गोवा के राज्यपाल श्री पुसापति अशोक गजपति राजू ने आज गोवा विधानसभा भवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित रजत जयंती समारोह का उद्घाटन किया।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि सशक्त लोकतंत्र संवाद, विविध विचारों और सार्थक जनभागीदारी पर आधारित होता है। यह उल्लेख करते हुए कि विधानमंडल चर्चा, संवाद, बहस और विविध विचारों के आदान-प्रदान के मंच हैं, उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तब अधिक मजबूत होता है जब सहमति के साथ-साथ असहमति के लिए भी स्थान होता है और जब विधायी प्रक्रिया में विविध दृष्टिकोण शामिल किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक ताकत अपनी संस्थाओं की विविध विचारों और दृष्टिकोणों को समाहित करने की क्षमता पर निर्मित हुई है।
वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कद का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि भारत के लोकतांत्रिक अनुभव और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता ने विश्व में देश की आवाज को मजबूत किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 'वसुधैव कुटुंबकम' के सभ्यतागत मूल्यों को अपनाते हुए वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने में योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की ताकत अंततः इस बात में दिखाई देनी चाहिए कि लोगों की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को नीतियों, कानूनों और प्रभावी शासन में किस प्रकार परिवर्तित किया जाता है। उन्होंने गोवा जैसे छोटे राज्यों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की विशेष जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया, जहां प्रतिनिधियों और नागरिकों के बीच सीधा संवाद होता है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने मतदाताओं की आकांक्षाओं, कठिनाइयों और चुनौतियों के प्रति संवेदनशील रहें तथा उनके समयबद्ध समाधान के लिए कार्य करें।
इस बात पर बल देते हुए कि प्रौद्योगिकी नागरिकों को नियमों, कानूनों, नीतियों, विधायी बहसों और समितियों के काम से संबंधित जानकारी तक पहुंच प्रदान करके विधायी प्रक्रियाओं की सार्वजनिक समझ को काफी बढ़ा सकती है, लोकसभा अध्यक्ष ने अधिक पारदर्शिता और सुलभता का आह्वान किया, जिससे विधानमंडलों और जनता के बीच संबंधों को ओर अधिक गहरा किया जा सके । नवाचारों को अपनाने में राज्य विधानमंडलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का आह्वान करते हुए श्री बिरला ने कहा कि विधानमंडलों को एक-दूसरे से सीखना चाहिए और प्रौद्योगिकी, विधायी प्रक्रियाओं तथा संस्थागत सुधारों जैसे क्षेत्रों में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के लिए विधानमंडलों के बीच एक "स्वस्थ प्रतिस्पर्धा" सुनिश्चित करना होना चाहिए।
