भारत के उपराष्ट्रपति और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) के अध्यक्ष, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की आम सभा की 72वीं वार्षिक बैठक को संबोधित किया। केंद्रीय मंत्री और आईआईपीए कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष, डॉ. जितेंद्र सिंह, महानिदेशक, आईआईपीए, डॉ. सुरेंद्र कुमार बागड़े, सामान्य निकाय और कार्यकारी परिषद के सदस्य, संकाय सदस्य, क्षेत्रीय और स्थानीय शाखाओं के प्रतिनिधि, और अन्य गणमान्य व्यक्ति इस बैठक में शामिल हुए।
Vice-President of India and President of the Indian Institute of Public Administration (IIPA), Shri C. P. Radhakrishnan, today addressed the 72nd Annual General Body Meeting of IIPA in New Delhi. The Vice-President called for citizen-centric governance, better coordination across all levels of administration, a balanced approach to economic growth and environmental sustainability. He urged IIPA to prepare civil servants for the challenges of Viksit Bharat @ 2047. Union Minister and Chairman of the IIPA Executive Council, Dr. Jitendra Singh, Director General, IIPA, Dr. Surendra Kumar Bagde, members of the General Body and Executive Council, faculty members, representatives of Regional and Local Branches, officers and staff of the Institute and other distinguished guests attended the meeting. @DrJitendraSingh
राष्ट्रीय एकता दिवस और सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के एक साथ होने के अवसर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने भारत के लौह पुरुष को श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें भारत के राजनीतिक एकीकरण का वास्तुकार बताया जिन्होंने सैकड़ों रियासतों को एक राष्ट्र में एकजुट किया।
उपराष्ट्रपति ने 2026 के दौरान आईआईपीए द्वारा किए गए महत्वपूर्ण संस्थागत सुधारों की सराहना की, जिसमें पुन: डिज़ाइन किया गया 52वां उन्नत व्यावसायिक कार्यक्रम, संरचित इंटर्नशिप कार्यक्रम और केंद्रीय सिविल सेवा और केंद्रीय सिविल लेखा सेवा के अधिकारियों की भागीदारी शामिल है। उन्होंने देखा कि इन पहलों ने संस्थान के प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे को मजबूत किया है। उन्होंने मार्गदर्शन और समर्थन के लिए डॉ. जितेंद्र सिंह की भी सराहना की और सार्वजनिक प्रशासन के लिए एक प्रमुख संस्थान के रूप में आईआईपीए को आगे बढ़ाने में उनके प्रयासों के लिए महानिदेशक, संकाय और कर्मचारियों की सराहना की।
यह देखते हुए कि सार्वजनिक प्रशासन एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि आज शासन के तेज़, नागरिक-केंद्रित, प्रौद्योगिकी-सक्षम, डेटा-संचालित और परिणाम-उन्मुख होने की उम्मीद बढ़ रही है। उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि सुशासन को केवल आर्थिक विकास से नहीं मापा जाना चाहिए बल्कि लोगों की खुशी, जीवन स्तर और समग्र कल्याण पर इसके प्रभाव से भी मापा जाना चाहिए।
गरीबी उन्मूलन में भारत की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से ऊपर लाया गया है। उन्होंने इसे समावेशी विकास और बेहतर जीवन स्तर की दिशा में निरंतर प्रयासों के प्रभाव को प्रतिबिंबित करने वाली एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने दोहराया कि शासन का अंतिम उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि आर्थिक प्रगति प्रत्येक नागरिक के लिए सम्मान, सुरक्षा और बेहतर अवसरों में तब्दील हो।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावी लोक प्रशासन के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और जिला-स्तरीय प्रशासन के बीच निर्बाध समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शासन तभी सार्थक परिणाम दे सकता है जब प्रशासन के विभिन्न स्तर एक साझा दृष्टिकोण और सामान्य उद्देश्य के साथ मिलकर काम करें।
उपराष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के प्रति संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करते हुए लोगों की भलाई के लिए प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने आईआईपीए से विकसित भारत@2047 के दृष्टिकोण को साकार करने में सिविल सेवाओं की बदलती भूमिका पर अपना काम केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत की प्रशासनिक संरचनाएं बड़े पैमाने पर तब विकसित हुई थीं जब देश मुख्य रूप से ग्रामीण था और कृषि आजीविका का प्रमुख स्रोत थी। हालाँकि देश में तेजी से बदलाव हो रहे है इसलिए उभरती वास्तविकताओं को अपनाने के लिए प्रशासनिक प्रणालियों को भी फिर से तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने आईआईपीए से इस महत्वपूर्ण प्रयास में नेतृत्व करने और सिविल सेवकों की अगली पीढ़ी को तैयार करने का आग्रह किया।
अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत@2047 की दिशा में भारत की यात्रा में आईआईपीए की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने आईआईपीए और उसके सदस्यों से यह सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक रूप से काम करने का आह्वान किया कि भारत का शासन ढांचा उत्तरदायी, समावेशी, नैतिक और भविष्य के लिए तैयार रहे।
“Good governance requires teamwork, coordination, and a common purpose.” : Vice President Shri C. P. Radhakrishnan at the 72nd Annual Meeting of the General Body of the Indian Institute of Public Administration, New Delhi https://t.co/19h7fqy5qm
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान और लोक प्रशासन के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान को मान्यता देते हुए 72वीं वार्षिक आम सभा की बैठक में पॉल एच. एप्पलबी पुरस्कार, शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ आईआईपीए शाखा पुरस्कार भी प्रदान किए।
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