गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) 'द आभार कलेक्शन' को बढ़ावा दे रहा है। यह एक समर्पित डिजिटल स्टोरफ्रंट है, जहां खास तौर पर चुने गए उपहार और हैंपर (उपहारों के सेट) उपलब्ध हैं, जो देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। इस कलेक्शन में 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) पहल और 'ज्योग्राफिकल इंडिकेशन' (जीआई) टैग से जुड़े उत्पाद शामिल हैं। इससे सरकारी खरीदारों को अलग-अलग क्षेत्रों के खास उत्पादों तक आसान पहुंच मिलती है, साथ ही कारीगरों, बुनकरों, ग्रामीण उद्यमियों और महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को भी समर्थन मिलता है।
इस कलेक्शन में 10 राज्य और केंद्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प एम्पोरियम के 294 उत्पाद कैटलॉग शामिल हैं। इनमें सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज एम्पोरियम का 'कॉटेज', खादी और ग्रामोद्योग आयोग का 'खादी इंडिया', 'गर्वी गुर्जरी' (गुजरात), 'हिमक्राफ्ट्स' (हिमाचल प्रदेश), 'झारक्राफ्ट' (झारखंड), 'कावेरी' (कर्नाटक), 'मृगनयनी' (मध्य प्रदेश), 'मरहाटी' (महाराष्ट्र), 'पूर्बश्री' (पूर्वोत्तर) और 'पूमपुहार' (तमिलनाडु) शामिल हैं।
सात अन्य सरकारी एम्पोरियम और संगठन भी विक्रेता के रूप में जुड़ने की प्रक्रिया पूरी करने के अंतिम चरण में हैं। इसके बाद वे भी 'द आभार कलेक्शन' स्टोरफ्रंट के जरिए अपने चुने हुए उत्पादों को पेश कर सकेंगे। इनमें कॉफी बोर्ड, 'मंजूषा' और 'बिस्वा बांग्ला' (पश्चिम बंगाल), जम्मू-कश्मीर हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट्स मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड, 'मेराकाई' (नागालैंड), 'उत्कलिका' (ओडिशा) और 'पंथोइबी' (मणिपुर) शामिल हैं। इनके उत्पाद कैटलॉग जुड़ने से इस कलेक्शन में क्षेत्रीय विविधता और उत्पादों की रेंज और भी बढ़ेगी।
इस कलेक्शन में हस्तशिल्प, हथकरघा, कारीगरों द्वारा तैयार खाद्य पदार्थ, रसोई के सामान और पर्सनल केयर की चीजें शामिल हैं। यह सरकारी खरीदारों को आधिकारिक समारोहों, सम्मेलनों, राज्य-स्तरीय कार्यक्रमों, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों, कर्मचारियों के सम्मान समारोहों, सेवानिवृत्ति कार्यक्रमों और त्योहारों के मौकों के लिए उपहार चुनने के विकल्प देता है।
'द आभार कलेक्शन' पहल की शुरुआत पर जीईएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री मिहिर कुमार ने कहा कि आभार कलेक्शन स्वदेशी कला और शिल्प की पहचान बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारतीय विरासत और संस्कृति की समृद्ध झलक पेश करता है, और केंद्रीय तथा राज्य-स्तरीय हस्तशिल्प और हथकरघा एम्पोरियम के नेटवर्क के जरिए उन विक्रेताओं को सशक्त बनाता है, जिन्हें अब तक पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाए थे। जुलाई 2024 में 'द आभार कलेक्शन' को लॉन्च करने और मौजूदा अभियान के पीछे के तर्क को समझाते हुए, जीईएम के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सामाजिक समावेशन के प्रभारी, श्री अजीत बी. चव्हाण ने कहा कि इसका उद्देश्य देश के कारीगरों के इकोसिस्टम को जीईएम पर मौजूद #VocalForLocal स्टोरफ्रंट के ज़रिए देश की सार्वजनिक खरीद व्यवस्था से जोड़कर, उन्हें एक प्रभावी बाज़ार उपलब्ध कराना था।
उन्होंने कहा कि यह कलेक्शन विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य सरकारी खरीदारों को अपनी उपहार संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने में मदद करता है, साथ ही स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय आजीविका को भी बढ़ावा देता है।
सरकारी खरीदार https://gem.gov.in/Aabhar पर जाकर इस कलेक्शन को देख सकते हैं और #VocalForLocal गिफ्ट हैम्पर्स खरीदकर देश की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा देने में योगदान दे सकते हैं।
पीके/केसी/आरटी/एचएन/एसएस
