सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय Read in English

सड़क से स्वावलंबन तक

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DetailInformation
Date28 October 2026 (Wednesday)
Time6:14 PM
Topic / Ministryसामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
Languageहिन्दी · Read in English
Reading time5 min (827 words)

46 वर्षीय मीरा ठाकुर (बदला हुआ नाम) का जीवन कभी बेघर होने, बीमारी और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था, लेकिन आज वही जीवन आत्मविश्वास, सम्मान और स्वावलंबन से जगमगा रहा है। इस अनूठी पहल के माध्यम से मिले अटूट सहयोग और प्रोत्साहन ने ही इस सकारात्मक परिवर्तन को साकार किया है।

उनकी जीवन-यात्रा सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की स्माइल (SMILE – आजीविका एवं उद्यम के लिए वंचित व्यक्तियों को सहायता) योजना के तहत व्यापक पुनर्वास और आजीविका संबंधी सहायता की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है।

कक्षा ग्यारहवीं उत्तीर्ण करने वाली और पहले फूलों की माला बनाने तथा खान-पान में सहायक का कार्य कर चुकीं मीरा को पारिवारिक जीवन में आए गतिरोध के बाद गंभीर व्यक्तिगत एवं वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सीमित सहारे के कारण वह आश्रय और रोजगार की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान भटकने को मजबूर थीं।

अपनी जमापूंजी और आवश्यक दस्तावेज खोने के बाद वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं, उनकी आजीविका छिन गई और अंततः वह बेघर हो गईं। आय का कोई भी विश्वसनीय स्रोत न होने के कारण, उन्होंने अपनी बुनियादी जरूरतों और चिकित्सा खर्चों को पूरा करने के लिए मंदिरों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगना शुरू कर दिया। गंभीर एनीमिया और अत्यधिक कमजोरी से पीड़ित होने के कारण उन्हें अपने जीवन को दोबारा पटरी पर लाने के लिए चिकित्सीय देखभाल, निरंतर सहारे और एक सुरक्षित माहौल की सख्त आवश्यकता थी।

16 मार्च 2024 को परम पूज्य रक्षक आदिनाथ वेलफेयर एंड एजुकेशनल सोसायटी (PRAWES) की टीम ने मध्य प्रदेश के इंदौर में जिला कोर्ट स्थित शनि मंदिर परिसर से मीरा का रेस्क्यू किया और उन्हें पुनर्वास व्यवस्था से जोड़ा। उन्हें अरबिंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ गंभीर एनीमिया के चलते उनका इलाज और पोषण का पूरा ध्यान रखा गया। इसके अलावा, उनकी दोनों आँखों का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन भी कराया गया, जिससे उनकी देखने की क्षमता और कुल मिलाकर स्वास्थ्य में सुधार हुआ।

स्माइल (SMILE) योजना के अंतर्गत उन्हें सुरक्षित आवास, चिकित्सीय उपचार, मनोवैज्ञानिक परामर्श और निरंतर पुनर्वास सहायता सहित संपूर्ण संस्थागत देखभाल प्रदान की गई। इस सुरक्षित और सहायक वातावरण ने उन्हें शारीरिक शक्ति, भावनात्मक स्थिरता और दूसरों पर विश्वास पुनः प्राप्त करने में मदद की।

जैसे-जैसे उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ, मीरा ने योग, ध्यान और संगीत चिकित्सा सत्रों में भाग लेना शुरू कर दिया। उन्होंने राम नवमी के दौरान एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने एक नाट्य प्रस्तुति में शबरी की भूमिका निभाई—जो उनके बढ़ते आत्मविश्वास और दूसरों से जुड़ने की इच्छा को दर्शाता है। इसके बाद उन्होंने पुरानी साड़ियों से कालीन और डोरमैट (पायदान) बनाना, सिलाई, मोती की माला बनाना, अगरबत्ती बनाना और गोबर से बनी मूर्तियाँ, दीये और हवन कुंड जैसे पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद तैयार करने में कौशल हासिल किया। जुलाई 2025 में, उन्होंने राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (एनआईएसडी) द्वारा आयोजित एक कार्यशाला में भाग लिया, जिससे उनकी पुनर्वास और कौशल-विकास की यात्रा को और मजबूती मिली।

समय के साथ, मीरा पुनर्वास केंद्र की एक जिम्मेदार और सम्मानित सदस्य बन गईं। उन्होंने वार्ड-प्रबंधन की जिम्मेदारियों को संभाला और साथी महिला निवासियों की भलाई में सक्रिय रूप से सहयोग किया। आज, वह भीख मांगने पर निर्भर रहने की स्थिति से बाहर आ चुकी हैं और आजीविका कमाने के लिए अपने कौशल का उपयोग कर रही हैं। उन्होंने पुनर्वास केंद्र में रसोई संचालन की जिम्मेदारी संभाली है और लगभग 50-60 लाभार्थियों के लिए प्रतिदिन खुद नाश्ता तैयार करती हैं। उनका यह योगदान उनकी खाना पकाने की कला, अनुशासन और सामूहिक कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इन जिम्मेदारियों के साथ-साथ, मीरा अपने हाथ से बने उत्पादों को बेचने के लिए मेलों, बाजारों और प्रदर्शनियों में हिस्सा लेती हैं, जिससे वह हर महीने लगभग 8,000 रुपये कमा लेती हैं। पहले वह भीख मांगकर रोजाना करीब 200 रुपये प्राप्त करती थीं, जो अनिश्चित थी; अब उन्होंने हस्तशिल्प और अन्य कौशलों के जरिए आजीविका का एक व्यवस्थित और सम्मानजनक जरिया अपना लिया है। उनका आत्मविश्वास वापस आ गया है, उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित हुई है और उन्हें दूसरों के जीवन में योगदान देने के नए तरीके मिल गए हैं। वह आर्थिक रूप से और अधिक स्वतंत्र होना चाहती हैं, एक स्थिर आजीविका पाना चाहती हैं और भविष्य में अन्य पुनर्वासित महिलाओं के साथ अपने खुद के घर में रहना चाहती हैं। वह अपने अनुभवों का इस्तेमाल उन लोगों की मदद करने के लिए भी करना चाहती हैं, जो वैसी ही कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

मीरा की यह यात्रा दर्शाती है कि कैसे रेस्क्यू, स्वास्थ्य सेवा, मनोवैज्ञानिक सहायता, व्यावसायिक प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर मिलकर एक सार्थक पुनर्वास को संभव बना सकते हैं। स्माइल (SMILE) योजना के तहत मिले निरंतर सहयोग के माध्यम से, वह संवेदनशीलता और असुरक्षा के दौर से निकलकर आत्मनिर्भरता की ओर और अनिश्चितता से बढ़कर नई उम्मीद की तरफ बढ़ी हैं। उनकी यह कहानी एक ऐसे व्यापक पुनर्वास दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित करती है, जो तात्कालिक राहत से कहीं आगे बढ़कर लोगों को गरिमा, आत्मविश्वास और स्थायी आजीविका के अवसरों के साथ अपना जीवन फिर से संवारने में सक्षम बनाता है।

पीके/केसी/आरटी/डीवी/डीए

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