भारतीय संसद 26 अक्टूबर 2026 को 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच (BRICS Parliamentary Forum) की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है।
दो दिवसीय इस मंच के शुभारंभ से पूर्व, लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने रूसी संघ की फेडरल असेंबली के स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष महामहिम श्री व्याचेस्लाव वोलोडिन के नेतृत्व वाले रूसी संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ एक द्विपक्षीय बैठक की।
बैठक के दौरान, भारतीय और रूसी संसदीय प्रतिनिधिमंडलों ने वैश्विक मंचों पर सहयोग को मजबूत करने और आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। भारतीय संसद और 1.4 अरब भारतीयों की ओर से श्री वोलोडिन और उनके प्रतिनिधिमंडल का हार्दिक स्वागत करते हुए श्री बिरला ने भारत और रूस के बीच आपसी विश्वास, सम्मान और साझा आकांक्षाओं पर आधारित विशेष एवं समय की कसौटी पर खरी उतरी मित्रता को रेखांकित किया। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में रूस के निरंतर समर्थन की भी सराहना की और इस बात पर बल दिया कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के प्रति एकजुटता और संकल्प प्रदर्शित करना चाहिए तथा वैश्विक शांति के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
यह उल्लेख करते हुए कि 2027 में दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों के 80 वर्ष पूरे कर लेंगे, उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में 'भारत-रूस विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' (India-Russia Special and Privileged Strategic Partnership) और अधिक मजबूत हुई है।
संसदीय कूटनीति के महत्व पर जोर देते हुए श्री बिरला ने 'भारत-रूस अंतर-संसदीय आयोग' (India-Russia Inter-Parliamentary Commission) की नियमित बैठकों और संसदीय प्रतिनिधिमंडलों, विशेष रूप से युवा और महिला सांसदों के आदान-प्रदान के माध्यम से लोकसभा और स्टेट ड्यूमा के बीच निरंतर संस्थागत जुड़ाव का आह्वान किया।
2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का संदर्भ देते हुए श्री बिरला ने जन-केंद्रित (people-centric) दृष्टिकोण के महत्व पर बल दिया और ब्रिक्स संसदों के बीच सहयोग को मजबूत करने में रूस से सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद सहित समकालीन वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को बदलते वैश्विक परिवेश के प्रति अधिक उत्तरदायी बनाने के महत्व पर जोर दिया। श्री बिरला ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों की आवश्यकता को भी दोहराया और परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए रूस के निरंतर समर्थन के प्रति आभार व्यक्त किया।
बैठक के दौरान, श्री बिरला ने परमाणु ऊर्जा, उद्योग तथा अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के अवसरों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जनता के बीच आपसी संपर्कों (people-to-people contacts) को द्विपक्षीय संबंधों के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि भारत और रूस के लोगों के बीच गहरा स्नेह और सद्भावना, सहयोग के और अधिक विस्तार के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है।
व्यापार, उद्योग और कृषि के क्षेत्र में सहयोग के बढ़ते दायरे का उल्लेख करते हुए स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष महामहिम श्री व्याचेस्लाव वोलोडिन ने संयुक्त व्यापार उपक्रमों (joint business ventures) को बढ़ावा देने तथा द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों सहित स्टेट ड्यूमा और भारत की संसद के बीच नियमित आदान-प्रदान के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने सांस्कृतिक और मानवीय क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने तथा दोनों देशों की जनता के बीच आपसी संपर्क को प्रगाढ़ करने के प्रति रूस की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत-रूस संबंधों के भविष्य के प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि निरंतर संसदीय जुड़ाव और विभिन्न क्षेत्रों में घनिष्ठ सहयोग दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को और गहरा करने में योगदान देगा।
बाद में, श्री बिरला ने क्यूबा, मिस्र और बेलारूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों से भी मुलाकात की ।
सोमवार को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे और आए हुए प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे।
यह मंच "जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना" (Strengthening Parliaments for People-Centric Development) के मुख्य विषय (overarching theme) पर विचार-विमर्श करेगा। यह लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation) और स्थिरता (Sustainability) विषयों पर आधारित चार उच्च स्तरीय सत्रों के माध्यम से सर्वसम्मति-आधारित संवाद को सुगम बनाएगा।
इसके अतिरिक्त, ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों की संसदों की अंतर्राष्ट्रीय मामलों की समितियों के अध्यक्षों की एक विशेष बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें संसदीय कूटनीति, क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम प्रथाओं (best practices) के आदान-प्रदान पर चर्चा होगी।
उच्च स्तरीय पूर्ण सत्रों, समानांतर बैठकों और द्विपक्षीय वार्ताओं के साथ-साथ सम्मेलन में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया जाएगा। भारत के उपराष्ट्रपति विशिष्ट अतिथियों के सम्मान में रात्रिभोज (banquet) की मेजबानी करेंगे।
सम्मेलन का समापन 27 अक्टूबर 2026 को होगा।
Had a warm and fruitful meeting with H.E. Mr Vyacheslav Volodin, Chairman of the State Duma of the Federal Assembly of the Russian Federation, ahead of the 12th BRICS Parliamentary Forum 2026. The enduring bonds of friendship, mutual trust and understanding between India and Russia form the bedrock of our longstanding partnership. As our two nations mark 80 years of diplomatic relations, we reaffirmed our commitment to further deepening the India–Russia Special and Privileged Strategic Partnership, rooted in mutual respect, trust and shared aspirations. We discussed expanding parliamentary cooperation through sustained institutional engagement between Lok Sabha and the State Duma, regular exchanges of parliamentary delegations, and greater interaction among young and women parliamentarians. I also shared India’s initiatives to leverage technology, including Sansad Bhashini, to make parliamentary proceedings more accessible, inclusive and citizen-centric. We also exchanged views on strengthening cooperation among BRICS Parliaments, combating terrorism through concerted international efforts, and advancing reforms of the United Nations Security Council. I conveyed my appreciation for Russia’s continued support for India’s permanent membership of the Council. I am confident that stronger parliamentary engagement will impart fresh momentum to our time-tested partnership, further reinforcing the deep-rooted friendship and close ties between India and Russia. #BRICS2026 #BRICSParliamentaryForum
