BRICS के सदस्य एवं साझेदार देशों के सम्मानित संसदीय प्रतिनिधिगण, केंद्रीय मंत्रिपरिषद् के सदस्यगण, राज्य विधानमंडलों के माननीय पीठासीन अधिकारीगण, माननीय सांसदगण, और देवियों और सज्जनों को नमस्कार।
भारत की संसद के इस ऐतिहासिक संविधान सदन में BRICS संसदीय मंच पर उपस्थित आप सभी महानुभावों का मैं देश की 140 करोड़ जनता की ओर से हार्दिक स्वागत करता हूँ, अभिनंदन करता हूँ।
इस अवसर पर उपस्थित BRICS सदस्य देशों के संसदीय शिष्टमंडलों, भारत सरकार के माननीय मंत्रीगण, राज्य विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारीगण तथा माननीय संसद सदस्यों का भी मैं स्वागत करता हूँ।
भारत में आपकी उपस्थिति BRICS संसदीय सहयोग के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह संवाद, पारस्परिक सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों में हमारे साझा विश्वास का भी प्रतीक है। इस वर्ष BRICS अपनी स्थापना के बीस वर्ष पूरे कर रहा है। आज इस संगठन का तेजी से विस्तार हो रहा है। वैश्विक घटनाक्रम और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करने की इस मंच की क्षमता भी तेजी से बढ़ रही है।
BRICS देश, विश्व की लगभग आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये देश विश्व के लगभग एक-तिहाई भू-क्षेत्र में फैले हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्त्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं। यह हमारी सामूहिक शक्ति और वैश्विक उत्तरदायित्व को दर्शाता है। BRICS के सदस्य देश भौगोलिक, सांस्कृतिक, भाषाई और सामाजिक दृष्टि से भिन्न हैं। लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवता के प्रति हमारी साझा जिम्मेदारी हमें एक सूत्र में बाँधती है।
भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित BRICS राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन में संयुक्त वक्तव्य का सर्वसम्मति से स्वीकृत होना एक बड़ी उपलब्धि है। इसके लिए मैं BRICS देशों के प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूँ।
अब आवश्यकता है कि इन प्रतिबद्धताओं को ठोस परिणामों में बदला जाए। कानून निर्माण, बजट, विचार-विमर्श और निगरानी के माध्यम से हमारी संसदें इस दिशा में महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
आज विश्व क्षेत्रीय संघर्षों, युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, व्यापारिक तनाव, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। इन चुनौतियों का प्रभाव किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं रहता। ऐसे समय में संवाद, कूटनीति और आपसी सहयोग का महत्त्व और भी बढ़ जाता है।
हमारा विश्वास है कि संसदें आपसी समझ और विश्वास को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय तनाव कम करने तथा वैश्विक चुनौतियों के शांतिपूर्ण समाधान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
भारत को Mother of Democracy कहा जाता है। हमारा लोकतंत्र संवाद, वैचारिक भिन्नता और सहमति-असहमति के बावजूद परस्पर सम्मान की भावना पर आधारित है। इसी लोकतांत्रिक शक्ति के आधार पर भारत अपनी विकास यात्रा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। हमारी संसद ने अपने विधायी ढाँचे का उपयोग करते हुए ऐसी नीतियाँ और कानून बनाए हैं, जिनसे राष्ट्र की बहुआयामी प्रगति के लिए ठोस आधार तैयार हुए हैं।
BRICS ग्लोबल साउथ की आवाज को सशक्त बनाने की आकांक्षा रखता है। हमें सुनिश्चित करना होगा कि हमारी आकांक्षाएँ केवल विमर्श तक सीमित न रहें, बल्कि ठोस नीतियों और व्यावहारिक सहयोग में भी दिखाई दें।
12वें BRICS संसदीय मंच का विषय – “जन-केंद्रित विकास हेतु संसदों को सुदृढ़ बनाना” – इस दृष्टि से विशेष महत्त्व रखता है। इस विषय पर दो दिनों में चार प्रमुख विषयों – रेजिलिएंस (Resilience), इनोवेशन (Innovation), को-ऑपरेशन (Co-operation) और सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) – पर चर्चा होगी, व्यापक विचार-विमर्श होगा।
हमें ऐसी सुदृढ़ संसदीय संस्थाओं का निर्माण करना है, जो चुनौतियों के बीच विधायी निरंतरता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक निगरानी सुनिश्चित करें। हमारी संसदें जीवंत संस्थाएँ हैं। इन्हें जन-अपेक्षाओं के अनुरूप स्वयं को ढालना है, अपनी कार्यप्रणाली में नवाचार अपनाना है और संवाद, सहमति, पारदर्शिता तथा जवाबदेही की परंपराओं को सुदृढ़ करना है।
संसदीय संदर्भ में Innovation का अर्थ लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी, सहभागी और जन-केंद्रित बनाने के लिए नए विचारों एवं कार्यपद्धतियों को विकसित करना भी है।
संसदीय सहयोग की शक्ति अपनी विविधताओं को सामूहिक प्रगति की शक्ति बनाने में निहित है। हमारी संसदें विचारों और अनुभवों को साझा करें। साझा चुनौतियों का समाधान निकालें और एक-दूसरे की क्षमताओं तथा सर्वोत्तम प्रथाओं का लाभ उठाएँ। हमें ऐसे समाधान विकसित करने चाहिए, जो नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ और अधिक न्यायसंगत, समावेशी तथा शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण में सहायक हों।
भारतीय दर्शन में कहा जाता है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं। यह दृष्टि BRICS की संसदों के लिए भी मार्गदर्शक है।
वर्तमान युवा पीढ़ी आकांक्षी है। उसके पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है, तकनीकी ज्ञान है। इन युवाओं को उनकी प्रतिभा के अनुरूप अवसर मिलने चाहिए और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्राप्त होना चाहिए। इसलिए हमारी संसदों का दायित्व है कि वे युवाओं की आकांक्षाओं को समझें, उनकी आवाज को स्थान दें और उनकी प्रतिभा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ें।
संसदीय डिप्लोमेसी की वास्तविक शक्ति इसमें निहित है कि हम अपनी-अपनी संप्रभुता का सम्मान करते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंधों में लोकतांत्रिक दृष्टिकोण का समावेश करें। हमें अपने अनुभवों को साझी कार्रवाई में, आपसी समझ को विश्वास में और संवाद को ठोस सहयोग में परिवर्तित करना होगा।
भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने BRICS को “समाधानों का ecosystem” बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। हमारी सफलता केवल चर्चाओं से नहीं, बल्कि उनसे उत्पन्न ठोस परिणामों से मापी जाएगी।
इसलिए आज इस मंच से हमें साझा भविष्य का एजेंडा तैयार करने का संकल्प लेना चाहिए। हमारी राष्ट्रीय परिस्थितियाँ और दृष्टिकोण भिन्न हो सकते हैं, लेकिन हमारी आकांक्षाएँ समान हैं – शांति, सुरक्षा, परस्पर सम्मान, समान अवसर और अपने नागरिकों के लिए बेहतर जीवन।
मुझे विश्वास है कि BRICS संसदीय मंच, 2026 हमारी साझेदारी को और सुदृढ़ करेगा तथा अधिक समावेशी, शांतिपूर्ण और सतत विश्व के निर्माण में सार्थक योगदान देगा।
BRICS की वास्तविक शक्ति हमारी विविधता तथा उस विविधता को साझा उद्देश्य में बदलने की क्षमता में निहित है। हमें साथ मिलकर संसदीय सहयोग के माध्यम से ऐसी कार्ययोजना तैयार करनी होगी, जिससे सदस्य देशों के बीच विश्वास बढ़े और हमारी सामूहिक शक्ति से वैश्विक संस्थाएँ अधिक न्यायसंगत तथा मानवता की आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी बनें।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस मंच पर होने वाला विचार-विमर्श आपसी विश्वास और सहयोग को नई दिशा देगा तथा जन-केंद्रित विकास के हमारे साझा संकल्प को और सुदृढ़ करेगा। हम मिलकर ऐसी संसदीय साझेदारी का निर्माण कर पाएँगे, जो शांति, समृद्धि और सतत विकास के नए अवसर प्रदान करेगी तथा हमारी जनता की आकांक्षाओं को साकार करने में योगदान देगी।
इसी विश्वास और साझा संकल्प के साथ, मैं 12वें BRICS संसदीय मंच की सफलता की कामना करता हूँ।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
