अयान (बदला हुआ नाम) की कहानी बताती है कि सुधार और बदलाव की प्रक्रिया में समय पर इलाज, पेशेवर काउंसलिंग और परिवार का लगातार सहयोग कितना महत्वपूर्ण है।
यह जम्मू-कश्मीर के दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के 25 वर्षीय स्नातक अयान की सफलता की कहानी है। अयान ने दोस्तों के प्रभाव में आकर गांजा लेना शुरू किया था, जिसके बाद उसे लंबे समय तक नशे की लत से जूझना पड़ा।
समय के साथ, नशीले पदार्थों का उनका सेवन हेरोइन की लत में बदल गया और लगभग पाँच सालों तक जारी रहा। इसने उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक रिश्तों और भविष्य की उम्मीदों पर बुरा असर डाला।
इस लंबे संघर्ष के कारण वे समाज से कटने लगे, उनका ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम हो गई, प्रेरणा में भी गिरावट आई और आत्मविश्वास खत्म हो गया। इससे उनके परिवार पर भी काफी भावनात्मक और आर्थिक बोझ पड़ा। नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े उनके व्यवहार ने परिवार के भरोसे को और कम कर दिया, जिससे रिश्तों में भी तनाव आ गया। परिवार के सहयोग से, उन्हें पेशेवर मदद लेने और अपनी सुधार की यात्रा शुरू करने के लिए कुलगाम स्थित एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी भेजा गया।
एटीएफ कुलगाम में, उन्हें चिकित्सा उपचार और निगरानी में नशा छोड़ने के दौरान होने वाली तकलीफों के प्रबंधन के साथ-साथ नियमित मनोवैज्ञानिक परामर्श भी दिया गया। इस इलाज का मुख्य उद्देश्य था, दोबारा नशा करने से रोकना, मुश्किल परिस्थितियों से निपटने के स्वस्थ तरीके सिखाना, भावनाओं को संभालना, सही निर्णय लेना और आत्मविश्वास को फिर से जगाना।
प्रेरणादायक परामर्श और व्यवहार संबंधी सहयोग ने उन्हें नशीले पदार्थों की लत से बाहर निकलने और जीवन जीने के स्वस्थ तरीके अपनाने में मदद की।
मेडिकल टीम, काउंसलरों और उनके परिवार के संयुक्त प्रयासों ने उनके ठीक होने की प्रक्रिया को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। नियमित फॉलो-अप और पुनर्वास के लिए सकारात्मक माहौल ने उन्हें स्थिरता की ओर बढ़ने और समाज में फिर से घुलने-मिलने में मदद की।
आज, वह एक स्वस्थ और अधिक बेहतर जीवन जी रहे हैं, उनका आत्मविश्वास वापस आ चुका है, वह अपने परिवार के साथ फिर से भरोसा कायम कर रहे हैं और एक सकारात्मक भविष्य पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
एटीएफ कुलगाम का अनुभव दिखाता है कि किस तरह सुलभ इलाज, काउंसलिंग और पुनर्वास के जरिए लोग नशे की लत से बाहर निकल सकते हैं और नई उम्मीद व सम्मान के साथ आगे बढ़ सकते हैं।
यह सफलता की कहानी इस बात पर भी जोर देती है कि नशे से प्रभावित लोगों को बिना किसी झिझक या सामाजिक कलंक के डर के, पेशेवर मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना कितना जरूरी है। उनका सफर हमें याद दिलाता है कि सही समय पर हस्तक्षेप, सहानुभूतिपूर्ण सहयोग और ठीक होने के प्रति लगातार प्रतिबद्धता से एक नई शुरुआत संभव हो सकती है।
पीके/केसी/आरटी/एनएस
