सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन (एन ए पी डी डी आर ) का केंद्र नशे की लत से ग्रसित लोगों की रोकथाम, इलाज और पुनर्वास पर है।
असम के करीमगंज जिले के जलालनगर गांव के रहने वाले 30 साल के राहुल शर्मा (नाम बदला हुआ) का सफर बताता है कि कैसे समय पर मदद, प्यार भरी देखभाल और पूरी तरह से ठीक होने से लोगों को मुश्किलों से उबरने और एक सेहतमंद और ज़्यादा आज़ाद ज़िंदगी जीने में मदद मिल सकती है।
पिता की मौत के बाद राहुल को परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभालने के लिए कम उम्र में ही स्कूल छोड़ना पड़ा। पैसे की दिक्कत, भावनात्मक समस्याएं और कम मौकों ने धीरे-धीरे उसकी सेहत पर असर डाला। कुछ समय के आराम की तलाश में उसने दोस्तों के साथ मादक पदार्थ लेना शुरू कर दिया और आखिर उसे नशे की लत लग गई।
इससे उसके स्वास्थ्य, कार्य करने की क्षमता और परिवार वालों के साथ रिश्तों पर असर पड़ा। पैसे की तंगी, समाज में बदनामी और आस-पास की पुनर्वास सेवाओं तक कम पहुंच ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं। इन मुश्किलों के बावजूद, राहुल अपनी ज़िंदगी फिर से बनाना चाहते थे और अपना परिवहन व्यवसाय शुरू करने का सपना पूरा करना चाहते थे।
एक महत्वपूर्ण बदलाव तब आया जब राहुल को एनएपीडीडीआर के अंतर्गत करीमगंज, असम में डब्ल्यूओडीडब्ल्यूआईसीएचईई द्वारा चलाए जा रहे ड्रग डी-एडिक्शन एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर (डीडीएसी) से सहायता मिली। चिकित्सकों, मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता और केंद्र के कर्मचारियों की सहायता से, उन्होंने घर में ही पुनर्वास किया और चिकित्सकीय सेवा, व्यक्तिगत और परामर्श, पारिवारिक परामर्श, संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (सी बी टी), 12-स्तरीय चिकित्सा, योग और धयान किया।
इन पूरी सेवाओं से उन्हें ठीक में मदद मिली तथा अच्छी आदतें बनाने में मदद हुई की उनका विश्वास वापस पाने में मदद हुई । पारिवारिक परामर्श और सामुदायिक पुनर्मिलन सहायता ने उन्हें रिश्ते फिर से बनाने और ज़्यादा सतत भविष्य के लिए तैयार होने में और मदद की।
लगातार सहायता और पक्के इरादे से, राहुल ने धीरे-धीरे अपनी ज़िंदगी पर नियंत्रण वापस पा लिया और अपनी कोशिशों को सही कामों की तरफ मोड़ दिया। आज, वह अपना छोटा सा परिवहन का व्यापार करता है और पहले से ज़्यादा कमाता है। उसकी आय में सुधार से उसकी वित्तीय स्थिति मज़बूत हुई है और वह अपने परिवार की भलाई में ज़्यादा असरदार तरीके से मदद कर पा रहा है। उसका सफ़र दिखाता है कि कैसे इलाज, पुनर्वास और लगातार सहायता मिलने से लोगों को नशे की लत से उबरने और नए विश्वास के साथ अपने सपनों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
राहुल को दी गई मदद यह दिखाती है कि न सिर्फ़ नशे की लत, बल्कि उससे जुड़ी सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए भी पूरी तरह से पुनर्वास कितना ज़रूरी है। एन ए पी डी डी आर के तहत पहलों के ज़रिए, मंत्रालय नशा छुड़ाने की सेवाओं तक पहुँच को मज़बूत करना चाहता है, नशे की लत से मुक्त होने को बढ़ावा देता है और नशे के इस्तेमाल से प्रभावित लोगों को समाज में फिर से बसाने में मदद करना चाहता है। राहुल का अनुभव इस बात पर ज़ोर देता है कि कैसे सही देखभाल और लगातार मदद लोगों को अपनी ज़िंदगी फिर से बनाने, अपनी रोज़ी-रोटी वापस पाने और ज़्यादा सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ने में मदद कर सकती है।
मंत्रालय नशे की लत को दूर करने और एक ज़्यादा स्वस्थ सबको साथ लेकर चलने वाले समाज को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता, जल्दी दखल, इलाज तक पहुंच और सामुदायिक सहायता को बढ़ावा दे रही है।
पीके/केसी/आरटी/एनकेएस
