असम के गुवाहाटी में खानापारा के फार्म गेट पर आयोजित आठ-दिवसीय ‘शिल्प समागम मेला 2026’ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस मेले को आगंतुकों, स्थानीय समुदायों और इसमें भाग लेने वाले कारीगरों से व्यापक सराहना मिली।
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित इस मेले ने पारंपरिक कारीगरों को अपनी विरासत को प्रदर्शित करने, ग्राहकों के साथ सीधा संपर्क स्थापित करने और अपनी सामाजिक-आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ाने का एक जीवंत मंच प्रदान किया।
कर्नाटक के मैसूर में 19 अक्टूबर को पहले संस्करण के सफल समापन के बाद, गुवाहाटी संस्करण वित्तीय वर्ष 2026–27 के ‘शिल्प समागम’ श्रृंखला का दूसरा आयोजन था।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस आठ-दिवसीय कार्यक्रम ने अपने मुख्य उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया। इन उद्देश्यों में उद्यमिता को बढ़ावा देना, बाजार तक पहुंच का विस्तार करना और अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों, सफाई मित्रों तथा विमुक्त जनजातियों (डीनोटिफाइड ट्राइब्स) जैसे लक्षित समूहों के कारीगरों के लिए आजीविका के टिकाऊ अवसर उपलब्ध कराना शामिल था।
गुवाहाटी मेले में 31 महिला कारीगरों सहित कुल 75 कारीगरों ने हिस्सा लिया। यहां आने वालों को हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों की लगभग 40 अलग-अलग किस्में देखने और खरीदने को मिलीं।
प्रदर्शित वस्तुओं में पूर्वोत्तर राज्यों की क्षेत्रीय कारीगरी के साथ-साथ असमिया मेखेला चादर, बेंत एवं बांस की शिल्पकारी, ब्लॉक-प्रिंट वाले कपड़े, कढ़ाई, चमड़े के काम और हथकरघा वस्त्र सहित पूरे देश की पारंपरिक कलाओं को शामिल किया गया था।
उपभोक्ताओं के साथ सीधे संवाद से कारीगरों को संभावित व्यावसायिक संबंध बनाने, बाजार से बहुमूल्य प्रतिक्रिया प्राप्त करने और सीधे बिक्री से अच्छी-खासी आय अर्जित करने में मदद मिली।
इस मेले का एक महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव श्री सुधांशु पंत का दौरा रहा। उनके साथ एनएसएफडीसी (राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री प्रभात त्यागी और तीनों शीर्ष निगमों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
विभिन्न स्टॉलों तथा मंत्रालय के पैवेलियन के अपने व्यापक दौरे के दौरान, श्री पंत ने कारीगरों से बातचीत की ताकि उनके कौशल और बाजार के अवसरों के बारे में जान सकें।
उन्होंने कहा कि यह पहल माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विजन के अनुरूप है। यह कारीगरों के लिए अपनी पारंपरिक कलाकारी को टिकाऊ आर्थिक आत्मनिर्भरता में बदलने के ठोस अवसर सृजित करती है।
इस मेले में मुख्य रूप से ‘भारत-ट्यूलिप’ (पारंपरिक कारीगरों के उत्थान और आजीविका कार्यक्रम) को बढ़ावा देने पर ध्यान केन्द्रित किया गया। यह कार्यक्रम वास्तविक दुकानों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए कारीगरों को बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराता है। पारंपरिक कौशल को आधुनिक उपभोक्ता माध्यमों से जोड़कर, यह कार्यक्रम बाजार के संपर्कों को मजबूत करता है और कारीगरों को अपने व्यवसाय का विस्तार करने में मदद करता है।
मंत्रालय के समर्पित पैवेलियन ने जनसंपर्क के एक प्रमुख केन्द्र के रूप में कार्य किया। यहां संवादात्मक एलईडी डिस्प्ले के जरिए आगंतुकों को कल्याणकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता और कौशल विकास योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई। ये योजनाएं मंत्रालय के तीन राष्ट्रीय निगमों – राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) – द्वारा संचालित की जाती हैं।
पूर्वोत्तर क्षेत्र के पारंपरिक संगीत और लोक नृत्यों पर आधारित प्रतिदिन के सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मेले के प्रति लोगों के आकर्षण को काफी बढ़ा दिया। इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों को आठों दिन लाइव स्ट्रीम किया गया ताकि आयोजन स्थल के बाहर भी लोग इनसे जुड़ सकें।
मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि जनता की ओर से मिली उत्साहजनक प्रतिक्रिया और इसमें भाग लेने वाले कारीगरों को मिले अच्छे व्यावसायिक परिणाम वास्तव में प्रत्यक्ष बाजार पहुंच, जन जागरूकता और सांस्कृतिक संवर्धन को एक साथ जोड़ने की प्रभावशीलता को दर्शाते हैं। ‘शिल्प समागम मेला’ जैसी पहलों के जरिए, मंत्रालय वंचित समुदायों को सशक्त बनाने और भारत की समृद्ध हथकरघा एवं हस्तशिल्प विरासत को संरक्षित करने की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ा रहा है।
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