गुवाहाटी में शिल्प समागम मेले (एसएसएम) से स्थानीय लोगों में उत्साह भर रहा है और हज़ारों दर्शकों ने भारत की पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की समृद्ध और अलग-अलग तरह की विरासत देखी है।
21 अक्टूबर को शुरू हुआ यह मेला असम की राजधानी गुवाहाटी में लगातार पांचवे दिन आस पास के इलाकों से लोगों को अपनी ओर खींच रहा है।
इसके अलावा, दुकानदार अच्छी आय कमा रहे हैं क्योंकि मेले में आने वाले दर्शकों को अलग-अलग तरह के विशिष्ट और रंगीन हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद खरीद रहे हैं। मेला यहां आए ग्राहकों को सीधे उत्पाद खरीदने का मौका देता है जिससे महिलाओं और दूसरे कारीगरों को अपनी आय बढ़ाने में मदद मिलती है।
गुवाहाटी में फार्म गेट, खानापारा में 08 दिनों का शिल्प समागम मेला 2026 जारी। यह सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक आम लोगों के लिए खुला रहेगा।
यह मेला सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान आयोजित किए जा रहे शिल्प समागम मेला श्रृंखला का दूसरा मेला है।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह मेला भारत की पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा और उत्पादों की समृद्ध और अलग-अलग तरह की विरासत को दिखाता है। उन्होंने कहा कि यह मेला पूर्वोत्तर राज्यों समेत पूरे देश के कारीगरों को एक साथ ला रहा है।
अधिकारी ने बताया कि मेला 28 अक्टूबर बुधवार तक चलेगा।
उन्होंने कहा कि मेला देखने आये लोग पारंपरिक उत्पादों की अलग-अलग रेंज देख रहे हैं, ताकि उत्पादों को खरीद सकें और कारीगरों को सहायता कर सकें।
अधिकारी ने कहा कि दर्शक पूर्वोत्तर राज्यों के कलाकारों के पारंपरिक संगीत और नृत्य कार्यक्रम भी देखते हैं और उनका आनंद लेते हैं।
शिल्प समागम मेला गुवाहाटी में संगीत और नृत्य प्रस्तुतियाँ देखते आगंतुक
अधिकारी ने कहा कि मेले में 31 महिला कारीगरों समेत कुल 75 कारीगर हिस्सा ले रहे हैं जो लगभग 40 तरह के हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद दिखा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह मेला इसमें हिस्सा लेने वाले कारीगरों को एक ऐसा मंच दे रहा है जहाँ वे अपने उत्पादों को सीधे दर्शकों के सामने दिखा सकते हैं और बेच सकते हैं। इस तरह नए ग्राहक जुड़ सकते हैं और बाजार तक अपनी पहुँच बढ़ाने के मौके ढूंढ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कारीगरों और ग्राहकों के बीच सीधी बातचीत को आसान बनाकर, मेले का उद्देश्य बाजार तक पहुंच को मजबूत करना, उद्यमिता को बढ़ावा देना और भाग लेने वाले कारीगरों के लिए आय को बेहतर करना है।
अधिकारी ने कहा कि गुवाहाटी संस्करण में भारत के अलग-अलग इलाकों को दिखाने वाले पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की एक बड़ी श्रृंखला है।
उन्होंने कहा कि देश के दूसरे हिस्सों के कारीगरों के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों के कारीगरों के शामिल होने से आगंतुकों को भारत की कलात्मक परंपराओं, भारतीय कारीगरी और सांस्कृतिक विरासत की विविधता को देखने का मौका मिलेगा।
उन्होंने कहा कि इस मेले का उद्देश्य उन कारीगरों हुनर और कारीगरी को बढ़ावा देना है, जिनका काम पारंपरिक ज्ञान और हस्तशिल्प के तरीकों को बचाने में मदद करता है।
अधिकारी ने आगे कहा कि मेले का मुख्य केंद्र भारत-ट्यूलिप (पारंपरिक कारीगरों का उत्थान आजीविका कार्यक्रम) को बढ़ावा देना है। यह एक पहल है जिसका उद्देश्य लक्षित समूह के कारीगरों के बनाए उत्पादों को दुकानों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के ज़रिए बिक्री के लिए आसान बनाना है।
बड़े बाजार और डिजिटल चैनल तक पहुंच को बढ़ावा देकर, इस पहल का उद्देश्य बाज़ार तक पहुंच को मजबूत करना, ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाना और कारीगरों के लिए अपनी कमाई बढ़ाने के और मौके बनाना है।
उन्होंने कहा कि यह कारीगरों और उनके उत्पादों को बदलते उपभोक्ता बाज़ार से जोड़कर पारंपरिक कला और शिल्प के बचाव और उसे बढ़ाने में भी मदद करता है।
शिल्प समागम मेला (एसएसएम-2026) मंत्रालय की एक ज़रूरी पहल है। इसका मकसद अपने तीन राष्ट्रीय राष्ट्रीय संस्था: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्तीय एवं विकास निगम (एन एस के एफ डी सी ), और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एन बी सी एफ डी सी ) से जुड़े कारीगरों और लाभार्थियों को विपणन सहायता देना है।
एस एस 2026 का पहला संस्करण 19 अक्टूबर को मैसूर में समाप्त हुआ। इसमें कर्नाटक के मैसूर के दशहरा प्रदर्शनी मैदान में नौ दिनों तक चले मेले में हजारों लोग आए।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर , यह मेला अनुसूचित जातियों (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), सफाई मित्रों और विमुक्त जनजातियों (डीएनटी) से संबंधित कारीगरों के आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा दे रहा है।
यह मेला इन समुदायों को अपनी हुनर दिखाने, अपने उत्पादों को बेचने के तरीकों और सतत आय के मौकों के ज़रिए अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता को मज़बूत करने के लिए एक खास मंच दे रहा है।
पारंपरिक उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के अलावा, यह मेला आगंतुकों और हिस्सा लेने वाले समुदायों के बीच मंत्रालय और उसके तीन राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा लागू की गई कल्याण, वित्तीय मदद और विकास योजनाओं के बारे में जागरूकता पैदा कर रहा है।
अधिकारी ने कहा कि यह पहल वित्तीय एवं विकास सहायता के साथ बाज़ारोन्मुखी पहल भी दे रही है, जिससे कारीगर अपने पारंपरिक हुनर और कारीगरी को आय के अच्छे मौकों में बदल सकेंगे।
यह बताना ज़रूरी है कि शिल्प समागम मेला जैसी पहलों के ज़रिए, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, आर्थिक तंगी वाले समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अपनी कोशिशों को आगे बढ़ा रहा है। इसके लिए वह उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा है, बाजार तक पहुँच आसान बना रहा है और सतत आय के साधनों में मदद कर रहा है।
यह मेला हिस्सा लेने वाले कारीगरों के बारे में लोगों को बता रहा है, उनके उत्पादों के बारे में जानकारी बढ़ा रहा है और भारत की समृद्ध हस्तशिल्प और हथकरघा परंपराओं के साथ लोगों के ज़्यादा जुड़ाव को बढ़ावा दे रहा है।
पीके/केसी/आरटी/एनकेएस/एसएस
