इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय Read in English

डिजिटल इंडिया के ‘भाषिणी’ विभाग ने आईआईटी दिल्ली में आयोजित ईटीडी-2026 में, सुलभ शोध के लिए बहुभाषी एआई समाधान प्रदर्शित किए

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Date24 October 2026 (Saturday)
Time8:45 PM
Topic / Ministryइलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
Languageहिन्दी · Read in English
Reading time6 min (1,073 words)

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी) के अंतर्गत 'डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन' (डीआईसी) की 'डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन' (डीआईबीडी) ने 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में आयोजित 'इलेक्ट्रॉनिक थीसिस और डिसर्टेशन पर 29वें अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी' (ईटीडी-2026) में भाग लिया। डीआईबीडी की ओर से सुश्री बैशाली चक्रवर्ती ने 'भाषिणी' (BHASHINI) की बहुभाषी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमताओं और विभिन्न भाषाओं में विद्वतापूर्ण ज्ञान को अधिक सुलभ बनाने की उनकी संभावनाओं पर एक सत्र का संचालन किया।

“एआई भाषिणी पर कार्यशाला: दूरियों को पाटना और उत्पादकता बढ़ाना” शीर्षक वाले इस सत्र में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि कैसे भाषिणी का ‘लैंग्वेज-फर्स्ट डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (डीपीआई), उच्च शिक्षण संस्थानों, पुस्तकालयों और शोध भंडारों को भाषा संबंधी बाधाओं को दूर करने और शैक्षणिक सामग्री तक पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकता है।

सत्र के दौरान, सुश्री चक्रवर्ती ने दिखाया कि कैसे वॉयस-फर्स्ट मल्टीलिंगुअल एआई, स्पीच-टू-टेक्स्ट, अनुवाद, ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (ओसीआर) और दस्तावेज अनुवाद अकादमिक और अनुसंधान संस्थानों में बहुभाषी पहुंच को बढ़ावा दे सकते हैं। श्रुतलेख के एक लाइव प्रदर्शन में एक साथ अनुवाद के साथ रीयल-टाइम स्पीच ट्रांसक्रिप्शन दिखाया गया, जिससे व्याख्यान कक्षों, अनुसंधान सेमिनारों, सम्मेलनों और अकादमिक चर्चाओं में इसके संभावित अनुप्रयोगों का पता चलता है।

सत्र में भाषिणी के व्यापक मल्टीलिंगुअल एआई इकोसिस्टम पर भी प्रकाश डाला गया, जो भाषा प्रौद्योगिकी के विभिन्न उपयोगों को समर्थन देने के लिए भाषा डेटासेट, एआई मॉडल, एपीआई और अनुप्रयोगों को एक साथ लाता है। भाषिणी ने 10 अरब से अधिक संचयी एआई अनुमान दर्ज किए हैं और यह टेक्स्ट के लिए 36 भारतीय भाषाओं, वॉयस के लिए 23 भारतीय भाषाओं और 35 अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करता है। इसका वेबसाइट अनुवाद प्लगइन 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों पर बहुभाषी पहुंच को सक्षम बनाता है।

सत्र मुख्य रूप से लंबे और विशेष शैक्षणिक दस्तावेजों सहित इलेक्ट्रॉनिक थीसिस और शोध प्रबंध (ईटीडी) तक एआई-आधारित अनुवाद का विस्तार करने की क्षमता पर केंद्रित था। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के लिए विकसित एक दस्तावेज़ अनुवाद कार्यक्षेत्र, भाषिणी प्रगति को संरचित दस्तावेज अनुवाद और समीक्षा के एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया था। कार्यक्षेत्र गुणवत्ता जांच और डेटा सुरक्षा विचारों के साथ बड़े दस्तावेजों के प्रसंस्करण का समर्थन करता है, जिनमें 100 से 500 पृष्ठों तक के दस्तावेज भी शामिल हैं।

इस दौरान, इस पर भी चर्चा की गई कि कैसे इसी तरह के वर्कफ्लो को इन्फ्लिबनेट द्वारा संचालित शोधगंगा जैसे अनुसंधान रिपॉजिटरी के साथ-साथ विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है। इस तरह के समाधान दस्तावेज संरचना, विशेष शब्दावली और अर्थ को संरक्षित करते हुए थीसिस, शोध प्रबंध, शोध रिपोर्ट और अन्य विद्वतापूर्ण सामग्री को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं।

इस अवसर पर, डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (डीआईबीडी) के वरिष्ठ प्रबंधक (वित्त) हर्षद शर्मा ने कहा, "भारतीय भाषाओं में शोध और विद्वतापूर्ण ज्ञान को सुलभ बनाना, एक अधिक समावेशी ज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भाषिणी की दस्तावेज अनुवाद और स्पीच टेक्नोलॉजी जैसी बहुभाषी एआई क्षमताएं विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों और शोध रिपॉजिटरीज को व्यापक लोगों तक पहुंचने में मदद कर सकती हैं। शैक्षणिक संस्थानों के साथ जुड़ना उनकी जरूरतों को समझने और थीसिस, शोध-प्रबंधों तथा अन्य शोध सामग्री तक बहुभाषी पहुंच के लिए विश्वसनीय समाधान विकसित करने में अहम होगा।"

बातचीत के दौरान, प्रतिभागियों ने पीडीएफ दस्तावेजों के तुरंत अनुवाद और विशेष शैक्षणिक तथा वैज्ञानिक सामग्री के लिए एआई अनुवाद की विश्वसनीयता के बारे में सवाल उठाए। सुश्री चक्रवर्ती ने डोमेन-विशिष्ट मशीन अनुवाद को मानवीय समीक्षा और गुणवत्ता के साथ जोड़ने के महत्व पर चर्चा की। चर्चा में शोध संगठनों के साथ काम करने के अवसरों पर भी बात हुई, ताकि उनकी जरूरतों को समझा जा सके और उनके शोध भंडारों तथा शैक्षणिक क्षेत्रों के अनुकूल विशेष समाधान विकसित किए जा सकें।

सत्र में स्कैन किए गए दस्तावेजों और छवियों से पाठ निकालने, शब्द उद्यान के माध्यम से शब्दावली प्रबंधन और लिपियों में तकनीकी शब्दों, नामों और अभिव्यक्तियों को संरक्षित करने में मदद करने के लिए लिप्यंतरण के लिए ओसीआर में भाषिणी की क्षमताओं को शामिल किया गया। ये क्षमताएं वर्कफ्लो का समर्थन कर सकती हैं जो अकादमिक दस्तावेजों की भाषाई और प्रारूपण आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अनुसंधान सामग्री की पहुंच और खोज क्षमता में सुधार करती हैं।

अनुवाद से परे, सत्र में भाषादान, भाषिणी की नागरिक-योगदान पहल पर प्रकाश डाला गया, जो भाषण और पाठ योगदान, ऑडियो ट्रांसक्रिप्शन और छवियों और दस्तावेजों से पाठ निष्कर्षण के माध्यम से भाषा संसाधनों को बनाने और समृद्ध करने में मदद करता है। ग्रंथिका को पुस्तकों, पांडुलिपियों, साहित्यिक कार्यों, लोक कथाओं और मौखिक इतिहास को डिजिटल बनाने और संरक्षित करने के लिए एक उपकरण के रूप में भी प्रस्तुत किया गया था, जो भारत के बहुभाषी ज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए डिजिटल संसाधनों के विकास में योगदान देता है।

भाषिणी ने उच्च शिक्षा संस्थानों, अनुसंधान रिपॉजिटरी, पुस्तकालयों और शैक्षणिक संगठनों को प्राथमिकता वाले उपयोग के मामलों की पहचान करने, डोमेन-विशिष्ट भाषा संसाधनों को विकसित करने और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार अनुवाद वर्कफ्लो को अनुकूलित करने में सहयोग का पता लगाने के लिए आमंत्रित किया। इस तरह की सहभागिता रिपॉजिटरी केंद्रित आवश्यकताओं को पूरा करने, मानव सत्यापन के माध्यम से अनुवाद की गुणवत्ता को मजबूत करने और भारत के विद्वानों के आउटपुट तक बहुभाषी पहुंच का विस्तार करने में मदद कर सकती है।

ईटीडी-2026 में भाषिणी की भागीदारी सार्वजनिक डिजिटल संसाधन के रूप में भाषा प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने के इसके व्यापक उद्देश्य को दर्शाती है। शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान रिपॉजिटरी के साथ जुड़ाव विद्वानों के संचार के लिए बहुभाषी एआई क्षमताओं का विस्तार करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे अनुसंधान और ज्ञान को भाषाई सीमाओं के पार दर्शकों तक पहुंचने में मदद मिलती है।

डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (डीआईबीडी) के बारे में

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी) के अंतर्गत, डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (डीआईसी) का 'डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन' (डीआईबीडी), भारत के 'लैंग्वेज-फर्स्ट' (भाषा-प्रधान) डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को आगे बढ़ा रहा है, ताकि डिजिटल सेवाओं तक कई भाषाओं में पहुंच संभव हो सके। भाषिणी, सरकारी विभागों, डेवलपर्स, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों को बहुभाषी एआई समाधान बनाने में मदद करने के लिए भाषा डेटासेट, एआई मॉडल, एपीआई और एप्लिकेशन को एक साथ लाता है। यह 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को सपोर्ट करता है, 10 अरब से अधिक एआई अनुमान करने में सक्षम है और टेक्स्ट के लिए 36 भारतीय भाषाओं, वॉयस के लिए 23 भारतीय भाषाओं तथा 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करता है। इस तरह, यह पूरे भारत के डिजिटल इकोसिस्टम में भाषा प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ा रहा है।

पीके/केसी/आरटी/एमपी

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