राष्ट्रीय राजधानी के आईएनए स्थित ‘दिल्ली हाट’ में कल से 15 नवंबर, 2026 तक 15- दिवसीय ‘शिल्प समागम मेला 2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस मेले का आयोजन केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार द्वारा सोमवार, 2 नवंबर को इस मेले का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया जाएगा।
इस अवसर पर दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) की सचिव सुश्री वी. विद्यावती, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री प्रभात त्यागी, राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम (एनडीएफडीसी) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री आशुतोष जैन के साथ-साथ मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे।
‘प्रकाश और परंपरा – ज्योति से ज्योति जलाएँ’ की थीम पर आधारित, यह कार्यक्रम कारीगरों के उत्पादों, जीवंत शिल्प प्रदर्शनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भारत के पारंपरिक शिल्प, त्योहारी प्रकाश व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाएगा।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मेला विभिन्न समूहों तथा समुदायों को अपनी रचनात्मकता, प्रतिभा एवं पारंपरिक शिल्प कौशल को प्रदर्शित करने का एक मंच प्रदान करने के मंत्रालय के प्रयासों को आगे बढ़ाता है। साथ ही, यह उनके उत्पादों को एक बड़े बाजार तक पहुंचाने के अवसर भी सृजित करता है। उन्होंने बताया कि 2022 से अब तक इन ‘शिल्प समागम मेलों’ से 1,000 से अधिक कारीगर लाभान्वित हुए हैं।
अधिकारी ने बताया कि इस वर्ष, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग (डीओएसजेई) और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) पहली बार मिलकर ‘शिल्प उत्सव’ का आयोजन करेंगे। इसमें ‘भारत ट्यूलिप’ और ‘पर्पल फेस्ट’ के तहत लगभग 150 स्टॉल लगाए जाएंगे। इस संयुक्त पहल के जरिए पारंपरिक कारीगरों, रचनात्मक प्रतिभाओं और सभी वर्गों की भागीदारी को एक साझा मंच पर साथ लाया जाएगा।
मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि इस मेले को सात अलग-अलग थीम वाले क्षेत्रों में बांटा जाएगा। इन क्षेत्रों में भारत की कला, परंपराओं, खान-पान और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की झलक देखने को मिलेगी। ‘कला आँगन’ में शिल्प कला का जीवंत प्रदर्शन होगा। ‘प्रकाश चौक’ में तरह-तरह के दीये और लाइटें होंगी। ‘पूजा पथ’ पर पूजा-पाठ से जुड़ी सामग्री मिलेगी। ‘सजावट बाज़ार’ घर की सजावट के सामान पर केन्द्रित होगा। ‘घराना’ में कपड़े और फैशन से जुड़ी सामग्रियां उपलब्ध होंगी। ‘स्वाद चौक’ में खाने-पीने की चीजें मिलेंगी; और 'मंच' पर सांस्कृतिक गतिविधियां एवं प्रस्तुतियां होंगी।
अधिकारी ने यह भी जानकारी दी कि ‘भारत ट्यूलिप’ (पारंपरिक कारीगरों के उत्थान और आजीविका संबंधी कार्यक्रम) एक ऐसी पहल है, जिसका उद्देश्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए आकांक्षी समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को भारत और विदेशों में उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम भारत की पारंपरिक कला एवं शिल्प को संरक्षित करने में योगदान देने के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा देता है।
मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि ‘पर्पल फेस्ट’ दिव्यांगता, रचनात्मकता, प्रतिभा और समान भागीदारी का एक बहुआयामी उत्सव है। उन्होंने आगे कहा कि यह आयोजन दिव्यांगजनों, संगठनों, संस्थानों, व्यवसायों, कलाकारों, पेशेवरों और अन्य हितधारकों को एक साथ लाता है ताकि वे उपलब्धियों का उत्सव मना सकें, भागीदारी को बढ़ावा दे सकें और समावेशन के बारे में बेहतर समझ विकसित कर सकें।
यह उल्लेख करना उचित होगा कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाते और शिल्प कौशल, रचनात्मकता तथा समावेशी भागीदारी के प्रति आम लोगों की व्यापक सहभागिता को प्रोत्साहित करते हुए, मंत्रालय ‘शिल्प समागम मेला 2026’ के जरिए पारंपरिक कारीगरों और उनके उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाना चाहता है।
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