्रिक्स प्लस भू-राजनीतिक समूह स्थापित करने के प्रस्ताव पर विचार करने की रूस की पहल का संज्ञान लेते हैं।
10. हम 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान हुए रचनात्मक अंतर-संसदीय संवाद का स्वागत करते हैं। इस संवाद में संस्थागत रेजिलिएंस को सुदृढ़ बनाने, विकासशील देशों के समक्ष आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने, अधिक प्रातिनिधिक और समावेशी वैश्विक शासन व्यवस्था को बढ़ावा देने, सस्टेनेबिलिटी को प्रोत्साहित करने तथा सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा, जिसमें सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) भी शामिल हैं, के कार्यान्वयन हेतु सामूहिक वैश्विक कार्रवाई में तेजी लाने में संसदों की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया।
11. हम सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा तथा इसके व्यापक जन-केंद्रित लक्ष्यों और लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए राष्ट्रीय नीतियों और विनियमों के अनुरूप संतुलित एवं एकीकृत दृष्टिकोण से निष्ठापूर्वक कार्य करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करते हैं। हम स्वीकार करते हैं कि अत्यधिक गरीबी सहित सभी रूपों में गरीबी का उन्मूलन, वैश्विक स्तर पर सबसे महत्त्वपूर्ण चुनौती है और सतत विकास के लिए एक पूर्वापेक्षा है। हम 2030 एजेंडा को नवोन्मेषी, समन्वित, पर्यावरण अनुकूल, खुले और साझा दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने के महत्त्व को भी स्वीकार करते हैं। हम 2030 के बाद सतत विकास के लिए वैश्विक एजेंडा को आकार देने में ब्रिक्स देशों के साथ घनिष्ठ सहयोग और उनके सार्थक योगदान की भी अपेक्षा करते हैं।
12. हम जलवायु परिवर्तन से निपटने की तात्कालिक आवश्यकता को स्वीकार करते हुए संवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों (एनडीसी) को लागू करने, जलवायु परिवर्तन के उपशमन और अनुकूलन संबंधी प्रयासों को सुदृढ़ करने तथा न्यायसंगत परिवर्तन के मार्गों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासों को तीव्र करने का आह्वान करते हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य यूएनएफसीसीसी और उसके पेरिस समझौते के लागू होने वाले लक्ष्यों को प्राप्त करना है, जिसमें विभिन्न राष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समानता तथा साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्वों और संबंधित क्षमताओं के सिद्धांत को प्रतिबिंबित किया जाए। विकसित देश अनुकूलन के लिए विकासशील देशों को पारस्परिक रूप से सहमत शर्तों पर अतिरिक्त, पर्याप्त, पूर्वानुमेय और सुलभ वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराएँगे तथा क्षमता निर्माण संबंधी सहायता और प्रौद्योगिकी के विकास एवं हस्तांतरण में सहयोग प्रदान करेंगे।
13. हम आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों (आईसीटी) सहित उभरती प्रौद्योगिकियों की परिवर्तनकारी क्षमता को स्वीकार करते हैं। हम प्रत्येक देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा का सम्मान करते हुए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों के परिवेश के खुले, सुरक्षित, संरक्षित, स्थिर, समान रूप से सुलभ, शांतिपूर्ण और अंतर-संचालनीय उपयोग एवं विकास को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देते हैं।
14. हम स्वीकार करते हैं कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) सभी के लिए आर्थिक विकास और सतत विकास को प्रोत्साहित करने के व्यापक अवसर प्रदान करती है। हम राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और लागू कानूनों के अनुरूप एआई संसाधनों, क्षमता निर्माण, ज्ञान और अवसरों तक समान पहुँच सुनिश्चित करने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्त्व को भी रेखांकित करते हैं। इसके साथ ही, एआई का सुरक्षित, संरक्षित, समावेशी एवं विश्वसनीय विकास और उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, एआई प्रणालियों की ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देना, एआई विज्ञान और नवाचार को प्रोत्साहित करना, आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के लिए एआई का उपयोग करना तथा इससे जुड़े संभावित जोखिमों को कम करना सभी देशों, विशेषकर ग्लोबल साउथ के देशों, के लिए न्यायसंगत, निष्पक्ष, समतापूर्ण और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक होगा। हम व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सुदृढ़ राष्ट्रीय प्रौद्योगिकीय पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करके ब्रिक्स सदस्य देशों की डिजिटल संप्रभुता को सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर बल देते हैं।
15. हम संसदीय शोध, विश्लेषण, जनसंपर्क, नागरिकों के साथ संवाद और उनसे प्राप्त फीडबैक सहित संसदीय कार्यों को सुदृढ़ बनाने में डिजिटल प्रौद्योगिकियों और एआई-आधारित समाधानों के उपयोग की अपार संभावनाओं को स्वीकार करते हैं। हम ब्रिक्स देशों की संसदों को डिजिटल प्रौद्योगिकियों और एआई-सक्षम साधनों के उपयोग से संबंधित सफल उदाहरणों और सर्वोत्तम प्रथाओं को आपस में साझा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, ताकि विधायी संस्थाएं नवोन्मेष कर सकें और प्रौद्योगिकीय प्रगति का समान रूप से लाभ उठा सकें।
16. हम सभी के लिए सार्वभौमिक और सार्थक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं तथा आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन, सार्वजनिक सेवा की बेहतर प्रदायगी और रेजिलिएंस एवं नवोन्मेष को बढ़ाने के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना सहित डिजिटल अवसंरचना की स्थापना और विस्तार को सुगम बनाने हेतु सहयोगात्मक प्रयासों को प्रोत्साहित करते हैं। हम इस संबंध में ब्रिक्स देशों के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना रिपॉजिटरी शुरू करने तथा उनके डिजिटल रूपांतरण के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना समाधानों की प्रायोगिक परियोजनाएं शुरू करने के प्रस्ताव का संज्ञान लेते हैं।
17. हम व्यापक परामर्श, संयुक्त योगदान और साझा लाभ की भावना के अनुरूप अधिक न्यायसंगत, साम्यतापूर्ण, स्फूर्त, प्रभावी, दक्ष, उत्तरदायी, प्रतिनिधिक, वैध, लोकतांत्रिक और जवाबदेह अंतरराष्ट्रीय एवं बहुपक्षीय प्रणाली को बढ़ावा देकर वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करते हैं। हम स्वीकार करते हैं कि बहुध्रुवीयता और बहुपक्षवाद उभरते बाजारों तथा विकासशील देशों (ईएमडीसी) के लिए अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग करने और सार्वभौमिक रूप से लाभकारी, समावेशी, सतत एवं न्यायसंगत आर्थिक वैश्वीकरण तथा सहयोग का लाभ उठाने के अवसरों का विस्तार कर सकते हैं। हम सकारात्मक परिवर्तन के प्रेरक के रूप में ग्लोबल साउथ के महत्त्व को रेखांकित करते हैं तथा स्वैच्छिक विकास सहयोग और क्षमता निर्माण सहित विभिन्न माध्यमों से उसकी चिंताओं और प्राथमिकताओं को अभिव्यक्त करने में ब्रिक्स की भूमिका की पुनः पुष्टि करते हैं।
18. हम सदस्य देशों की संसदों के संबंधित संवैधानिक अधिदेशों और अधिकार-क्षेत्रों के अंतर्गत अधिक प्रतिनिधिमूलक और समावेशी वैश्विक शासन संरचना को आगे बढ़ाने में संसदीय राजनय, अंतर-संसदीय संवाद और सहयोग के योगदान पर बल देते हैं।
19. हम बहुपक्षवाद को सुदृढ़ करने तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। इसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित उद्देश्य एवं सिद्धांत भी शामिल हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानून की अपरिहार्य आधारशिला के रूप में कार्य करते हैं। हम ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका पर बल देते हैं, जिसमें संप्रभु राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने, सतत विकास को आगे बढ़ाने, सभी के लिए लोकतंत्र, मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं के संवर्धन एवं संरक्षण को सुनिश्चित करने तथा एकजुटता, पारस्परिक सम्मान, न्याय और संप्रभु समानता पर आधारित सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए परस्पर सहयोग करते हैं। इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय परिस्थितियों, राष्ट्रीय प्रणालियों की विविधता और विकास के विभिन्न मार्गों का सम्मान किया जाना चाहिए तथा अंतरराष्ट्रीय विधि के अंतर्गत राज्यों के दायित्वों के अनुरूप कार्य किया जाना चाहिए, ताकि पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग के आधार पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक उज्ज्वल साझा भविष्य का निर्माण किया जा सके।
20. हम वर्तमान अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की तात्कालिकता पर बल देते हैं, जिसके लिए बहुपक्षवाद को सुदृढ़ बनाना आवश्यक है, और सुरक्षा परिषद सहित संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार का समर्थन करते हैं। इस सुधार से संयुक्त राष्ट्र को अधिक न्यायसंगत, समतापूर्ण, लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिक, प्रभावी और दक्ष बनाया जाना चाहिए ताकि वह समकालीन वास्तविकताओं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित कर सके। इस संबंध में, हम ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा, 2026 के पैराग्राफ 13 में उल्लखित कथन का स्वागत करते हैं।
