उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन आज तमिलनाडु के डिंडीगुल स्थित गांधीग्राम ग्रामीण संस्थान (मानद विश्वविद्यालय) के स्वर्ण जयंती समारोह एवं 39वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए तथा उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
Vice-President Shri C. P. Radhakrishnan graced the Golden Jubilee Celebrations and 39th Convocation of Gandhigram Rural Institute (Deemed to be University), Dindigul, Tamil Nadu, today, and conferred gold medals on meritorious students. Emphasising that Viksit Bharat 2047 begins with developed villages, he highlighted the transformative progress in rural infrastructure and basic amenities over the past twelve years and called for ensuring greater opportunities and a dignified life for every rural citizen. Governor of Tamil Nadu Shri Rajendra Vishwanath Arlekar, Chancellor Dr. K. M. Annamalai, Vice-Chancellor Dr. N. Panchanatham and other dignitaries were present.
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत@2047 के संकल्प को केवल गांवों के समग्र विकास के माध्यम से ही साकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसके गांवों में निहित है और ग्रामीण विकास को राष्ट्रीय विकास का मूल आधार बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने बल देते हुए कहा कि प्रत्येक गांव को शहर में बदलना विकास का उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ग्रामीण नागरिकों को भी शहरी क्षेत्रों के समान गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे, आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं, आजीविका के अवसरों और सम्मानजनक जीवन स्तर की सुविधाएं उपलब्ध हों।
महात्मा गांधी की विरासत का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि गांधीग्राम का इतिहास गांधीवादी दर्शन से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने स्मरण किया कि डॉ. जी. रामचंद्रन और डॉ. टी. एस. सौन्दरम रामचंद्रन ने महात्मा गांधी के आदर्शों से प्रेरित होकर ग्रामीण शिक्षा, विकास और सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस संस्थान की स्थापना की थी।
सत्य और अहिंसा की स्थायी शक्ति को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने इन्हीं सिद्धांतों के बल पर ब्रिटिश साम्राज्य की ताकत को चुनौती दी और भारत को स्वतंत्रता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि गांधीवादी मूल्य आज भी समाज और राष्ट्र को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान भारत की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने ग्रामीण आवास, पेयजल, बिजली, सड़क, स्वच्छता, कृषि और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से 2023 के बीच लगभग 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए। उन्होंने कहा कि विभिन्न विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं ने लाखों लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
संपर्क सुविधाओं के महत्व पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, बाजारों और रोजगार के अवसरों को ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाने के लिए गांवों को बेहतर सड़क एवं परिवहन अवसंरचना के माध्यम से कस्बों और शहरों से जोड़ना आवश्यक है।
उन्होंने स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में स्वच्छ भारत मिशन के योगदान को भी रेखांकित किया। सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता में आए सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसानों का कल्याण देश की खाद्य सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है और इसलिए कृषि समुदाय को आवश्यक सहयोग प्रदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने पीएम-किसान योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है।
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन और डिजिटल प्रौद्योगिकियां तेजी से दुनिया को बदल रही हैं तथा रोजगार के स्वरूप में भी परिवर्तन ला रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से उभरती प्रौद्योगिकियों में दक्षता हासिल करने के साथ-साथ रचनात्मकता, समस्या समाधान की क्षमता और उद्यमशील दृष्टिकोण विकसित करने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को केवल नौकरी तलाशने वाले बनने के बजाय रोजगार सृजक बनने के लिए प्रेरित किया। महात्मा गांधी के स्वदेशी दर्शन की वर्तमान प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि घरेलू विनिर्माण, स्वदेशी प्रौद्योगिकियों, स्थानीय उद्योगों और युवा भारतीयों के नवाचारों को बढ़ावा देना स्वदेशी की आधुनिक अभिव्यक्ति है।
उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा और कौशल का उपयोग केवल व्यक्तिगत उन्नति के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के कल्याण के लिए भी करें। उन्होंने विद्यार्थियों से सादगी, आत्मनिर्भरता, सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा के गांधीवादी मूल्यों को अपने जीवन का मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से नशे और मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहने तथा अपने मित्रों, परिवारों और समुदायों के बीच जागरूकता फैलाकर नशामुक्त समाज के संदेशवाहक बनने का भी आह्वान किया।
मानद विश्वविद्यालय के रूप में अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे करने पर गांधीग्राम ग्रामीण संस्थान को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्थान सतत ग्रामीण विकास, समावेशी विकास और नवाचार आधारित अनुसंधान के एक अग्रणी केंद्र के रूप में निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए तीन विशिष्ट व्यक्तित्वों को मानद डॉक्टरेट (डॉक्टर ऑफ लेटर्स/ऑनोरिस कॉसा) की उपाधि प्रदान की। इनमें प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु एवं तमिल विद्वान तपस्वी कुंद्राकुडी पोनम्बल आदिगलार, इसरो के पूर्व वरिष्ठ एयरोस्पेस वैज्ञानिक श्री एस. नम्बी नारायणन और प्रतिष्ठित शिक्षाविद् प्रोफेसर एस. एस. एम. सुंदरम शामिल हैं।
At the 39th Convocation of Gandhigram Rural Institute ( Deemed to be University), Dindigul, Vice-President Shri C. P. Radhakrishnan conferred Honorary Doctorates (Honoris Causa) on Thavathiru Kundrakudi Ponnambala Adigalar, renowned spiritual and Tamil scholar; Shri S. Nambi Narayanan, former senior aerospace scientist of ISRO; and Professor S. S. M. Sundaram, distinguished academician, in recognition of their valuable contributions to spirituality, Tamil scholarship, science and education.
संस्थान की शैक्षणिक एवं आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उपराष्ट्रपति ने दो नवनिर्मित भवनों—परीक्षा एवं संगोष्ठी भवन तथा पुष्पकुंज हेरिटेज भवन—का उद्घाटन किया।
During the Golden Jubilee Celebrations of Gandhigram Rural Institute, Vice-President Shri C. P. Radhakrishnan inaugurated two new buildings and laid the foundation stones for three new projects, including a 30-classroom academic complex. He also released the book “Inclusivity of India’s Ageing Population” and unveiled the Golden Jubilee Commemorative Postage Stamp and Postal Cover, marking a significant milestone in the institution’s journey.
उन्होंने डिजिटल माध्यम से तीन परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इनमें 22 केवी विद्युत उपकेंद्र एवं नियंत्रण कक्ष, शिक्षा संकाय के लिए शैक्षणिक भवन तथा 30 कक्षाओं वाला शैक्षणिक भवन परिसर शामिल हैं।
उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर 'इन्क्लूसिविटी ऑफ इंडियाज एजिंग पॉपुलेशन' नामक पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने संस्थान की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में जारी स्मारक डाक टिकट और डाक आवरण का भी अनावरण किया। यह संस्थान की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, संस्थान के कुलाधिपति डॉ. के. एम. अन्नामलाई, कुलपति डॉ. एन. पंचनाथम, कुलसचिव डॉ. के. मारिमुथु, संकाय सदस्य, शोधकर्ता, विद्यार्थी, अभिभावक तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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