भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण -ट्राई ने सितंबर 2026 तक के दूरसंचार सदस्यता आंकड़े जारी किए हैं। इस रिपोर्ट में देश के दूरसंचार क्षेत्र का समग्र ब्यौरा दिया गया है। इसमें टेलीफोन और ब्रॉडबैंड ग्राहकों की कुल संख्या, मोबाइल और लैंडलाइन कनेक्शनों में बढ़ोतरी तथा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राहकों का विवरण शामिल है। इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में दूरसंचार घनत्व, सक्रिय मोबाइल उपयोगकर्ताओं और मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी -एमएनपी के लिए मिले अनुरोधों को भी दर्शाया गया है।
दूरसंचार सदस्यता आंकड़े
कुल (वायरलेस + वायरलाइन)
मशीन टू मशीन सेल्युलर मोबाइल कनेक्शनों सहित ब्रॉडबैंड ग्राहक (मिलियन में)
मशीन टू मशीन सेल्युलर मोबाइल कनेक्शनों के बिना ब्रॉडबैंड ग्राहक (मिलियन में)
शहरी टेलीफोन ग्राहक (मिलियन में)
सितंबर 2026 में कुल बढ़ोतरी (मिलियन में)
मासिक वृद्धि दर
ग्रामीण टेलीफोन ग्राहक (मिलियन में)
टेलीफोन ग्राहकों की कुल संख्या (मिलियन में)
शहरी ग्राहकों का हिस्सा
ग्रामीण ग्राहकों का हिस्सा
मशीन टू मशीन सेल्युलर मोबाइल कनेक्शनों सहित समग्र दूरसंचार घनत्व@
शहरी दूरसंचार घनत्व@
ग्रामीण दूरसंचार घनत्व@
मशीन टू मशीन सेल्युलर मोबाइल कनेक्शनों के बिना दूरसंचार घनत्व@
सितंबर 2026 के दौरान 16.77 मिलियन ग्राहकों ने मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के लिए अनुरोध किए।
सितंबर 2026 में सक्रिय वायरलेस (मोबाइल) ग्राहकों की संख्या, अधिकतम वीएलआर# वाले दिन, 1,212.80 मिलियन थी। (अधिकतम वीएलआर महीने का वह दिन या समय है जब नेटवर्क पर सबसे ज्यादा संख्या में मोबाइल ग्राहक एक साथ सक्रिय दर्ज किए गए)
* वायरलेस ग्राहक आधार में वायरलेस मोबाइल टेलीफोन ग्राहक (मशीन टू मशीन सेल्युलर मोबाइल कनेक्शनों सहित) तथा फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस ग्राहक वैसे उपभोक्ता वायरलेस तकनीकों से हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा का उपयोग करते हैं।) शामिल हैं।
@ दूरसंचार घनत्व की गणना सितंबर 2020 में प्रकाशित भारत और राज्यों के लिए जनसंख्या प्रक्षेपण पर तकनीकी समूह की रिपोर्ट, 2011–2036 में दिए गए जनसंख्या अनुमानों के आधार पर की गई है।
#वीएलआर का पूर्ण रूप विजिटर लोकेशन रजिस्टर है। सितंबर में विभिन्न दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लिए अधिकतम वीएलआर की तिथियां अलग-अलग सेवा क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं।
– प्रेस विज्ञप्ति में दी गई जानकारी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा ट्राई को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर आधारित है।
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पीके/केसी/आरटी/एकेवी/केएस
