पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में 'मेकेनाइजेशन टेक्नोलॉजी संगोष्ठी 2.0' (एमटीएस 2.0) के पूर्वावलोकन कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन पश्चिमी कमान ने 'सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स' (एसआईडीएम) के सहयोग से किया था।
'चक्र – भविष्य के युद्ध के लिए वर्तमान प्लेटफॉर्म का रूपांतरण' थीम पर आधारित यह संगोष्ठी 14-15 दिसंबर 2026 को चंडीमंदिर मिलिट्री स्टेशन में एसआईडीएम के सहयोग से आयोजित की जाएगी। इसमें भारतीय सेना, रक्षा उद्योग और शिक्षा जगत के हितधारक एकत्रित होंगे, ताकि मशीनीकृत बलों की प्रोद्योगिकीय प्रगति और उनकी क्षमता संवर्धन पर चर्चा की जा सके।
पश्चिमी कमान की इस पहल एमटीएस 2.0 का उद्देश्य वर्तमान सैन्य प्लेटफॉर्म्स को प्रोद्योकीय रूप से उन्नत, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार युद्ध प्रणालियों में बदलकर, मशीनीकृत बलों की युद्ध क्षमता को बढ़ाना है। यह संगोष्ठी युद्ध क्षमता बढ़ाने, प्रोद्योगिकी का उपयोग करने, अनुकूलन क्षमता, काइनेटिक्स (गतिशीलता/प्रहार क्षमता), नवीनीकरण और 'आत्मनिर्भरता' पर केंद्रित होगी। इसमें मुख्य जोर इस बात पर होगा कि कैसे प्रचालनगत कमियों और आवश्यकताओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित 'प्रॉब्लम डेफिनेशन स्टेटमेंट्स' (पीडीएस) में बदला जाए।
पूर्वावलोकन कार्यक्रम में आगामी संगोष्ठी के व्यापक दृष्टिकोण और मुख्य फोकस क्षेत्रों को रेखांकित किया गया। इसमें स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रोद्योगिकी-आधारित आधुनिकीकरण, नागरिक-सैन्य सहयोग और 'आत्मनिर्भरता' के महत्व पर प्रकाश डाला गया। साथ ही, इसने सैन्य उपयोगकर्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों को एक मंच प्रदान किया, ताकि वे वर्तमान प्लेटफॉर्म्स के आधुनिकीकरण, स्वदेशी प्रोद्योगिकीय नवाचार और उभरती प्रचालनगत आवश्यकताओं पर चर्चा कर सकें।
एमटीएस 2.0 रक्षा क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने, प्रोद्योगिकीय बदलाव लाने और आत्मनिर्भरता के प्रति भारतीय सेना की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रचालनगत आवश्यकताओं को व्यावहारिक और लागू करने योग्य प्रोद्योगिकीय समाधानों में बदलने के लिए एक समर्पित मंच प्रदान करने के जरिये इस संगोष्ठी का उद्देश्य सशस्त्र बलों, रक्षा उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना और साथ ही बदलती युद्ध-परिस्थितियों में मशीनीकृत बलों की प्रचालनगत प्रभावशीलता, गतिशीलता और युद्ध की तैयारी में वृद्धि करना है।
पीके/केसी/आरटी/एसकेजे/एसएस
